78 वर्षीय साधु शाह वर्षों से कर रहे संरक्षण
अम्बिकापुर,10 मई 2026 (घटती-घटना)। पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत लुण्ड्रा विकासखंड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती प्रीति भगत की सूचना पर सर्वेक्षण दल ग्राम दोरना पहुंचा, जहां पांडुलिपि संरक्षक 78 वर्षीय साधु शाह के निवास पर दुर्लभ ताड़पत्र पांडुलिपियों का संग्रह मिला। सर्वेक्षण टीम ने साधु शाह को पांडुलिपि संरक्षण योजना की जानकारी देते हुए पांडुलिपियां दिखाने का आग्रह किया। इस दौरान उन्होंने अपने पूजाघर में सुरक्षित रखी पांडुलिपियों के दो बड़े बंडल प्रस्तुत किए। इनमें एक बंडल कार्तिक महात्म्य तथा दूसरा रामायण के बालकाण्ड एवं अयोध्या कांड से संबंधित था। साधु शाह ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय वृंदावन शाह इन पांडुलिपियों का नियमित पाठ किया करते थे। उन्होंने यह भी बताया कि ताड़पत्र पांडुलिपियों की विशेषता यह है कि इनमें स्याही का प्रयोग नहीं किया जाता। अक्षरों को लोहे की नुकीली कलम से ताड़पत्र पर उकेरा जाता है, जिससे लेखन लंबे समय तक सुरक्षित बना रहता है। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियां अत्यंत पुरानी होने के कारण अब धूमिल हो चुकी हैं। पढ़ने के समय धुंधले अक्षरों पर हल्दी मल देने से अक्षर पुनः स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। साधु शाह के पास वैद्यकी से संबंधित कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां भी थीं, जिन्हें सुरक्षा के अभाव में दीमकों ने नष्ट कर दिया। उल्लेखनीय है कि साधु शाह स्वयं भी पारंपरिक वैद्य हैं।
पांडुलिपियों की जानकारी को डिजिटल रूप से अपलोड करने का कार्य अजित कंवर द्वारा किया गया। यह सर्वेक्षण अभियान क्षेत्र की प्राचीन ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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