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सूरजपुर@राष्ट्रीय पशु की निर्मम हत्या…बाघ की मौत मामले में महिला सरपंच समेत 6 गिरफ्तार

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घर से बरामद हुए बाघ के नाखून-बाल,करंट बिछाकर किया गया शिकार

-संवाददाता-
सूरजपुर,18 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व क्षेत्र में राष्ट्रीय पशु बाघ की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सूरजपुर जिले के रेवटी जंगल में करंट लगाकर मारे गए नर बाघ के मामले में महिला सरपंच समेत 6 आरोपियों को वन विभाग ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से बाघ के नाखून और बाल बरामद किए गए हैं,जो इस अपराध को सिर्फ शिकार नहीं बल्कि अवैध वन्यजीव तस्करी से जोड़ते हैं,यह मामला केवल एक बाघ की मौत नहीं है,यह सत्ता, लालच और अपराध के गठजोड़ का आईना है,जब गांव का सरपंच ही वन्यजीव अपराध में लिप्त हो,तो सवाल सिर्फ कानून का नहीं, नैतिक पतन का भी है।
तीन दिन पहले मिला था बाघ का शव
15 दिसंबर को सूरजपुर जिले के घुई वन परिक्षेत्र अंतर्गत रेवटी जंगल में नर बाघ का शव मिला था। प्रारंभिक जांच में ही मामला संदिग्ध लग रहा था क्योंकि शव से बाघ के नाखून और बाल गायब थे, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ पुष्टि हुई कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई।
सरपंच के घर से निकले सबूत
वन विभाग की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत परसडीहा की सरपंच सिसका कुजूर का नाम सामने आया,पूछताछ के दौरान उसकी निशानदेही पर बाघ के नाखून और बाल उसके घर से बरामद किए गए। इसके बाद सरपंच को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।
करंट बिछाने से लेकर हत्या तक की साजिश
पूछताछ में खुलासा हुआ कि जंगली सुअर के शिकार के लिए जंगल में करंट प्रवाहित तार बिछाया गया था, जिसकी चपेट में आकर बाघ की मौत हो गई, लेकिन नाखून और बाल निकालना यह साबित करता है कि यह सिर्फ ‘दुर्घटना’ नहीं, बल्कि संगठित वन्यजीव अपराध था।
टाइगर रिजर्व में दर्ज घटनाओं का ट्रेंड (अनुमानित पैटर्न)
भारत (2019-2024)
– बाघ/तेंदुआ/हाथी की मौत में
– 30-35′ मामले करंट से
– ग्रामीण सीमावर्ती इलाकों में
– हर 10 में 4 मौतें करंट से
छत्तीसगढ़ (टाइगर रिजर्व व कॉरिडोर क्षेत्र)
करंट शिकार की घटनाओं में
– पिछले 5 साल में 960′ वृद्धि
– गुरु घासीदास-तमोर पिंगला क्षेत्र
– हाई-रिस्क ज़ोन के रूप में चिन्हित
नोट : अधिकांश घटनाएं शुरुआत में ‘दुर्घटना’ बताकर दबाने की कोशिश होती है।
करंट शिकार क्यों बढ़ रहा है?
(डेटा से निकले कारण)

  1. सूअर शिकार की आड़
    – 70′ मामलों में दावाः‘सूअर के लिए लगाया था
    – लेकिन शिकार बनेः
    – बाघ 7 तेंदुआ 7 हाथी
  2. स्थानीय सत्ता का संरक्षण
    – पंचायत प्रतिनिधि/प्रभावशाली ग्रामीण
    – अपराध की रिपोर्टिंग देर से
    – सबूत गायब (नाखून,दांत,बाल)
  3. कम सजा,ज्यादा मुनाफा
    – करंट लगाने में लागतः 500-2000
    – बाघ के अंगों का अवैध बाजार मूल्यः लाखों रुपये

सीमावर्ती इलाकों में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं…
वन विभाग के अनुसार सूरजपुर और बलरामपुर जिले की सीमा से लगे इलाकों में पहले भी करंट बिछाकर जंगली सुअर के शिकार की घटनाएं सामने आती रही हैं,लेकिन इस बार इसकी कीमत राष्ट्रीय पशु बाघ को चुकानी पड़ी।
वन विभाग का सख्त संदेश
वन विभाग ने स्पष्ट कहा है कि बाघ की हत्या एक जघन्य और अक्षम्य अपराध है। इसमें शामिल कोई भी व्यक्ति कानून से नहीं बचेगा,आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कड़ी धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।
वन्यजीव अपराध का बदलता स्वरूप करंट शिकार
पारंपरिक बंदूक से आधुनिक तार तक पिछले एक दशक में वन्यजीव शिकार के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है।
अवधि प्रमुख शिकार तरीका
2000-2010 फंदा, बंदूक, जहर
2011-2018 तार फंदा, देसी ट्रैप
2019-2025 करंट प्रवाहित तार
करंट शिकार कम लागत, कम जोखिम और ज्यादा मारक होने के कारण तेजी से बढ़ा है।
करंट शिकार की पहचान के प्रमुख संकेत (फॉरेंसिक डेटा)
संकेत अर्थ

– नाखून/बाल गायब तस्करी की मंशा
– शव के आसपास तार करंट ट्रैप
– पीएम में बर्न मार्क Electrocution
– घटना रात की संगठित अपराध
– रेवटी केस में सभी संकेत मौजूद हैं।


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