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प्रतापपुर@ खामोशी में खड़ा हो रहा खतरा! आंबेडकर चौक बना सकता है हादसों का नया केंद्र

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व्यस्त मार्ग पर निर्माण से बढ़ी चिंता,क्या नगर पंचायत कर रही सुरक्षा से समझौता?
प्रतापपुर, 24 मार्च 2026 (घटती-घटना)।
प्रतापपुर नगर पंचायत में इन दिनों एक ऐसा निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है,जिसने आम नागरिकों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। वार्ड क्रमांक 7 में एसडीएम बंगले के ठीक बगल, मंडी और नर्सरी रोड से लगे मुख्य प्रतापपुर-अंबिकापुर मार्ग किनारे आंबेडकर चौक का निर्माण किया जा रहा है। पहली नजर में यह विकास का प्रतीक दिखाई देता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिस स्थान पर यह चौक बनाया जा रहा है, वह पहले से ही नगर का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है। इसी रास्ते से सिविल कोर्ट,नर्सरी, एकलव्य आवासीय विद्यालय सहित कई महत्वपूर्ण शासकीय और निजी कार्यालयों तक लोगों का आवागमन होता है। दिनभर यहां दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लगातार आवाजाही बनी रहती है। विशेषकर सुबह और दोपहर के समय स्कूली बच्चों और अभिभावकों की भारी भीड़ इस मार्ग को और भी संवेदनशील बना देती है। ऐसे में सड़क किनारे स्थायी निर्माण कार्य से रास्ता और अधिक संकरा हो जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले ही यह सड़क जाम और अव्यवस्था से जूझ रही है। अब यदि इस तरह का निर्माण बिना पर्याप्त योजना के किया गया, तो आने वाले समय में यह मार्ग लोगों के लिए खतरे का कारण बन सकता है। सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि क्या नगर पंचायत ने इस निर्माण से पहले किसी प्रकार का ट्रैफिक सर्वे, सुरक्षा मूल्यांकन या तकनीकी सलाह ली है? या फिर यह निर्माण केवल औपचारिकता और दिखावे के लिए किया जा रहा है? नागरिकों का आरोप है कि इस तरह के कार्यों में आम जनता की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है। कई स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि निर्माण शुरू होने से पहले न तो कोई सार्वजनिक सूचना दी गई और न ही संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई। अब जब काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब लोगों को इसके दुष्परिणाम समझ में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यस्त मार्ग पर इस प्रकार के स्थायी ढांचे का निर्माण करते समय सड़क की चौड़ाई, ट्रैफिक घनत्व और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है। यदि इन पहलुओं की अनदेखी की जाती है, तो छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इस पूरे मामले में नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्या यह निर्माण वास्तव में जनहित में है, या फिर बिना दूरदर्शिता के लिया गया निर्णय है? यदि समय रहते इस पर पुनर्विचार नहीं किया गया,तो यह चौक सुविधा के बजाय दुर्घटनाओं का केंद्र बन सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और नगर पंचायत इस बढ़ती चिंता को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या वे जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस निर्माण कार्य की समीक्षा करेंगे,या फिर इसे नजरअंदाज कर भविष्य में होने वाले संभावित हादसों का इंतजार करेंगे? फिलहाल, प्रतापपुर के इस व्यस्त मार्ग पर उठते सवालों ने विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन की बहस को एक बार फिर जीवित कर दिया है।


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