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खड़गवां (एमसीबी)@ खड़गवां में करोड़ों की सड़क पर सवाल, पाँच दिन में उखड़ी परत,ग्रामीणों ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग

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-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां (एमसीबी),22 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।
एमसीबी जिले के खड़गवां क्षेत्र में ग्रामीण संपर्क सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बन रही सड़कों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, ठगगाव से करवा पहुंच मार्ग की अनुमानित लागत लगभग 3.39 करोड़ बताई जा रही है,जबकि ठगगाव से तेदूडाड मार्ग का निर्माण एक स्थानीय ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है। दोनों परियोजनाएँ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा राज्य स्तरीय जन-मन से सड़क निर्माण कार्यक्रम के तहत संचालित बताई जा रही हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के कुछ ही दिनों में सड़क की डामर परत उखड़ने लगी है,गिट्टी सतह पर दिखाई दे रही है और कई हिस्सों में दरारें पड़ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की हालत पाँच दिन में ही बिगड़ गई, तो आने वाले मानसून में क्या होगा?
ग्रामीणों की मांग…
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है किः संबंधित सड़कों की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, दोष सिद्ध होने पर संबंधित ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो, क्षतिग्रस्त हिस्सों का मानकों के अनुरूप पुनर्निर्माण कराया जाए, भविष्य में निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और नियमित गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
तापमान और दूरी पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार,डामर प्लांट से निर्माण स्थल की दूरी लगभग 100 किलोमीटर बताई जा रही है, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार हॉट-मिक्स डामर का तापमान बनाए रखने के लिए प्लांट की दूरी सामान्यतः सीमित होनी चाहिए। उनका दावा है कि लंबी दूरी के कारण मिश्रण का तापमान कम हो जाता है, जिससे परत की पकड़ कमजोर पड़ती है और सड़क जल्द उखड़ने लगती है, उल्लेखनीय है कि ये आरोप स्थानीय निवासियों के बयानों पर आधारित हैं; आधिकारिक जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।
मोटाई,रोलिंग और जल निकासी में कथित कमी
स्थानीय लोगों का आरोप है किः सड़क की मोटाई निर्धारित मापदंड से कम रखी गई,बेस लेयर और सबग्रेड को पर्याप्त मजबूती नहीं दी गई, समुचित रोलिंग/कम्पैक्शन के बिना ही डामरीकरण कर दिया गया, जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं बनाई गई,तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सबग्रेड मजबूत न हो, बेस लेयर पर्याप्त न हो और डामर की मोटाई मानक से कम रखी जाए तो सड़क की आयु घट जाती है। मानसून के दौरान पानी भरने से सड़क धंसने और गड्ढे बनने की आशंका बढ़ जाती है।
निरीक्षण व्यवस्था पर भी उठे प्रश्न
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान विभागीय निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित रहा,यदि नियमित गुणवत्ता परीक्षण,सैंपल जांच और थर्ड-पार्टी ऑडिट हो,तो ऐसी शिकायतों की गुंजाइश कम हो सकती है,लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी समय पर स्थल निरीक्षण नहीं करते, जिससे ठेकेदारों को मनमानी का अवसर मिलता है।
आवागमन और सुरक्षा पर प्रभाव
सड़क की खराब स्थिति के कारण ग्रामीणों को दैनिक आवागमन में कठिनाई हो रही है, स्कूली छात्र-छात्राएं,किसान और मरीजों को अस्पताल ले जाने वाले वाहन जोखिम में हैं, जगह-जगह गड्ढे बनने से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।
जवाबदेही का इंतजार
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिले। लेकिन यदि निर्माण की गुणवत्ता ही सवालों के घेरे में हो,तो योजनाओं की मंशा पर भी प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है, अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या करोड़ों की लागत से बनी यह सड़क वास्तव में ग्रामीणों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ साबित होगी,या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


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