पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी पर किया वादा
बिलासपुर,21 फरवरी 2026। डिप्टी सीएम अरुण साव ने घोषणा की है कि पद्मश्री पं. श्यामलाल चतुर्वेदी के सपने को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। यह बात उन्होंने शुक्रवार को बिलासपुर के लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में पं. चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी समारोह में कही। समारोह की अध्यक्षता दिल्ली और रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने की। इस अवसर पर पं. चतुर्वेदी पर केंद्रित एक स्मृति ग्रंथ का विमोचन किया गया, जिसका संपादन वरिष्ठ पत्रकार रुद्र अवस्थी ने किया है। साथ ही, पं. चतुर्वेदी की छत्तीसगढ़ी पुस्तिका ‘भोलवा भोलाराम बनिस’ और डॉ. सुषमा शर्मा द्वारा प्रकाशित इसके हिंदी अनुवाद का भी विमोचन हुआ। कार्यक्रम में महापौर पूजा विधानी, नगर विधायक अमर अग्रवाल,बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव,बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला सहित कई साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि 2 अप्रैल 2018 को जब पं. चतुर्वेदी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया, तो यह पूरे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता का सम्मान था। उन्होंने पं. चतुर्वेदी को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताया, जो एक कवि, साहित्यकार और पत्रकार होने के साथ-साथ बेबाक वक्ता भी थे। साव ने आगे कहा कि पं. चतुर्वेदी 100 प्रतिशत छत्तीसगढ़ी संस्कारों से ओत-प्रोत थे। उनकी निरंतर साहित्य साधना और जीवन शैली हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की माटी, भाषा और लोक संस्कारों को आगे बढ़ाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष भी रहे, और छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन में उनका योगदान अविस्मरणीय है। डिप्टी सीएम ने दोहराया कि पं. चतुर्वेदी की स्मृति को अक्षुण्ण रखने और छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार हर संभव प्रयास करने को प्रतिबद्ध है।
छत्तीसगढ़ की प्रतिमूर्ति थेः उपासने
वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ की प्रतिमूर्ति थे और प्रदेश के विविध आयामों को समेटने वाले अमर पुरुष थे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी में कहावत है कि घर के जोगी जोगड़ा…वाकई में पं चतुर्वेदी सिद्ध पुरुष थे,मैंने दिल्ली में खुद देखा है कि कैसे उनका नाम सुनते ही चमत्कार हो जाता।
सबने माना पं चतुर्वेदी छत्तीसगढ़ का चेहरा थे…
कार्यक्रम में शामिल विद्वान वक्ता,पत्रकार,बुद्धीजीवियों ने माना कि छत्तीसगढ़ की भाषा,संस्कृति और परंपरा की बात करें तो पं चतुर्वेदी छत्तीसगढ़ के चेहरे के रूप में उभर कर सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि पं चतुर्वेदी सही मायने में छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश की धरोहर माने जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ी को गुरतुर गोठ के रूप में स्थापित कियाः पाठक
छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मौलिक सृजन को ‘गुरतुर गोठ’ के रूप में स्थापित करना उनकी विशिष्ट पहचान रही है। उनकी भाषा लोककला और लोकजीवन की आत्मा से निर्मित थी। उन्होंने कहा कि पं चतुर्वेदी पर उनके निर्देशन में चार छात्र पीएचडी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पं चतुर्वेदी की ‘बेटी के बिदा’ कविता बेहद चर्चित रही। उनके लेखन, व्यक्तित्व में लोक बसता था।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur