



- कुदरगढ़ महोत्सवः भक्ति, लोक कला और खेलों से सराबोर रहा दूसरा दिन
- करमा,पंथी और कुश्ती का जलवाः कुदरगढ़ में उमड़ा जनसैलाब
- लोक संस्कृति के रंग,खेलों का जोश : कुदरगढ़ महोत्सव का दूसरा दिन यादगार
- माँ कुदरगढ़ी के आशीर्वाद के बीच गूंजे लोक गीत,मैदान में भिड़े पहलवान
- संजय सुरीला के सुर,कुश्ती के दांव और मल्लखम्ब की तैयारी—महोत्सव चरम पर
- कुदरगढ़ महोत्सव : दूसरे दिन संस्कृति ने बांधा समां,खेलों ने बढ़ाया रोमांच
- भक्ति के साथ संस्कृति का रंग,खेलों का उत्साह—कुदरगढ़ बना जनउत्सव
- लोक कला से लेकर मल्लखम्ब तकः कुदरगढ़ महोत्सव में परंपरा का विराट प्रदर्शन
सूरजपुर,24 मार्च 2026 (घटती-घटना)। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित कुदरगढ़ महोत्सव 2026 का दूसरा दिन भक्ति, संस्कृति और खेलों के अद्भुत समागम का साक्षी बना। माँ कुदरगढ़ी धाम की पवित्र वादियों में जहां एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ रही थी,वहीं दूसरी ओर लोक कला, संगीत,नृत्य और खेल प्रतियोगिताओं ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया,दूसरे दिन का आयोजन विशेष रूप से सरगुजा अंचल की समृद्ध लोक परंपराओं को समर्पित रहा,जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्शक देर तक भाव-विभोर होते रहे।
माँ कात्यायनी की आराधना से हुआ दिन का शुभारंभ
महोत्सव के द्वितीय दिवस की शुरुआत चैत्र नवरात्र की षष्ठी तिथि पर माँ दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई,सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें कुदरगढ़ धाम में देखी गईं, भक्तों ने माँ के दर्शन कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मंदिर परिसर में गूंजते भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, यह दृश्य इस महोत्सव के धार्मिक महत्व को और अधिक सुदृढ़ करता है।
लोक कलाओं का उत्सवः मंच पर जीवंत हुई परंपरा
दूसरा दिन पूरी तरह लोक कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को समर्पित रहा,कार्यक्रम की शुरुआत करमा दलों और विद्यालयीन बच्चों की प्रस्तुतियों से हुई, जिन्होंने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और समन्वित नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया,करमा नृत्य,जो सरगुजा अंचल की पहचान है,उसकी लय और ताल ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बच्चों की मासूम प्रस्तुति ने कार्यक्रम में एक अलग ही ऊर्जा भर दी।
स्थानीय कलाकारों का दमदार प्रदर्शन
नेहा तिवारी ने लोक जस गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। उनकी आवाज में ऐसी मिठास थी कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे।
बसंत वैष्णव ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
सूरजपुर कला केंद्र के बच्चों ने अपनी जीवंत और ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुति से यह साबित कर दिया कि नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति से जुड़ी हुई है,इन प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि स्थानीय कलाकारों में अपार प्रतिभा है,जिसे मंच मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।
संगीत और नृत्य का अनूठा संगम
दीपक बर्मन ने बैंड के साथ अपनी शानदार प्रस्तुति से माहौल को रोमांचक बना दिया।
बी.जी.एम. ग्रुप का पंथी नृत्य विशेष आकर्षण रहा, जिसमें नर्तकों की ऊर्जा और तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लक्ष्मीकांत जड़ेजा ने लाइट और क्लासिकल गीतों की प्रस्तुति देकर संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।
अस्मी वर्मा,कमलेश शर्मा और नासिर खान (नमो नमो) ने भजनों और गीतों की श्रृंखला प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और संगीतमय बना दिया।
संजय सुरीला की प्रस्तुतिः उत्साह की चरम सीमा
दूसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण रहे संजय सुरीला, जिनकी प्रस्तुति ने महोत्सव में नई ऊर्जा भर दी,उनका लोकप्रिय गीत ‘हाय रे सरगुजा नाचे’ जैसे ही गूंजा, पूरा परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा। दर्शक अपनी सीटों से उठकर झूमने लगे और देर तक तालियां बजाते रहे,यह प्रस्तुति महोत्सव के सबसे यादगार पलों में से एक बन गई।
खेलों का रोमांचः मैदान में दिखा जोश और जज्बा
कुदरगढ़ महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन ही नहीं,बल्कि खेल प्रतिभाओं के प्रदर्शन का भी मंच बन गया है, महोत्सव परिसर में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला…
अखिल भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता में देशभर से आए पहलवानों ने अपने दांव-पेंच से दर्शकों को रोमांचित कर दिया, हर मुकाबले में जोश,ताकत और तकनीक का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला।
जिला स्तरीय वॉलीबाल प्रतियोगिता में टीमों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ,जिसमें खिलाडि़यों ने शानदार समन्वय और खेल भावना का परिचय दिया।
कबड्डी प्रतियोगिता में खिलाडि़यों की फुर्ती और रणनीति ने दर्शकों को बांधे रखा,खेलों का यह उत्साह महोत्सव को और अधिक जीवंत बना रहा है।
मल्लखम्बः परंपरा और शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन
महोत्सव के अंतिम दिन 25 मार्च को पामगढ़ के मल्लखम्ब खिलाड़ी अपने अद्भुत कौशल का प्रदर्शन करेंगे,मल्लखम्ब,जो प्राचीन भारतीय खेल है,उसमें शक्ति,संतुलन और लचीलापन का अनूठा मेल देखने को मिलता है,लकड़ी के खंभे पर किए जाने वाले इस प्रदर्शन को देखने के लिए लोगों में विशेष उत्साह है, यह आयोजन न केवल मनोरंजन करेगा, बल्कि भारतीय पारंपरिक खेलों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
डिजिटल युग में महोत्सवः घर बैठे भी आनंद
जिला प्रशासन ने तकनीक का उपयोग करते हुए महोत्सव को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया है, ‘सूरजपुर डिस्टि्रक्ट’ फेसबुक पेज डिस्टि्रक्ट एडमिनिस्ट्रेशन सूरजपुर यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण के माध्यम से लोग घर बैठे भी इस आयोजन का आनंद ले रहे हैं। यह पहल आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
जनभागीदारीः उत्सव बना जनआंदोलन
महोत्सव के दूसरे दिन क्षेत्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ी, लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ महोत्सव में शामिल हुए और माँ कुदरगढ़ी के दर्शन किए,सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया,खेल प्रतियोगिताओं का रोमांच देखा यह जनभागीदारी इस आयोजन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
समापन दिवस की तैयारियांः और भी भव्य होगा अंतिम दिन
25 मार्च को महोत्सव का समापन होगा,जिसमें भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रस्तुत की जाएगी,समापन दिवस पर बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका शर्ली सेठिया की प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रहेगी, उनके आगमन को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है,इसके अलावा मल्लखम्ब प्रदर्शन भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
कुदरगढ़ महोत्सव न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे रहा है,स्थानीय दुकानदारों को व्यवसाय का अवसर मिला, छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि हुई,क्षेत्र की पहचान को व्यापक स्तर पर प्रचार मिला, इस प्रकार यह महोत्सव क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है।
संस्कृति,खेल और आस्था का सफल संगम
कुदरगढ़ महोत्सव 2026 का दूसरा दिन यह सिद्ध करता है कि जब परंपरा, प्रतिभा और जनभागीदारी एक मंच पर मिलते हैं, तो आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्सव बन जाता है,यह महोत्सव न केवल स्थानीय कलाकारों को पहचान दे रहा है,बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति को संरक्षित और बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है,साथ ही,खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है, कुल मिलाकर, कुदरगढ़ महोत्सव 2026 क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर, खेल परंपरा और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है।
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