


सीएचसी से 220 बेड सिविल अस्पताल तक का सफर,अब स्थानीय स्तर पर मिल रहा बेहतर इलाज,डायलासिस से सर्जरी तक सुविधा बढ़ी, मनेन्द्रगढ़ अस्पताल बना क्षेत्र का भरोसेमंद केंद्र
एमसीबी/मनेन्द्रगढ़,18 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। जिला मुख्यालय स्थित Government Civil Hospital Manendragarh का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से उन्नयन कर 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल के रूप में विकसित किया जाना क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, बढ़ी हुई बेड क्षमता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, डायलासिस और सर्जिकल सेवाओं के विस्तार से अब मनेन्द्रगढ़ और आसपास के ग्रामीण अंचलों के मरीजों को बेहतर उपचार स्थानीय स्तर पर मिल रहा है, अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, बीते महीनों में चिकित्सा ढांचे को चरणबद्ध तरीके से सुदृढ़ किया गया है। इससे न केवल मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि रेफरल मामलों में भी कमी आई है।
मनेन्द्रगढ़ का 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बनता जा रहा है, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता,सर्जिकल सेवाओं का विस्तार, डायलासिस और मातृत्व सुविधाओं की मजबूती ने स्थानीय स्तर पर भरोसा बढ़ाया है, यदि वर्तमान गति से विकास कार्य जारी रहे, तो यह अस्पताल न केवल एमसीबी जिले बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी एक भरोसेमंद और सुलभ स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है।
आईए चिकित्सा ढांचे को चरणबद्ध तरीके से समझते है…
1. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और 24 घंटे आपात सेवा
अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के अनुसार वर्तमान में अस्पताल में 15 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कार्यरत है, इनमें 3 मेडिकल स्पेशलिस्ट,2 जनरल सर्जन, 2 नेत्र रोग विशेषज्ञ, 2 एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, अन्य विभागीय विशेषज्ञ इसके अतिरिक्त 10 से अधिक एमबीबीएस चिकित्सक भी पदस्थ हैं, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशानुसार अस्पताल में सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। 24म7 इमरजेंसी सेवा संचालित होने से सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, गंभीर संक्रमण और अन्य आपात मामलों में त्वरित उपचार संभव हो पा रहा है।
2. भवन विस्तार और बेड क्षमता में वृद्धि
220 बिस्तरीय अस्पताल को पूर्ण क्षमता से संचालित करने के लिए अतिरिक्त भवनों का उपयोग किया जा रहा है, राजस्व विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और जनपद कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए भवनों में वार्ड विकसित किए जा रहे हैं, शासन स्तर से आवश्यक उन्नयन और संचालन के लिए राशि स्वीकृत की गई है, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगले दो महीनों में 220 बिस्तरों की पूरी क्षमता के साथ अस्पताल नियमित रूप से कार्य करने लगेगा। इससे भर्ती मरीजों को पर्याप्त सुविधा मिलेगी।
3. स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी-समाधान की दिशा में पहल
वर्तमान में अस्पताल में एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं,उनके अवकाश या व्यस्तता की स्थिति में असुविधा उत्पन्न होती है, सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे के प्रयासों से एक और स्त्री रोग विशेषज्ञ की ज्वाइनिंग शीघ्र प्रस्तावित है, आवश्यकता पड़ने पर जिला अस्पताल से डॉक्टर बुलाकर सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं,ताकि गर्भवती महिलाओं को समय पर और सुरक्षित उपचार मिल सके।
4. सर्जिकल सेवाओं का विस्तार,
अस्पताल में अब नियमित रूप से विभिन्न विभागों में ऑपरेशन किए जा रहे हैं, हाल के प्रमुख ऑपरेशन-
ENT विभाग
Bilateral Ear Lobe Repair
Malignancy True Cut Biopsy
ऑर्थोपेडिक विभाग
Humerus Nail Implant Removal
Tibia Nail Implant Removal
जनरल सर्जरी Hernioplasty
Lipoma E&cision
इन सर्जिकल सेवाओं के स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से मरीजों को संभागीय मुख्यालय या निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करनी पड़ी है।
5. उपलब्धियों के आंकड़े
(अप्रैल 2025-जनवरी 2026) अस्पताल की प्रगति निम्न आंकड़ों से स्पष्ट होती है-
कुल ओपीडी मरीजः 91,254
कुल आईपीडी मरीजः 6,029
डायलासिस सत्रः 4,087
सामान्य प्रसवः 975
सी-सेक्शनः 134
हड्डी रोग ऑपरेशनः 18
सामान्य सर्जरीः 54
ENT ऑपरेशनः 5
रक्त सेवाः 356 मरीजों को ब्लड उपलब्ध ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अस्पताल अब बहु-विशेषज्ञता सेवाओं वाला एक सशक्त स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है।
6. डायलासिस और मातृत्व सेवाओं से मिली राहत
डायलासिस सुविधा ने किडनी मरीजों को बड़ी राहत दी है, पहले उन्हें दूर शहरों में जाकर महंगे निजी केंद्रों पर उपचार कराना पड़ता था, इसी प्रकार, प्रसूति और ऑपरेशन की स्थानीय सुविधा से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में उपचार मिल रहा है, सामान्य और सिजेरियन दोनों प्रकार के प्रसव की सुविधा उपलब्ध है।
7. स्थानीय स्तर पर उपचार,रेफरल में कमी
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्नयन के बाद गंभीर मामलों को बाहर रेफर करने की आवश्यकता में कमी आई है, लक्ष्य है कि अधिकतम मरीजों का उपचार मनेन्द्रगढ़ में ही हो सके, यदि 220 बिस्तरीय क्षमता पूरी तरह संचालित हो जाती है, तो यह अस्पताल जिले के लिए मिनी-डिस्टि्रक्ट हॉस्पिटल के रूप में स्थापित हो सकता है।
8. स्वास्थ्य मंत्री की प्राथमिकताः जिला स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य ढांचा
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की सोच है कि जिला और उपजिला स्तर के अस्पतालों को मजबूत किया जाए, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े, विभागीय बैठकों में डॉक्टरों की नियुक्ति, दवाओं की उपलब्धता, उपकरणों की आपूर्ति और जांच सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मनेन्द्रगढ़ का सिविल अस्पताल इसी मॉडल का एक उदाहरण माना जा रहा है।
9. लोगों की प्रतिक्रियाएं
अस्पताल के उन्नयन के बाद स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से परामर्श जल्दी मिल रहा है, डायलासिस सुविधा से आर्थिक बोझ कम हुआ है, अब छोटी सर्जरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता, अगर स्त्री रोग विशेषज्ञ और बढ़ जाएं तो महिलाओं को और राहत मिलेगी, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का कहना है कि बेड क्षमता बढ़ने से भर्ती प्रक्रिया आसान हुई है।
10. आगे की अपेक्षाएं
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि, आधुनिक जांच मशीनों की स्थापना, नियमित सुपर स्पेशलिटी विजिट, मजबूत ब्लड बैंक, डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से अस्पताल की सेवाएं और सुदृढ़ हो सकती हैं।
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