
हनुमान चालीसा पाठ,संतों का उद्बोधन और विशाल भोग-भंडारा होगा आयोजित
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर/रनई,21 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। श्री हनुमान सेवा समिति रनई के तत्वावधान में गिरजापुर मंडल (केंद्र – रनई) अंतर्गत 26 दिसंबर,शुक्रवार को दोपहर 2 बजे से दुर्गा पूजा पंडाल,रनई में विशाल हिन्दू सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है, समिति के अध्यक्ष विकास शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना एवं सनातन मूल्यों का जागरण करना है। सम्मेलन की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ से होगी। आज के सार्वजनिक जीवन में मंचों की कमी नहीं है, लेकिन अर्थपूर्ण मंच दुर्लभ होते जा रहे हैं, अधिकांश आयोजन सत्ता-प्रदर्शन, राजनीतिक उपस्थिति और फोटो-औपचारिकताओं तक सिमटकर रह गए हैं, ऐसे समय में रनई जैसे ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित विशाल हिन्दू सम्मेलन एक अलग और सकारात्मक संकेत देता है, यह सम्मेलन किसी राजनीतिक दल का नहीं,बल्कि समाज की चेतना का मंच है। इसका मूल उद्देश्य स्पष्ट है सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों का पुनर्स्मरण, हनुमान चालीसा पाठ से लेकर संतों के उद्बोधन तक,कार्यक्रम का प्रत्येक चरण समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास करता है,हिन्दू समाज की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता है, यही विविधता जब संवाद में बदलती है, तब शक्ति बनती है,और जब उपेक्षा में बदलती है,तब विभाजन का कारण बनती है, यह सम्मेलन उसी संवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जहाँ जाति,पद और पहचान से ऊपर उठकर समाज स्वयं से प्रश्न करता है, इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सम्मान समारोह है, यहाँ सम्मान पदों का नहीं, बल्कि सेवा का है, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,मितानिन, पंचायत कर्मी और ज़मीनी जनप्रतिनिधि ये वे लोग हैं जो नीतियों को काग़ज़ से निकालकर जीवन तक पहुँचाते हैं, जब ऐसे कर्मयोगियों को सार्वजनिक मंच से सम्मान मिलता है,तो समाज स्वयं अपने मूल्यों की पुष्टि करता है,कार्यक्रम के अंत में आयोजित भोग-भंडारा केवल भोजन नहीं, बल्कि समानता का प्रतीक है,एक पंक्ति में बैठकर,बिना किसी भेदभाव के भोजन करना भारतीय सामाजिक दर्शन का मूल है, यही समरसता इस आयोजन की आत्मा है, हालाँकि प्रश्न यह भी है कि क्या ऐसे आयोजन केवल एक दिन तक सीमित रहेंगे या इनसे उपजी चेतना समाज के व्यवहार में भी दिखाई देगी? यदि यह सम्मेलन केवल स्मृति बनकर रह गया, तो उद्देश्य अधूरा रहेगा, लेकिन यदि इससे समाज में सम्मान,सहयोग और संवाद की संस्कृति मजबूत होती है,तो यह आयोजन अपने आप में उदाहरण बन जाएगा, आज ज़रूरत है कि ऐसे मंचों को केवल आयोजन न मानकर,सामाजिक उत्तरदायित्व की शुरुआत समझा जाए। क्योंकि जब समाज स्वयं आगे आता है, तभी बदलाव स्थायी होता है।
जब मंच सत्ता का नहीं,समाज की आत्मा का हो
आज के समय में जब सार्वजनिक मंच अक्सर राजनीतिक प्रदर्शन, शक्ति-संतुलन और भीड़-प्रबंधन तक सीमित हो गए हैं, ऐसे दौर में रनई जैसे ग्रामीण अंचल में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन एक अलग ही संदेश देता है, यह आयोजन सत्ता के लिए नहीं, समाज की चेतना के लिए है, यह सम्मेलन न तो चुनावी नफा-नुकसान का हिसाब लगाता है,न ही किसी दल की राजनीतिक भाषा बोलता है, इसका मूल भाव स्पष्ट है सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक आत्मबोध और सनातन चेतना का जागरण।
हिन्दू सम्मेलन या हिन्दू चेतना का पुनः स्मरण?
हिन्दू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता रही है। लेकिन बीते वर्षों में यह समाज अक्सर खांचों में बाँटने की कोशिशों का शिकार रहा, कभी जाति के नाम पर, कभी पद के नाम पर, तो कभी राजनीतिक लाभ के लिए, रनई में आयोजित यह सम्मेलन उसी टूटन के विरुद्ध एक सांस्कृतिक उत्तर है। हनुमान चालीसा का पाठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कर्तव्य, साहस और सेवा की स्मृति है, संतों का उद्बोधन केवल प्रवचन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का प्रयास है।
संत-महात्माओं का मार्गदर्शन
कार्यक्रम में पंडित सुयश देव जी महाराज एवं पंडित विक्रम शास्त्री जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे और धर्म, संस्कृति तथा सामाजिक एकता पर अपना उद्बोधन देंगे, इसके साथ ही समाज सेविका सुनीता कुर्रे, राज्यपाल पुरस्कृत एवं सेवा निवृत्त शिक्षक राजलाल राजवाड़े, तथा मातृ शक्ति समुंद्री राजवाड़े द्वारा सामाजिक विषयों पर विचार व्यक्त किए जाएंगे।
विशाल भोग-भंडारा
कार्यक्रम के समापन पर सामाजिक समरसता के निमित्त विशाल भोग-भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्रवासियों से सपरिवार उपस्थित होकर सहभागिता करने की अपील की गई है, समिति ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों से इस आयोजन में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया है।
सम्मान समारोहः पद नहीं,योगदान का उत्सव
इस आयोजन की सबसे सार्थक बात यह है कि यहाँ सम्मान किसी पद या रसूख का नहीं,बल्कि सेवा और दायित्व का है, शिक्षक,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,मितानिन,रोजगार सहायक,पंचायत कर्मी ये वे लोग हैं जो नीतियों के पोस्टर नहीं,नीतियों के धरातलीय चेहरे हैं,जब ऐसे लोगों को मंच पर सम्मान मिलता है,तब समाज यह स्वीकार करता है कि विकास केवल घोषणाओं से नहीं,ज़मीनी कर्म से होता है।
सम्मान समारोह का आयोजन
सम्मान समारोह के अंतर्गत गिरजापुर मंडल क्षेत्र के अंतर्गत कार्यरत समस्त शिक्षकगण,जनप्रतिनिधि (जिला पंचायत सदस्य,जनपद पंचायत सदस्य, सरपंच, उपसरपंच),ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ,स्वास्थ्य कार्यकर्ता,मितानिन एवं कोटवार को उनके सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur