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नई दिल्ली@आर्थिक मुद्दों और विदेश नीति को लेकर सरकार पर उठे सवाल…सोशल मीडिया पोस्ट में आर्थिक बदइंतजामी, निवेश पलायन और गिरती वैश्विक साख को लेकर तीखे आरोप

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‘युद्ध नहीं,नीतिगत विफलताएं असली संकट’ : आशीष वर्मा
नई दिल्ली,16 मई 2026। देश की आर्थिक स्थिति,विदेशी निवेश,रुपये की गिरती स्थिति और विदेश नीति को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक आशीष वर्मा द्वारा जारी एक विस्तृत पोस्ट में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि देश की आर्थिक चुनौतियों को युद्ध और वैश्विक परिस्थितियों की आड़ में छिपाने की कोशिश की जा रही है,जबकि वास्तविक कारण नीतिगत विफलताएं और आर्थिक कुप्रबंधन हैं।
रुपया कमजोर क्यों हुआ?
आशीष वर्मा ने अपने बयान में सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय रुपया दुनिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में क्यों पहुंच गया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि वैश्विक संकट और युद्ध ही कारण हैं तो अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं उसी अनुपात में प्रभावित क्यों नहीं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार कमजोर होती मुद्रा देश की आर्थिक नीतियों पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
विदेशी निवेशकों के पलायन पर भी सवाल : पोस्ट में यह भी कहा गया कि विदेशी संस्थागत निवेशक (स्नढ्ढढ्ढ और स्नक्कढ्ढ) पिछले कई वर्षों से भारतीय बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं। इसे लेकर सवाल उठाया गया कि क्या निवेशकों को सरकार की आर्थिक नीतियों पर भरोसा नहीं रहा। आशीष वर्मा ने लिखा कि यदि वर्तमान संकट का कारण केवल युद्ध है तो फिर निवेशकों का भरोसा कई वर्ष पहले से क्यों कमजोर होने लगा था।
चाबहार परियोजना और ऊर्जा नीति पर टिप्पणी : पोस्ट में भारत की रणनीतिक परियोजनाओं और ऊर्जा नीति का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने सवाल किया कि चाबहार बंदरगाह जैसी महत्वपूर्ण परियोजना से भारत पीछे क्यों हट गया,जबकि यह परियोजना क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। इसके साथ ही रूस और ईरान से सस्ते तेल की नीति में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए। पोस्ट में कहा गया कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए।
विशेषज्ञों की राय अलग-अलग
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी भी देश की मुद्रा,निवेश और आर्थिक प्रदर्शन कई वैश्विक एवं घरेलू कारकों से प्रभावित होते हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार,युद्ध,ब्याज दरें, राजनीतिक स्थिरता,नीतिगत फैसले और निवेशकों का भरोसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आर्थिक मुद्दों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यात्मक चर्चा और आंकड़ों के आधार पर बहस अधिक आवश्यक है।
सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
समाचार लिखे जाने तक केंद्र सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस सोशल मीडिया पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
‘पासपोर्ट की साख गिरने’ का दावा
आशीष वर्मा ने भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय छवि को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि विदेश नीति मजबूत होती तो वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और प्रभाव अलग दिखाई देता। हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक आंकड़े साझा नहीं किए।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे सरकार की आर्थिक नीतियों पर जरूरी सवाल बताया, जबकि समर्थकों ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रेरित करार दिया। कई यूजर्स ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी, युद्ध, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का असर सभी देशों पर पड़ा है, जबकि अन्य लोगों ने घरेलू नीतियों को अधिक जिम्मेदार बताया।


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