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कोरिया/सोनहत@कोरिया में जल संकट बेकाबू

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  • 7 टेक्नीशियन पर 1000 हैंडपंप,प्यास से बेहाल गांव
  • नल हैं पर जल नहीं,38 हजार कनेक्शन के बाद भी सूखा कोरिया
  • हांफता सिस्टम,प्यासा जिला खराब हैंडपंप,टंकियां बनी शोपीस….
  • 21 करोड़ की योजना टेंडर में अटकी,गांवों में पानी के लिए हाहाकार
  • लाल पानी उगलते हैंडपंप,टैंकरों पर टिकी जिंदगी
  • जल जीवन मिशन फेल? कोरिया में नल सूखे,टंकियां खाली
  • कोरिया में पानी का संकट गहराया…नदी सूखी,तालाब खाली
  • टेंडर में फंसी ‘नरकेली-कटगोड़ी’ योजना,डेढ़ साल पीछे विकास
  • प्यासे गांव, मौन प्रशासन…कागजों में विकास,जमीन पर संकट
  • हैंडपंप खराब, पाइपलाइन सूखी : कोरिया में जल व्यवस्था चरमराई
  • गर्मी शुरू, संकट विकराल : कोरिया में पानी के लिए जंग


राजन पाण्डेय
कोरिया/सोनहत,18 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
अभी गर्मी ने पूरी तरह से अपने तेवर भी नहीं दिखाए हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में जल संकट ने भयावह रूप लेना शुरू कर दिया है,हालात यह हैं कि गांवों में पानी के लिए मारामारी की स्थिति बन चुकी है,कहीं नदियों की धार सूखने की कगार पर है तो कहीं करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकियां केवल ढांचा बनकर खड़ी हैं, ग्रामीण इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है,जहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे हैं और दिनचर्या पूरी तरह पानी के इंतजाम पर निर्भर हो गई है।
सिस्टम का गणित : 7 कंधों पर 1000 से अधिक हैंडपंपों का बोझ
जिले में जल आपूर्ति व्यवस्था की असल तस्वीर आंकड़ों से साफ नजर आती है,एक ओर सरकार जल उपलब्धता के दावे कर रही है,वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि 1000 से अधिक हैंडपंपों की जिम्मेदारी केवल 7 टेक्नीशियनों के भरोसे छोड़ दी गई है, इस असंतुलन ने पूरे सिस्टम को चरमरा दिया है,करीब 250 हैंडपंप वर्तमान में खराब पड़े हैं और शोपीस बने हुए हैं, ग्रामीणों के लिए ये हैंडपंप कभी जीवनरेखा हुआ करते थे,लेकिन अब ये बेकार ढांचे में बदल चुके हैं,गर्मी के मौसम में जब हर हैंडपंप पर सैकड़ों लोगों की निर्भरता होती है,तब इतनी बड़ी संख्या में खराब हैंडपंप होना सीधे तौर पर जल संकट को और गहरा कर रहा है। तकनीकी अमले की कमी के कारण मरम्मत कार्य समय पर नहीं हो पा रहा है और लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
नदियां सूखी,तालाबों ने छोड़ा साथ
कोरिया जिले की जल स्थिति केवल हैंडपंपों तक सीमित नहीं है,बल्कि प्राकृतिक जल स्रोत भी तेजी से समाप्त हो रहे हैं,जिले की प्रमुख नदी हसदेव इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है,नदी की धार बेहद पतली हो गई है और कई स्थानों पर सूखने की स्थिति में पहुंच चुकी है,नदी के जलस्तर में गिरावट का सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ा है। भूजल स्तर नीचे जाने के कारण तालाब और कुएं भी सूखने लगे हैं। गांवों में पानी के पारंपरिक स्रोत खत्म होने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। मवेशियों के लिए भी पानी का संकट उत्पन्न हो गया है और कई स्थानों पर उन्हें प्यासा रहना पड़ रहा है।
पंचायत टैंकरों के भरोसे जिंदगी
जल संकट के चलते कई गांव पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो चुके हैं, बैकुण्ठपुर के जगतपुर और सोनहत ब्लॉक के नौगई पंचायत के आनंदपुर गांव जैसे क्षेत्रों में स्थिति बेहद गंभीर है,यहां के हैंडपंप या तो पूरी तरह खराब हो चुके हैं या फिर‘लाल पानी’ उगल रहे हैं,जो पीने योग्य नहीं है, ग्रामीणों को मजबूरी में पंचायत द्वारा भेजे जा रहे टैंकरों से पानी लेना पड़ रहा है। कई बार टैंकर समय पर नहीं पहुंचते,जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ स्थानों पर लोग निजी बोरवेल मालिकों से महंगे दामों पर पानी खरीदने को विवश हैं,स्थिति की विडंबना यह है कि कई खराब हैंडपंपों की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है,इससे मरम्मत कार्य और भी प्रभावित हो रहा है और समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
आंकड़ों में ‘नल’,हकीकत में प्यास
कोरिया जिले में जल जीवन मिशन के तहत 38,054 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने का दावा किया गया है,लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है,बैकुण्ठपुर और सोनहत ब्लॉक में 51,764 घरों को चिह्नित किया गया था, जिनमें से बड़ी संख्या में घरों में केवल नल लगा दिए गए हैं,लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा है,कई गांवों में सोलर सिस्टम के माध्यम से सीमित पानी आपूर्ति की जा रही है, लेकिन यह व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है,ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी जल स्रोत विकसित नहीं किए जाएंगे,तब तक पाइपलाइन और नल केवल दिखावा ही बने रहेंगे,घरों के बाहर लगे नल अब सुविधा का प्रतीक नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का उदाहरण बन गए हैं।
कटगोड़ी-नरकेली योजना : टेंडर में फंसा 21 करोड़ का प्रोजेक्ट
कोरिया जिले में जल संकट से निपटने के लिए शुरू की गई नरकेली और कटगोड़ी समूह जलप्रदाय योजना भी अब फाइलों में अटकी हुई है,इस योजना के तहत 64 ग्राम पंचायतों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था,करीब 21 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को दिसंबर 2024 तक पूरा किया जाना था,लेकिन ठेकेदार के दस्तावेजों में गड़बड़ी के कारण टेंडर निरस्त कर दिया गया, इसके चलते परियोजना लगभग डेढ़ साल पीछे चली गई है, इस योजना में 2.0 एमएलडी क्षमता का फिल्टर प्लांट और करीब 63,930 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव था,जिससे 4,748 घरों को लाभ मिलना था,साथ ही कई स्थानों पर बड़ी क्षमता की पानी की टंकियां भी बनाई जानी थीं,लेकिन वर्तमान में यह पूरा प्रोजेक्ट ठप पड़ा है।
जल जीवन मिशन : ‘नल’ है,पर ‘जल’ नहीं
केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है,लेकिन कोरिया जिले में यह योजना अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है,जिले के कई गांवों में स्थिति यह है कि जहां जल स्रोत मौजूद हैं,वहां पाइपलाइन या नल की सुविधा नहीं है। वहीं दूसरी ओर जहां नल लगाए गए हैं,वहां पानी नहीं पहुंच रहा है,हजारों घरों में कनेक्शन तो दे दिए गए हैं,लेकिन पाइपलाइन में पानी का दबाव शून्य है,गांवों में बनाई गई ऊंची पानी की टंकियां खाली पड़ी हैं। ये टंकियां अब केवल सरकारी योजनाओं का प्रतीक बनकर रह गई हैं, जिनमें भरने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों के लिए ये ढांचे उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
जिले में जल संकट को देखते हुए प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है,यदि समय रहते खराब पड़े 250 हैंडपंपों की मरम्मत नहीं की गई और वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था नहीं की गई,तो स्थिति और गंभीर हो सकती है, ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह जनआक्रोश में बदल सकता है,गर्मी के चरम पर पहुंचने से पहले ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
पेयजल नियंत्रण प्रकोष्ठ का गठन
जल संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने 30 जून 2026 तक पेयजल नियंत्रण प्रकोष्ठ का गठन किया है, इसका उद्देश्य शिकायतों का त्वरित समाधान करना और जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाना है,प्रकोष्ठ के तहत सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी गई है,सभी जनपद और उपखंड कार्यालयों में शिकायत पंजी उपलब्ध कराए गए हैं,जहां नागरिक अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।
शिकायत और संपर्क व्यवस्था
प्रशासन ने जल समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों और तकनीशियनों के संपर्क नंबर भी जारी किए हैं,कंट्रोल रूम में सहायक अभियंता प्रखर बेले,उप अभियंता भूपेंद्र सिंह कोर्चे, अभिषेक कुमार कुशवाहा और ज्योत्सना लकड़ा को जिम्मेदारी दी गई है,इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में हैंडपंप सुधार के लिए तकनीशियन नियुक्त किए गए हैं, जिनमें कुडेली/पटना क्षेत्र में अमित कुमार टोप्पो,बैकुण्ठपुर में हेमंत कुमार और प्रियंका विश्वकर्मा,कटगोड़ी में समयलाल, सोनहत में अंकुश कुमार निर्मलकर, रामगढ़ में अंजय कुमार और बचरा पोड़ी में देवशरण शामिल हैं।
उम्मीद और हकीकत के बीच फंसा कोरिया
कोरिया जिले की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के बीच बड़ी खाई है, एक ओर कागजों में विकास के दावे हैं,वहीं दूसरी ओर जमीन पर लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं,गर्मी अभी अपने चरम पर नहीं पहुंची है,लेकिन हालात पहले ही बिगड़ चुके हैं,ऐसे में यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए,तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है, फिलहाल कोरिया की जनता आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है कि शायद बारिश जल्दी आए,या फिर सिस्टम जागे और उनकी प्यास बुझाने का कोई स्थायी समाधान निकले।


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