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बैकुंठपुर@नई कलेक्टर की दस्तक और खनिज विभाग की अचानक सक्रियता, क्या सचमुच बदलेगा कोरिया का हाल?

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  • कोरिया में खनिज विभाग की अचानक सक्रियता पर उठा सवाल
  • नई कलेक्टर के आते ही शुरू हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई, लेकिन अवैध ईंट भट्ठों,रेत माफियाओं और जंगलों में चल रहे अवैध कोयला कारोबार पर अब भी खामोशी क्यों?


-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,16 मई 2026(घटती-घटना)।
कोरिया जिले में नई कलेक्टर के पदभार ग्रहण करते ही प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, हर विभाग खुद को सक्रिय और जवाबदेह साबित करने में जुटा हुआ है,कहीं निरीक्षण हो रहे हैं,कहीं नोटिस जारी हो रहे हैं,तो कहीं कार्रवाई की तस्वीरें और प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि अब जिले में सख्त प्रशासन का दौर शुरू हो चुका है।
इसी क्रम में जिला खनिज विभाग भी अचानक पूरी तरह सक्रिय नजर आने लगा है,विभाग द्वारा लगातार अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, सड़कों पर वाहनों की जांच,ट्रैक्टरों की धरपकड़,रेत और गिट्टी से भरे वाहनों पर चालानी कार्रवाई और जब्ती की खबरें सामने आ रही हैं,लेकिन इन कार्रवाइयों के बीच अब जिले में एक बड़ा सवाल तेजी से उठ रहा है क्या यह वास्तविक कार्रवाई है या केवल नई कलेक्टर को सक्रियता दिखाने का प्रयास? क्योंकि जिले के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि कोरिया में अवैध खनिज कारोबार केवल सड़क पर चलते कुछ ट्रैक्टरों तक सीमित नहीं है। यहां वर्षों से अवैध ईंट भट्ठों का संचालन हो रहा है, जंगलों में अवैध कोयला उत्खनन होता है, नदियों और नालों से रातभर रेत निकाली जाती है,लेकिन इन बड़े नेटवर्कों पर कभी वैसी कार्रवाई नहीं दिखती जैसी छोटे परिवहनकर्ताओं पर दिखाई जाती है।
राजनीतिक संरक्षण का भी आरोप
अवैध खनिज कारोबार को लेकर हमेशा राजनीतिक संरक्षण की चर्चा होती रही है,चाहे अवैध ईंट भट्ठे हों, रेत का कारोबार हो या कोयले का खेल—स्थानीय स्तर पर यह माना जाता है कि बिना राजनीतिक सहमति के इतना बड़ा नेटवर्क संचालित होना संभव नहीं है,इसी कारण पूर्व में कई अधिकारी कार्रवाई शुरू करने के बाद भी पीछे हटते नजर आए,कई बार कार्रवाई की शुरुआत हुई लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ गया,इससे यह धारणा मजबूत होती गई कि जिले में अवैध खनिज कारोबार के खिलाफ स्थायी कार्रवाई करना आसान नहीं है।
नई कलेक्टर से लोगों को उम्मीद
अब जिले की नई कलेक्टर से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लोग चाहते हैं कि प्रशासन केवल दिखावटी कार्रवाई तक सीमित न रहे बल्कि अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचे,यदि वास्तव में सुशासन और पारदर्शिता लागू करनी है तो कार्रवाई केवल सड़क पर चलने वाले वाहनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए,अवैध ईंट भट्ठों की जांच,जंगलों में चल रहे अवैध कोयला उत्खनन पर रोक,रेत माफियाओं पर सख्त कार्रवाई और विभागीय मिलीभगत की निष्पक्ष जांच—यही वह कदम होंगे जिनसे लोगों का भरोसा प्रशासन पर मजबूत हो सकता है।
खनिज विभाग की कार्रवाई पर इसलिए उठ रहे सवाल
जिले में यह चर्चा आम है कि खनिज विभाग को हर अवैध गतिविधि की जानकारी रहती है, कौन सा ईंट भट्ठा बिना अनुमति चल रहा है,कहां से अवैध कोयला निकाला जा रहा है,कौन से रास्ते से उसका परिवहन हो रहा है और किन नदियों से रात में रेत निकाली जाती है, यह सब किसी से छिपा नहीं है,फिर भी वर्षों से इन मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई, यही कारण है कि जब विभाग अचानक अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान चलाता है, तो लोग यह पूछने लगते हैं कि आखिर वह पूरा तंत्र क्यों अछूता है जो इस अवैध कारोबार की जड़ है? लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में खनिज विभाग ईमानदारी से कार्रवाई करना चाहता है,तो उसे सबसे पहले उन अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई करनी चाहिए जहां बड़े पैमाने पर अवैध कोयले की खपत होती है।
जिले में धड़ल्ले से चल रहे अवैध ईंट भट्ठे
कोरिया जिले के कई क्षेत्रों में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन लंबे समय से जारी है। इनमें से कई भट्ठों के पास न तो वैध अनुमति है और न ही पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जाता है,इन भट्ठों में जलाने के लिए बड़ी मात्रा में कोयले का उपयोग होता है, आरोप यह हैं कि इनमें इस्तेमाल होने वाला अधिकांश कोयला अवैध खदानों से निकाला जाता है,जंगलों के भीतर छोटे-छोटे गड्ढों से कोयला निकालकर उसे स्थानीय स्तर पर सप्लाई किया जाता है और फिर वही कोयला ईंट भट्ठों तक पहुंचता है, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा कारोबार बिना संरक्षण के संभव ही नहीं है।
रेत माफियाओं पर भी नहीं लग पा रही लगाम
कोरिया जिले की कई नदियां और नाले अवैध रेत उत्खनन की वजह से प्रभावित हो रहे हैं, स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय मशीनों और ट्रैक्टरों के जरिए रेत निकाली जाती है, नियमों के अनुसार जिन स्थानों पर खनन की अनुमति नहीं है वहां भी खुलेआम उत्खनन जारी रहता है, इससे नदियों का स्वरूप बदल रहा है, जल स्तर प्रभावित हो रहा है और कई गांवों में जल संकट की स्थिति भी बनने लगी है, इसके बावजूद कार्रवाई केवल कभी-कभार की खानापूर्ति तक सीमित नजर आती है।
कार्रवाई केवल छोटे लोगों पर क्यों?
खनिज विभाग की हालिया कार्रवाई के बाद कुछ वाहन मालिकों और स्थानीय लोगों ने भी सवाल उठाए हैं,उनका कहना है कि विभाग केवल छोटे ट्रैक्टर चालकों और स्थानीय परिवहनकर्ताओं पर कार्रवाई कर अपनी उपलब्धि दिखाता है,जबकि बड़े नेटवर्कों तक पहुंचने की कोशिश नहीं करता,कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि अवैध ईंट भट्ठे और अवैध कोयला कारोबार विभाग की नजर में नहीं आते,तो फिर केवल सड़क पर चलने वाले वाहनों को पकड़ना समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता,हालांकि कई लोग यह भी मानते हैं कि अवैध परिवहन पूरी तरह गलत है और उस पर कार्रवाई होना जरूरी है,लेकिन कार्रवाई निष्पक्ष और समान रूप से होनी चाहिए।
प्रति भट्ठा तय व्यवस्था की चर्चा…
जिले में यह चर्चा लंबे समय से होती रही है कि अवैध ईंट भट्ठों और खनिज कारोबार से जुड़े लोगों से मासिक व्यवस्था के नाम पर राशि वसूली जाती है, स्थानीय स्तर पर लोग खुलकर आरोप लगाते हैं कि कई कारोबार इसलिए वर्षों से बिना रोकटोक चल रहे हैं क्योंकि उनसे जुड़े लोगों की पहुंच राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक होती है, यही वजह है कि छोटे मामलों में कार्रवाई होती दिखाई देती है लेकिन बड़े नेटवर्कों पर हाथ डालने से अधिकारी बचते नजर आते हैं।
जंगलों में अवैध कोयला उत्खनन बना बड़ा खतरा
कोरिया जिले के कई वन क्षेत्रों में अवैध कोयला उत्खनन की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय अवैध खुदाई की गतिविधियां देखी जाती हैं, छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह काम अब संगठित कारोबार का रूप ले चुका है, जानकार बताते हैं कि जंगलों में अवैध उत्खनन केवल राजस्व हानि का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा है, बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के कोयला निकालने से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है,कई बार अंदर धंसान होने की घटनाएं भी सामने आई हैं,लेकिन इन मामलों पर कभी गंभीर जांच नहीं होती।


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