

कोरिया के इतिहास को सहेजने का प्रशासनिक महायज्ञ
कलेक्टर कोरिया की पहल पर पांडुलिपियों को मिल रहा डिजिटल कवच
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,04 मई 2026 (घटती-घटना)। इतिहास केवल किताबों में नहीं होता, वह उन जर्जर पन्नों और स्याही में भी होता है जो किसी पुराने संदूक या मंदिर के कोने में सहेज कर रखे गए हों, कोरिया जिले की इसी छिपी हुई ज्ञान विरासत को दुनिया के सामने लाने के लिए कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने एक ऐसी मुहिम छेड़ी है, जिसकी गूँज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है,‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण’ के माध्यम से जिले के इतिहास को डिजिटल कवच पहनाया जा रहा है।
एक संवेदनशील प्रशासनिक सोच की जीत
अक्सर प्रशासन का ध्यान सड़कों और इमारतों तक सीमित रहता है, लेकिन कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कोरिया की सांस्कृतिक आत्मा को सहेजने का बीड़ा उठाया है,उनकी इस सक्रियता का परिणाम है कि जिले में अब तक सैकड़ो अनमोल पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है, यह केवल कागजों का ढेर नहीं,बल्कि 1948 के पूर्व के भारत की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जीवंत प्रमाण हैं।
काल के गाल से सुरक्षित होगी अनमोल विरासत
कलेक्टर की इस दूरदर्शी सोच का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जो हस्तलिखित दस्तावेज रख-रखाव के अभाव में नष्ट हो रहे थे,उन्हें अब डिजिटल जीवनदान मिल गया है। सैकड़ो पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण पूरा होना इस बात का सबूत है कि हमारी प्राचीन लिपियाँ और ज्ञान अब अनंत काल के लिए सुरक्षित हो चुके हैं।
शोध की दुनिया में चमकेगा कोरिया का नाम
इन पांडुलिपियों में प्राचीन सनातनी मंत्रों से लेकर रियासतकालीन निमंत्रण पत्र और प्रशासनिक दस्तावेज शामिल हैं,यह सामग्री भविष्य के शोधकर्ताओं के लिए स्वर्ण भंडार साबित होगी,कलेक्टर की यह पहल कोरिया को इतिहास और पुरातत्व के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
जन-भागीदारी और विश्वास का नया मॉडल
आमतौर पर लोग अपनी पुरानी वस्तुएं प्रशासन को देने से कतराते हैं, लेकिन कलेक्टर ने स्वामित्व की सुरक्षा का भरोसा देकर जन-विश्वास जीता है, उन्होंने स्पष्ट किया है कि मूल प्रति मालिक के पास ही रहेगी, केवल उसकी डिजिटल छाया सहेजी जाएगी, यही कारण है कि आज बैगा, पुजारी, साहित्यकार और आम नागरिक इस महायज्ञ में अपनी आहुति दे रहे हैं।
भावी पीढि़यों के लिए प्रेरणा का स्रोत
आज की डिजिटल पीढ़ी जब अपने जिले के 100 साल पुराने उत्सवों, रीति-रिवाजों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को देखेगी, तो उनमें अपनी मिट्टी के प्रति गौरव का भाव जगेगा, यह अभियान आधुनिकता और परंपरा के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण कर रहा है।
एक सुव्यवस्थित टीम और बड़ी उपलब्धि
कलेक्टर के कुशल नेतृत्व में डिप्टी कलेक्टर उमेश कुमार पटेल और 68 सर्वेयरों की टीम दिन-रात फील्ड पर काम कर रही है, 16 नई पांडुलिपियों का हालिया अपलोड होना जिले की प्रशासनिक तत्परता को दर्शाता है।
प्रशासन की अपील
यह अभियान आपका है, आपकी विरासत का है, यदि आपके पास 70 साल से पुराना कोई भी हस्तलिखित दस्तावेज है, तो उसे साझा करें, हम उसे संरक्षित करेंगे ताकि आने वाली नस्लें जान सकें कि कोरिया का इतिहास कितना गौरवशाली था।
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