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अम्बिकापुर@नवापारा का चर्चित बंसल इलेक्टि्रकल्स का कारोबारी जांच के घेरे में…

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  • ‘कच्चे बिल,अलग-अलग खातों में भुगतान और जीएसटी से बचने के खेल’ की बाजार में चर्चा
  • ग्राहकों और व्यापारियों ने उठाए सवाल,निष्पक्ष जांच की मांग तेज


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 मई 2026 (घटती-घटना)। नवापारा क्षेत्र का एक बड़ा इलेक्टि्रकल्स व्यवसाय इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। स्थानीय लोगों,व्यापारियों और ग्राहकों के बीच यह मामला तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। क्षेत्र के चर्चित प्रतिष्ठान ‘बंसल इलेक्टि्रकल्स’ पर आरोप है कि यहां प्रतिदिन लाखों रुपये का कारोबार होने के बावजूद बड़ी मात्रा में बिक्री कच्चे बिलों के माध्यम से की जा रही है। बताया जा रहा है कि दुकान में इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्टि्रकल सामान की भारी बिक्री होती है,लेकिन अधिकांश ग्राहकों को नियमित जीएसटी बिल देने के बजाय साधारण पर्ची या बिना नाम-पते वाला बिल थमा दिया जाता है। इससे शासन को बड़े पैमाने पर कर राजस्व की क्षति होने की आशंका जताई जा रही है।
जीएसटी बिल चाहिए अलग पैसा लगेगा…
कई ग्राहकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जब वे जीएसटी बिल की मांग करते हैं तो दुकान पक्ष द्वारा अलग से राशि भुगतान करने की बात कही जाती है। आरोप है कि सामान्य खरीद पर ग्राहक को सिर्फ कच्चा बिल दिया जाता है,जबकि पक्का टैक्स इनवॉइस मांगने पर अतिरिक्त प्रतिशत जोड़ने की चर्चा होती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जीएसटी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है। व्यापारिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पंजीकृत व्यापारी के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार टैक्स इनवॉइस देना आवश्यक होता है।
‘प्रतिदिन लाखों का कारोबार’ की चर्चा
व्यापारिक क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उक्त प्रतिष्ठान में रोजाना बड़ी मात्रा में इलेक्टि्रकल सामान,वायर,मोटर,घरेलू उपकरण, फैन,पंप और अन्य सामग्री की बिक्री होती है। त्योहारी सीजन और निर्माण कार्यों के दौरान कारोबार और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में यदि वास्तविक बिक्री का पूरा हिसाब कर विभाग के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा रहा हो तो यह करोड़ों रुपये के टैक्स अंतर का मामला बन सकता है।
बिना नाम-पते के बिल,उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी…
ग्राहकों का यह भी कहना है कि कई बार दिए जाने वाले बिलों में ग्राहक का नाम,मोबाइल नंबर या पूरा टैक्स विवरण तक दर्ज नहीं रहता। इससे वारंटी, रिप्लेसमेंट और सर्विस संबंधी मामलों में उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ती है। एक ग्राहक ने बताया कि महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के बाद जब खराबी आई तो उचित बिल नहीं होने के कारण कंपनी सर्विस सेंटर में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे मामलों ने उपभोक्ता अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार और कर्मचारियों के खातों में भुगतान लेने का आरोप…
मामले का सबसे गंभीर पक्ष यह बताया जा रहा है कि दुकान में भुगतान केवल मुख्य व्यावसायिक खाते में ही नहीं बल्कि परिवार के सदस्यों एवं कर्मचारियों के व्यक्तिगत खातों में भी लिया जाता है। सूत्रों के अनुसार ऑनलाइन ट्रांसफर, यूपीआई और बैंक भुगतान को अलग-अलग खातों में विभाजित कर लेन-देन किया जाता है। बाजार में चर्चा है कि ऐसा टैक्स देनदारी कम दिखाने और वास्तविक कारोबार छिपाने के उद्देश्य से किया जा सकता है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लंबे समय से चल रही बताई जा रही है।
विभागीय मिलीभगत की चर्चाएं
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि संबंधित विभागों से कथित साठगांठ के कारण अब तक किसी प्रकार की बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि छोटे दुकानदारों पर त्वरित कार्रवाई होती है,जबकि बड़े कारोबारियों के मामलों में विभागीय सक्रियता नजर नहीं आती। लोगों का कहना है कि यदि जीएसटी विभाग,आयकर विभाग और वाणिज्यिक कर विभाग संयुक्त रूप से दस्तावेजों,बैंक खातों और बिक्री रजिस्टर की जांच करे तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
व्यापारियों में असंतोष
ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले व्यापारियों का कहना है कि यदि कुछ कारोबारी नियमों से बचकर व्यापार करेंगे तो इससे बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होगी। वैध टैक्स चुकाने वाले दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ता है जबकि नियमों से बचने वाले व्यापारी कम कीमत पर सामान बेचकर बाजार प्रभावित करते हैं। कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं होने से सरकार की राजस्व व्यवस्था प्रभावित होती है और गलत संदेश जाता है।
जांच की मांग तेज…
स्थानीय नागरिकों एवं व्यापारिक वर्ग ने शासन-प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दुकान की बिक्री,जीएसटी रिटर्न,बैंक खातों, यूपीआई लेन-देन और बिलिंग व्यवस्था की गहन जांच की जाए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि बाजार में पारदर्शिता बनी रहे और शासन को होने वाले राजस्व नुकसान पर रोक लग सके।
इनका कहना है…
इस संबंध में संबंधित प्रतिष्ठान का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। यदि भविष्य में उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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