- रेवा यादव हैं विधायकों की पसंद,भरतपुर सोनहत सहित बैकुंठपुर विधायक की चली तो रेवा यादव होंगे भाजपा कोरिया जिलाध्यक्ष?
- सभी नामों पर चर्चा के बाद की है यह स्थिति,साहू समाज के एक जिला पदाधिकारी को लगेगा झटका,सूची में उसका नाम ही नहींःसूत्र
- साहू समाज के जिला पदाधिकारी ने खुद को जिलाध्यक्ष बनवाने,साहू समाज से मंडल अध्यक्ष भी नहीं दिया किसी को बनने
- देवेंद्र तिवारी का कमजोर पहलू विधायकों से उनकी दूरी,संगठन में देवेंद्र तिवारी की पकड़ अन्य सभी से अलग
- अब क्या घटती-घटना की जानकारी पर लगने वाली है मुहर या भाजपा एकबार फिर जिलाध्यक्ष मामले में सभी को चौंकाने वाली है?
–रवि सिंह –
बैकुंठपुर 26 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। कोरिया जिला भाजपा अध्यक्ष के मनोनयन के लिए अब उलटी गितनी शुरू हो चुकी है और अब कभी भी निर्णय आ सकता है और अब देखना होगा कि कौन होता है भाजपा कोरिया का नया जिलाध्यक्ष और इस बार के मनोनयन में यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या जिलाध्यक्ष संगठन खेमे का होगा यह फिर एकबार वह विधायकों की पसंद होगा सत्ताधारी की मंशा अनुरूप होगा। वैसे कोरिया जिले में भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में किसी का कार्यकाल सबसे बेहतर और अच्छा माना जाता है तो वह स्व तीरथ गुप्ता जी का कार्यकाल माना जाता है जिनके कार्यकाल में संगठन की अलग भूमिका और महत्ता नजर आती थी वहीं उनके पहले और उनके बाद के अध्यक्षों के कार्यकाल में सत्ता ही संगठन पर भारी रहा या अध्यक्ष की एकला चलो की नीति से संगठन की स्थिति कमजोर रही। कोरिया जिले के भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए इसबार संगठन अपने खेमे से अध्यक्ष बनाने अड़ा हुआ है वहीं विधायक भी अपनी पसंद अनुसार जिलाध्यक्ष चाहते हैं और जिसके लिए वह भी राजधानी में डटे हैं। संगठन की तरफ से देवेंद्र तिवारी का नाम बताया जा रहा है कि तय है और नाम की घोषणा की औपचारिकता मात्र बाकी है वहीं विधायकों की तरफ से भी एक नाम जो अलग है संगठन के प्रस्ताव के विपरीत है जो रेवा यादव का नाम है का ही नाम मात्र प्रस्तावित है शेष अन्य नामों को लेकर सूत्रों के अनुसार मामला खारिज है।
वैसे सूत्रों का तो दावा है कि लिफाफा अब देवेंद्र तिवारी का बंद हो चुका है जो खुलना मात्र बाकी है लेकिन सूत्रों का यह भी दावा है कि विधायक रेवा यादव के लिए अड़े हुए हैं और उनकी तरफ से एक ही नाम रेवा यादव का भेजा गया है। वैसे भाजपा कई बार चौंकाने वाले निर्णय लेने की अपनी पहचान रखती है और यह कहना कि घटती घटना की ही खबर पर मुहर लगने वाली है और घटती घटना के ही सूत्रों की जानकारी सही है ऐसा सही नहीं होगा कोई ऐसा नाम भी जिलाध्यक्ष स्वरूप सामने आ सकता है जिसकी न तो सुगबुगाहट है और न वह उजागर है जरा भी। देवेंद्र तिवारी के नाम की सुगबुगाहट के बीच संगठन खेमा उत्साहित है और वह देवेन्द्र तिवारी के लिए प्रार्थना कर रहा है जिससे सत्ता की बजाए संगठन का उन्हें साथ मिले और जो सत्ता के साथ उन्हें नहीं मिल रहा है। वैसे देवेंद्र तिवारी की सत्ता से दूरी जग जाहिर है और चुनाव के बाद से ही उनका राजधानी में निवास करना यह बतलाता है कि सत्ता के साथ उनका सामंजस्य स्थापित नहीं हो पा रहा है और यदि वह जिलाध्यक्ष बनते हैं तो सत्ता से उनका सामंजस्य बनना तय हो जाएगा। देवेंद्र तिवारी का जिलाध्यक्ष बनना इसलिए भी संभव नजर आ रहा है क्योंकि वह सोनहत के निवासी हैं भले उन्होंने टिकट की लालसा में बैकुंठपुर में अपना एक निवास स्थापित किया था लेकिन उनका सोनहत से मोह किसी से छिपा नहीं है। सोनहत से जिलाध्यक्ष यदि होगा ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा को मजबूती मिलेगी यह भी एक भाजपा का प्रयास होगा।
अति महत्वाकांक्षा में समाज की दावेदारी खारिज?
साहू समाज इस बार प्रबल दावेदारी रख सकता था लेकिन अति महत्वाकांक्षा में समाज की दावेदारी खारिज हो गई यह पता चला है और एक जिला पदाधिकारी जिनकी मंशा थी जिला अध्यक्ष बनने की वह इतने उत्साहित निकले कि उन्होंने जहां मंडल अध्यक्ष मनोनयन में किसी समाज के व्यक्ति को मौका नहीं मिलने दिया वहीं अब उनका भी नाम पैनल में नहीं है जिलाध्यक्ष की दौड़ में नहीं है यह बताया जा रहा है। साहू समाज की दावेदारी खारिज होने की पीछे वजह साहू समाज के ही जिला पदाधिकारी का खुद के लिए छिपा प्रयास माना जा रहा है। शेष अब देखना है कि सूत्रों से मिली खबर का क्या सच से सामना होता है क्या संगठन और साा में संगठन का पलड़ा भारी पड़ता है।
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