- एक ही राइस मिलर के गोदाम में चार महीने में दूसरी बार आग, धान खरीदी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
- पहली जांच का सच अब तक धुएं में,दूसरी घटना ने बढ़ाई साजिश की आशंका

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,16 मई 2026 (घटती-घटना)। जिले के पर्री स्थित संदीप एग्रो एजेंसी के बंद पड़े बारदाना गोदाम में एक बार फिर लगी भीषण आग अब केवल आगजनी की सामान्य घटना नहीं रह गई है,चार महीने के भीतर एक ही गोदाम में दूसरी बार आग लगने से प्रशासनिक व्यवस्था,धान खरीदी प्रणाली और गोदाम प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं,स्थानीय लोगों से लेकर धान खरीदी व्यवस्था से जुड़े जानकारों तक, हर कोई अब यही पूछ रहा है—आखिर यह आग लग रही है या लगाई जा रही है?
गुरुवार को लगी इस आग में हजारों पुराने और खराब बारदाने जलकर राख हो गए। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते गोदाम के भीतर धुएं और लपटों का गुबार फैल गया, सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, हालांकि तब तक भारी नुकसान हो चुका था,लेकिन इस पूरी घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इसी गोदाम में जनवरी 2026 में भी आग लग चुकी है। उस घटना के बाद जांच टीम गठित हुई थी,प्रशासनिक बयान आए थे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो आग के वास्तविक कारण सामने आए और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई दिखाई दी। अब दूसरी बार आग लगने के बाद पुराने सवाल फिर से जिंदा हो गए हैं।
प्रशासन फिर जांच की बात कर रहा,लेकिन भरोसा कम
घटना के बाद एक बार फिर प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं, अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी,शॉर्ट सर्किट,लापरवाही,तकनीकी कारण और संभावित साजिश—सभी बिंदुओं पर पड़ताल होगी,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार जांच वास्तव में निष्पक्ष और प्रभावी होगी? क्योंकि पिछली बार भी जांच टीम बनी थी,लेकिन उसका परिणाम आज तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया,यही कारण है कि अब लोगों में जांच प्रक्रिया को लेकर भरोसे से ज्यादा संदेह दिखाई दे रहा है।
आखिर बारदाना इतना महत्वपूर्ण क्यों?
धान खरीदी व्यवस्था में बारदाना केवल बोरे नहीं होते,बल्कि पूरी खरीदी प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं, कितने बारदाने जारी हुए, कितने उपयोग हुए,कितने गोदाम में रखे गए और कितने वापस आए—इन्हीं आंकड़ों से धान खरीदी की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है,विशेषज्ञों की मानें तो बारदाना ही वह कड़ी है जिससे धान स्टॉक,परिवहन,भंडारण और वास्तविक खरीदी का हिसाब जुड़ा रहता है,यदि बारदाना रिकॉर्ड में गड़बड़ी होती है तो धान की कमी, फर्जी खरीदी,अतिरिक्त भुगतान या स्टॉक अंतर जैसी बड़ी अनियमितताओं की आशंका पैदा हो जाती है,यही वजह है कि बार-बार बारदाना गोदाम में आग लगने की घटनाओं को लोग सामान्य हादसा मानने को तैयार नहीं हैं।
धान खरीदी व्यवस्था पर असर
इस घटना ने धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं,धान खरीदी में हर साल करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है और बारदाना उसकी सबसे अहम कड़ी माना जाता है,यदि बारदाना रिकॉर्ड ही सुरक्षित नहीं रहेंगे,या बार-बार आग में नष्ट होते रहेंगे,तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ना तय है, विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मामले में केवल आग लगने की जांच पर्याप्त नहीं होगी, प्रशासन को बारदाना स्टॉक, धान खरीदी रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, आवंटन रजिस्टर और गोदाम प्रबंधन की भी विस्तृत जांच करनी चाहिए।
अब सबकी नजर जांच पर…
फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है और नुकसान का आंकलन किया जा रहा है,लेकिन इस घटना ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनके जवाब अब जरूरी हो गए हैं,क्या यह महज हादसा है? क्या यह लापरवाही का परिणाम है? या फिर आग की आड़ में किसी बड़े खेल को छिपाने की कोशिश हो रही है? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार जांच को केवल औपचारिकता तक सीमित रखता है या फिर सच को सामने लाने के लिए वास्तव में निष्पक्ष और गहराई से कार्रवाई करता है,क्योंकि यदि दूसरी बार भी मामला केवल अज्ञात कारण बताकर बंद कर दिया गया,तो सवालों का धुआं और गहरा जाएगा।
क्या आग की आड़ में छिपाया जा रहा कोई बड़ा खेल?
स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह आग किसी बड़े आर्थिक खेल या रिकॉर्ड मिटाने की कोशिश का हिस्सा तो नहीं, क्योंकि जब बारदाना जलता है तो केवल बोरे नहीं जलते,बल्कि कई सवाल और संभावित सबूत भी राख में बदल जाते हैं,धान खरीदी के दौरान बारदाना का हिसाब सबसे संवेदनशील माना जाता है,यदि किसी स्तर पर धान स्टॉक में कमी,फर्जी एंट्री या आवंटन में गड़बड़ी हुई हो, तो उसका सबसे बड़ा सुराग बारदाना रिकॉर्ड से ही मिलता है,ऐसे में एक ही गोदाम में बार-बार आग लगना कई संदेह पैदा कर रहा है, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहली घटना के बाद निष्पक्ष और गहराई से जांच हुई होती, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई होती और जवाबदेही तय की गई होती,तो शायद दूसरी घटना नहीं होती।
पहली जांच का क्या हुआ?
12 जनवरी 2026 को इसी गोदाम में पहली बार भीषण आग लगी थी। उस समय लाखों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी, प्रशासन ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच टीम गठित की थी, कुछ दिनों तक जांच,निरीक्षण और बयानबाजी का दौर चला,लेकिन बाद में पूरा मामला ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दिया, आज तक न तो यह स्पष्ट हुआ कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी,न किसी तकनीकी खराबी की पुष्टि हुई और न ही किसी संभावित साजिश की दिशा में कोई खुला निष्कर्ष सामने आया,अब दूसरी घटना के बाद लोग पूछ रहे हैं कि यदि पहली जांच पूरी और निष्पक्ष होती,तो क्या दूसरी बार वही घटना दोहराई जाती?
बंद पड़े गोदाम में आखिर इतनी सामग्री क्यों?
घटना का एक और बड़ा पहलू यह भी है कि बताया जा रहा है कि गोदाम करीब दो वर्षों से बंद पड़ा था,ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बंद गोदाम में इतनी बड़ी मात्रा में बारदाना क्यों रखा गया था? क्या उसका रिकॉर्ड व्यवस्थित था? क्या वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? और यदि गोदाम उपयोग में नहीं था तो निगरानी व्यवस्था किसके जिम्मे थी? स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदाम की हालत लंबे समय से खराब थी और वहां सुरक्षा लगभग नाममात्र की थी,ऐसे में आग लगने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन लगातार दूसरी बार आग लगना संयोग मानना भी आसान नहीं है।
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