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कोरिया@ कोरिया पैलेस से जुड़े महिपाल सिंह राणावत बने RHS के राजस्थान उपाध्यक्ष

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कोरिया,04 मई 2026 (घटती-घटना)।
राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले युवा चेहरे महिपाल सिंह राणावत को राष्ट्रीय हिन्दू संगठन का राजस्थान प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति न केवल संगठन के विस्तार और मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि इसे युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने के रूप में भी देखा जा रहा है, राणावत की यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनका संबंध छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक कोरिया राजपरिवार से भी जुड़ा हुआ है, जिससे इस खबर की गूंज राजस्थान के साथ-साथ बैकुंठपुर (कोरिया) और आसपास के क्षेत्रों में भी सुनाई दे रही है।
संगठन ने जताया भरोसा,युवा नेतृत्व को मिला मंच-राष्ट्रीय हिन्दू संगठन के केंद्रीय नेतृत्व ने महिपाल सिंह राणावत की सक्रियता, सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है,संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र दुबे सत्या और राजस्थान प्रदेश प्रभारी जयप्रकाश श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने विश्वास जताया है कि राणावत संगठन की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे,इस नियुक्ति को संगठन के भीतर नई ऊर्जा और उत्साह के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि युवा नेतृत्व अक्सर संगठन को नई दिशा और गति प्रदान करता है।
आभार और जिम्मेदारी का संकल्प- नई जिम्मेदारी मिलने के बाद महिपाल सिंह राणावत ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पद उनके लिए केवल एक सम्मान नहीं,बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है,उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संगठन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे,राणावत ने कहा कि उन्हें इस मंच के माध्यम से समाज सेवा और राष्ट्रहित में कार्य करने का अवसर मिला है, जिसे वे पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास करेंगे।
महान विभूतियों से प्रेरित कार्यशैली- अपने विचार व्यक्त करते हुए राणावत ने बताया कि वे स्वामी विवेकानंद, महाराणा प्रताप और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेते हैं, उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के विचार उन्हें राष्ट्र सेवा,त्याग और संघर्ष के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। राणावत का मानना है कि आज के युवाओं को इन आदर्शों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
संतों के मार्गदर्शन और पारिवारिक परंपरा का प्रभाव– महिपाल सिंह राणावत ने अपने जीवन में संत-महात्माओं के मार्गदर्शन को विशेष महत्व दिया है,उनका कहना है कि उन्हें समय-समय पर संतों का आशीर्वाद और दिशा-निर्देश मिलता रहा है, जो उनके कार्यों को सकारात्मक दिशा देता है,उन्होंने अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके पिता डॉ तखत सिंह राणावत और परिवार के अन्य सदस्य लंबे समय से समाज सेवा में सक्रिय रहे हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार की है।
प्राथमिकताएं : महिला सशक्तिकरण और युवा निर्माण- राणावत ने अपनी कार्ययोजना को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता महिलाओं को सशक्त बनाना और युवाओं को संस्कारित करना होगी,उन्होंने बताया कि ‘वीरांगना सेल’ के माध्यम से प्रदेश की बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे,जिससे वे आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सकें, ‘संस्कारशाला’ और ‘संयम’ प्रकल्पों के जरिए युवाओं को नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़ा जाएगा, उनका मानना है कि यदि युवाओं को सही दिशा और संस्कार मिल जाएं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः संभव है।
कोरिया राजपरिवार से संबंध बना चर्चा का केंद्र-महिपाल सिंह राणावत का संबंध छत्तीसगढ़ के कोरिया राजपरिवार से जुड़ा होना इस नियुक्ति को और भी खास बनाता है,उनका विवाह अनुराधा सिंह देव राणावत से हुआ है, जो महाराजा शिवमंगल सिंह देव की प्रपौत्री और महाराज लाल हरिशरण सिंह देव की सुपौत्री हैं,इस रिश्ते के कारण राजस्थान और छत्तीसगढ़ के बीच एक सांस्कृतिक सेतु भी स्थापित होता दिखाई दे रहा है। बैकुंठपुर और कोरिया क्षेत्र में इस खबर के बाद विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही शुभकामनाएं-राणावत की इस नियुक्ति पर सामाजिक संगठनों,राजपरिवार से जुड़े लोगों और आम नागरिकों ने उन्हें बधाई दी है, लोगों ने विश्वास जताया है कि वे अपने पद का उपयोग समाज के हित में करेंगे और संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे,सोशल और सामाजिक दोनों स्तरों पर यह खबर तेजी से चर्चा में है, और इसे एक सकारात्मक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
युवा नेतृत्व से नई उम्मीदें-महिपाल सिंह राणावत की नियुक्ति यह दर्शाती है कि आज के समय में संगठनों में युवाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं,उनका सामाजिक अनुभव,पारिवारिक पृष्ठभूमि और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है,अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी योजनाओं को किस प्रकार जमीन पर उतारते हैं और संगठन को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल,उनकी नियुक्ति ने राजस्थान से लेकर छत्तीसगढ़ तक एक सकारात्मक संदेश जरूर दिया है कि युवा नेतृत्व ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है।


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