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कोरिया/एमसीबी@ आस्था का महासंगम : महाशिवरात्रि पर शिवालयों में गूंजेगा ‘हर-हर महादेव’,मेण्ड्रा में डॉ.चरणदास महंत करेंगे जलाभिषेक

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राजन पाण्डेय
कोरिया/एमसीबी,14 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।
देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि आज पूरे कोरिया और एमसीबी जिले में श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है,भोर से ही श्रद्धालु पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर शिवालयों की ओर उमड़ पड़े हैं। मंदिरों की घंटियां, शंखध्वनि और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा है।
मेण्ड्रा में विशेष उल्लास,जनप्रतिनिधियों का आगमन
हसदेव नदी के उद्गम स्थल मेण्ड्रा स्थित प्राचीन हसदेश्वर मंदिर में आज भक्ति का विशेष उल्लास देखने को मिलेगा,डॉ. चरणदास महंत, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष, एवं सांसद ज्योत्सना महंत पूर्व विधायक गुलाब कमरो के साथ मेण्ड्रा पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक करेंगे,उनके आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। मंदिर समिति द्वारा विशेष सजावट, फूलों की व्यवस्था और भक्तों के लिए कतार प्रबंधन की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
इन प्रमुख शिवालयों में उमड़ेगा आस्था का सैलाब…
सिद्ध बाबा मंदिर (मनेन्द्रगढ़) : जिले के गौरव सिद्ध बाबा पर्वत पर स्थित इस मंदिर में हजारों भक्त मत्था टेकने पहुंचेंगे। पहाडि़यों से टकराकर गूंजता ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष वातावरण को दिव्य बना रहा है।
नीलकंठ धाम दसेर : मध्यप्रदेश सीमा से लगे ऊंचे पहाड़ पर स्थित नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए अंतर्राज्यीय भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
जटाशंकर धाम : प्राकृतिक गुफा और स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध यह धाम प्रकृति और भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
अमृतधारा हसदेव शिव मंदिर : जलप्रपात की कल-कल ध्वनि के बीच महादेव का अभिषेक करने दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
विशेष पूजा-अर्चना और परंपराएं, महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में सभी प्रमुख शिवालयों में विशेष अनुष्ठानों की तैयारियां पूर्ण हैं—
अभिषेक : भक्त जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भगवान आशुतोष का श्रृंगार करेंगे।
भंडारा : जगह-जगह खिचड़ी प्रसादी और फलाहार वितरण की व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था : सिद्ध बाबा, जटाशंकर और मेण्ड्रा जैसे स्थलों पर मेले जैसा माहौल है, प्रशासन ने सुगम दर्शन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व- पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की पावन रात्रि है। यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम और नकारात्मकता के त्याग का प्रतीक माना जाता है। कृषि प्रधान जिले के किसान भी अच्छी फसल और खुशहाली के लिए भोलेनाथ के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रहे हैं, हसदेव नदी की पावन लहरें और शिवालयों की घंटियां आज जिले की सांस्कृतिक विरासत और अटूट विश्वास की गवाही दे रही हैं, महाशिवरात्रि का यह महासंगम न केवल आस्था का उत्सव है, बल्कि सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का भी प्रतीक बन गया है।


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