कोई दुश्मनी नई बना ले गया कोई पुरानी दुश्मनी भुलाकर नया अध्याय लिख गया
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,03 मार्च 2025 (घटती-घटना)। संपन्न चुनाव जो नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत के रूप में संपन्न हुआ के दौरान जिले में कई अलग अलग वाकए देखने को मिले। कई जगह चुनाव में एक दूसरे को हार का मजा चखाने लोग इस स्तर तक नीचे गिरे की नई दुश्मनी और बैर वह पाल ले गए वहीं कहीं यह देखने को मिला कि कई दशकों पुरानी वैमनस्यता और द्वेष का उन्मूलन लोग आपसी कर ले गए। चुनाव वैसे तो हार जीत का एक खेल ही है और जिसमे अंतर केवल खेल के मुकाबले इतना है कि खेल में कई पुरुस्कार होते हैं जिसमें प्रथम द्वितीय और तृतीय साथ ही सांत्वना भी प्रतिस्पर्धी पुरस्कार पाता है लेकिन चुनाव में केवल एक पुरस्कार होता है जो होता है जीत का और केवल जीत का। अपनी जीत और अपने पसंदीदा की जीत का प्रयास करते प्रत्याशी और समर्थक कई बार उन सीमाओं को लांघ जाते हैं जहां आपसी संबंध समाप्त हो जाते हैं और कहीं न कहीं दुश्मनी नई वह बना ले जाते हैं जो कई बार या अधिकाशं बार होता आया है और इसबार भी हुआ है ,वहीं संबंध मधुर और प्रगाढ़ या पुरानी दुश्मनी या वैमनस्यता समाप्त हो ऐसा चुनाव में कभी कभार ही होता है जो इस बार के चुनाव में जिले में होता नजर आया जहां कई पुराने टूटे घर आपस में बिछड़े घर एक हुए और उन्होंने इस चुनाव को नए अंदाज में सम्पन्न कराया।
जिले के कई जगह ऐसा देखने को मिला जहां दशकों पुरानी वैमनस्यता समाप्त हुई और सारे गिले शिकवे भुलाकर कई परिवार एक हुए जो दशकों से एक दूसरे का मुंह नहीं देखना चाहते थे। वैसे जीत हार को यदि अपनी जगह छोड़ा जाए तो यह अच्छा उदाहरण माना जाएगा जहां लोगों ने आपसी सद्भाव और आपसी संबंधों को महत्त्व दिया और एकजुट हुए जो कहीं न कहीं बिछड़े हुए चल रहे थे। वैसे प्रत्याशियों के हिसाब से कई जगह यह एकजुटता और यह व्यवहार लोगों का नुकसानदायक भी साबित हुआ और कई प्रत्यासी दूसरों के परिवार की लड़ाई के बीच जीत तलाशते समाज की लड़ाई में जीत तलाशते चुनाव हार गए और कहीं कोई इसी एकजुटता और आपसी सद्भाव से चुनाव जीत गया। कुल मिलाकर चुनाव में बहुत कुछ अच्छा देखने को मिला। इस चुनाव में कई जगह लोगों ने माना कि परिवार और समाज की आपसी लड़ाई को आधार बनाकर चुनाव जीतने वाले की मंशा को चकनाचूर करना है और उन्होंने ऐसा किया भी।
सबसे बड़ा जीत का हथियार प्रत्याशी लोगों की वैमनस्यता बनाते थे पर इस बार भजाने से चुक गए धोखा खा गए चुनाव में धनबल और अन्य कई जोर आजमाइश के बीच प्रत्याशी का सबसे बड़ा जीत का हथियार लोगों की आपसी वैमनस्यता होती है जो कई बार परिवार पड़ोसी या समाज से जुड़ी होती है जिसे प्रत्याशी हर हाल में भजाने का प्रयास करता है वहीं इस बार कई प्रत्याशी इस मामले में चुक खा गए धोखा खा गए और लोग खुद की वैमनस्यता दुश्मनी को भुलाकर अंदर ही अंदर एकजुट हो गए और गलत सोच आपसी दुश्मनी का फायदा उठाने की सोच को वह धूल चटा दिए। वैसे इसे जैसे भी समझा जाए यह इस हिसाब से अच्छा है कि परिवार समाज और आस पड़ोस के लोगों ने आस पड़ोस परिवार या समाज के लोगों पर विश्वास जताया। स्वार्थी जब प्रत्याशी हो और किसी आपसी लड़ाई का वह फायदा उठाने की फिराक में हो तो ऐसा जिसका फायदा उठाने की मंशा है वह सोचे और एकजुट हो जाए सोच समझकर तो कोई गलत नहीं है। कुल मिलाकर कोई नई दुश्मनी बना ले गया कोई पुरानी वैमनस्यता भुलाकर नया अध्याय लिख गया। मनुष्यता भी यही है और विचारवान होना भी यही कहलाएगा कि व्यर्थ का विवाद और वैमनस्यता क्यों पालना उसे दूर करना ही समझदारी है और समय रहते परिवार का एक होकर समाज का एक होकर ऐसे को मुंह तोड़ जवाब देना भी जरूरी है जो दूसरे के विवाद का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता हो।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur