करोड़ों के कार्यों में गुणवत्ता पर संदेह,ग्रामीण बोले…‘कागजों में ज्यादा,जमीन पर कम दिख रहा काम’
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,10 मई 2026 (घटती-घटना)। वन परिक्षेत्र खड़गवां अंतर्गत परसा कोल ब्लॉक क्षेत्र में वन विभाग द्वारा कराए जा रहे तालाब निर्माण एवं वृक्षारोपण कार्य अब सवालों के घेरे में आ गए हैं, स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता, गुणवत्ता में लापरवाही और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं, ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे इन कार्यों में तय मापदंडों और तकनीकी गुणवत्ता का पालन नहीं किया जा रहा है, कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा दिखाई दे रहा है, जबकि कागजों में काम पूरा दर्शाए जाने की चर्चा क्षेत्र में हो रही है।
बता दे की खड़गवां के परसा कोल ब्लॉक क्षेत्र में तालाब निर्माण और वृक्षारोपण कार्यों को लेकर उठे सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का बड़ा विषय बन चुके हैं, यदि ग्रामीणों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं बल्कि सरकारी धन के उपयोग और योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न होगा, अब निगाहें प्रशासन और वन विभाग पर टिकी हैं कि क्या इन शिकायतों की गंभीरता से जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
तालाब निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार तालाब निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है, आरोप है कि तालाब के मेढ़ निर्माण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, स्थानीय लोगों ने बताया कि सामान्यतः तालाब के मेढ़ के पटल पर काली मिट्टी डालकर उसे पानी से गीला कर मजबूत आधार तैयार किया जाता है,लेकिन कई निर्माण स्थलों पर यह प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई, इसके बजाय पास की साधारण मिट्टी का उपयोग कर मेढ़ तैयार कर दिया गया, जिससे बरसात के दौरान तालाब के फूटने का खतरा बना हुआ है, ग्रामीणों का कहना है कि यदि भारी बारिश हुई तो कमजोर मेढ़ टिक नहीं पाएंगे और पूरा निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त हो सकता है।
पत्थर पिचिंग सिर्फ दिखावे के लिए…
तालाब निर्माण कार्य में मेढ़ के दोनों ओर पत्थर पिचिंग किया जाना अनिवार्य माना जाता है ताकि कटाव रोका जा सके, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पिचिंग कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, कई जगहों पर पत्थरों की परत बेहद कमजोर और सीमित दिखाई दे रही है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिस स्तर की मजबूती करोड़ों की लागत वाले निर्माण में दिखाई देनी चाहिए, वह जमीन पर नजर नहीं आ रही।
वृक्षारोपण कार्य में भी खानापूर्ति के आरोप…
तालाब निर्माण के साथ-साथ वृक्षारोपण कार्य को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं, आरोप है कि कई स्थानों पर पुराने पौधों की जड़ों को पूरी तरह हटाए बिना ही नए पौधारोपण के लिए गड्ढे बना दिए गए, स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमानुसार पुराने पौधों और जड़ों को पूरी तरह हटाकर भूमि को तैयार किया जाना चाहिए,लेकिन यहां जल्दबाजी और खानापूर्ति के तरीके अपनाए गए हैं, ग्रामीणों का कहना है कि यदि जड़ों की समुचित सफाई नहीं होगी तो नए पौधों की वृद्धि प्रभावित होगी और वृक्षारोपण अभियान केवल आंकड़ों तक सीमित रह जाएगा।
जमीन पर कम, कागजों में ज्यादा काम
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि कई कार्यों को कागजों में अधिक और जमीन पर कम दिखाया जा रहा है, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की कमी है और संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा,लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण होता तो निर्माण गुणवत्ता और कार्यप्रणाली में ऐसी शिकायतें सामने नहीं आतीं।
सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका
स्थानीय ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं, ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा क्षेत्रीय विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि कार्य गुणवत्ताहीन होंगे तो योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।
जांच और कार्रवाई की मांग…
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र का विकास और पर्यावरण संरक्षण है, लेकिन यदि निर्माण कार्यों में ही लापरवाही होगी तो योजनाएं केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएंगी।
वन विभाग का पक्ष नहीं मिल सका
इस संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकारी खड़गवां से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिसके कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
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