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चिरमिरी @ गोरखनाथ मंदिर गोदरीपारा में 72 घंटे हरिनाम संकीर्तन

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अतिथि के रूप में शामिल हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता विनय उपाध्याय
चिरमिरी,13 फरवरी 2026(घटती-घटना)।
चिरमिरी के गोदरीपारा स्थित एकमात्र विशाल गोरखनाथ मंदिर में उत्कल समाज द्वारा आयोजित 24 प्रहर यानी 72 घंटे का हरिनाम संकीर्तन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ,हर वर्ष फरवरी माह में आयोजित होने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और कीर्तन मंडलियों की भागीदारी से भव्य रूप में सम्पन्न हुआ, कार्यक्रम में मनेन्द्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता विनय उपाध्याय विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंदिर एवं आयोजन समिति ने पारंपरिक उत्कल गमछा पहनाकर उनका स्वागत किया, आयोजन स्थल पर लगातार हरिनाम संकीर्तन की गूंज और भक्तिमय वातावरण ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने बांधा समां
तीन दिवसीय इस आयोजन में अलग-अलग कीर्तन मंडलियों ने हरि नाम संकीर्तन प्रस्तुत कर अनुष्ठान को सफल बनाया,मुख्य रूप से उड़ीसा से आए पुजारियों ने वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ सम्पन्न कराया। संकीर्तन और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
प्रकृति की गोद में बसा गोरखनाथ मंदिर
गोदरीपारा स्थित गोरखनाथ मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बना हुआ है, जहां भगवान भोलेनाथ की पूजा गोरखनाथ बाबा के रूप में की जाती है, मंदिर परिसर की शांत और मनोरम वादियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती हैं। हर वर्ष शीतकालीन समय में उत्कल समाज द्वारा यहां भव्य भोग-भंडारे का आयोजन भी तीन दिनों तक किया जाता है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
समाज और नागरिकों का सहयोग
आयोजन को सफल बनाने में उत्कल समाज के साथ-साथ विभिन्न समाजों और गोदरीपारा के स्थानीय नागरिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मंदिर समिति के अभि मंडल, लक्ष्मी प्रधान,शिवराम बेहरा,लिंगराज स्वाई,अजीत बेहरा,काशीनाथ साहू, जगबंधु खुटिया,धनुमुनी,राजकिशोर गुरुजी,रामू साहू, हटिया स्वाई और कैलास महाराणा सहित सभी सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक
तीन दिन तक चले इस धार्मिक आयोजन ने न केवल भक्ति का माहौल बनाया,बल्कि विभिन्न समाजों को एक मंच पर जोड़कर सामाजिक एकता का संदेश भी दिया,श्रद्धालुओं का कहना है कि हरिनाम संकीर्तन जैसे आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं और लोगों में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं, चिरमिरी के गोरखनाथ मंदिर में आयोजित यह 72 घंटे का संकीर्तन एक बार फिर आस्था,परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर सामने आया।


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