- रेवती रमन मिश्रा महाविद्यालय के शौचालय में नही आता पानी इस लिए घर से पानी पीकर नहीं आतीं छात्राएं
- अब सोचने वाली ये बात है कि डबल इंजन की सरकार महाविद्यालय के शौचालय में आखिर क्यों नहीं पहुंचा पा रही पानी?
- रेवती रमन मिश्रा महाविद्यालय सूरजपुर की तो शौचालय में लटका रहता है ताला,बाकी शौचालय में नहीं है पानी की व्यवस्था
- शौचालय की समस्या से जूझ रहे हैं महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं फिर भी कॉलेज प्रबंधन का नहीं इस ओर ध्यान नहीं निरीक्षण में जब आती है टीम तभी सिर्फ महाविद्यालय की व्यवस्था होती है चकाचक… उसके बाद व्यवस्था फिर जस की तस


-शमरोज खान-
सूरजपुर,05 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार है सरकार स्कूल व महाविद्यालय को लेकर अच्छी व्यवस्था की बात करती है, हाई मलिटी की पढ़ाई सहित हाई मलिटी की मूलभूत सुविधाएं देने का दवा करती हैं, जो दावा सिर्फ दावा ही है क्योंकि स्कूल तो छोडि़ए महाविद्यालय के शौचालयों में पानी नहीं आता, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि व्यवस्था कितनी अच्छी है, जिस महाविद्यालय में 18 वर्ष से अधिक उम्र वाली छात्राएं अध्यनरत हो और वहां के शौचालय में पानी न हो तो समस्या कितनी बड़ी है, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है, शौचालय में पानी न होने की वजह से महाविद्यालय में अध्यनरत छात्राएं घर से पानी पीकर भी नहीं आती है क्योंकि शौचालय में जाने की नौबत ना आए, ऐसा करने से आप समझ सकते हैं कि वह किस तरह की पीड़ा से गुजरती होगी, और कई बीमारियों को आमंत्रण देती होगी, वही पानी न होने की वजह से शौचालय की बदबू लोगों के लिए और भी परेशानी बन खड़ी करती है।
हम बात कर रहे हैं बी प्लस ग्रेड वाले रेवती रमन मिश्र महाविद्यालय सूरजपुर की यह इकलौता जिले का महाविद्यालय है जहां लगभग सारे विषयों की पढ़ाई होती है, जिस वजह से इस जिले के हर कोने के छात्राएं यहां अध्यनरत है,सूरजपुर के अलावा भी कई शहर गांव सहित विधानसभा से यहां पर छात्र छात्राएं पढ़ाई करने आते हैं, पर समस्या यह है की महाविद्यालय के शौचालय में पानी ही नहीं आता है,बताया जा रहा है कि महाविद्यालय के छत पर लगा सिंटेक्स फूटा हुआ है जिसे बदलवाने की फुर्सत महाविद्यालय प्रबंधन को नहीं है, क्योंकि उनके कमरे के शौचालय में पानी आ रहा है सिर्फ पानी नहीं आ रहा है तो वह छात्राओं के लिए बने शौचालय में। ग्राउंड फ्लोर पर दो शौचालय हैं जिसमें पानी नहीं आता और फर्स्ट फ्लोर पर जो दो नए शौचालय बने हुए हैं उसमें ताला बंद है। ऐसे में अध्यनरत छात्राएं कहां शौचालय के लिए जाएंगे यह बड़ा सवाल है? जब यह बात कॉलेज के बाहर आ सकती है तो क्या यह बात कॉलेज प्रबंधन को नहीं पता है? और यदि नहीं पता है यह मानने वाली बात नहीं है और यदि पता है तो फिर इस समस्या का समाधान क्यों नहीं किया गया यह सवाल है? छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय बहुत बड़ी परेशानी है क्योंकि सुबह 10 बजे वह आते हैं और शाम के 4 बजे जाते हैं इस बीच उन्हें शौचालय जाने की नौबत ना आए इसके लिए वह घर से ही हल्का-फुल्का खाना ही खाकर आती हैं और हल्का-फुल्का पानी ही पीते हैं ताकि 6 घंटा कॉलेज में बिना शौचालय जाए वह रह सकें। अब इसे विडंबना और लापरवाही न कहें तो क्या कहें?

दिनभर के लिए शौचालय न जाना कितनी बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है यह समझने वाली बात है…
छात्राओं को दिनभर शौचालय न जाना पड़े लघु दीर्घ शंका के लिए इसलिए वह कम खाना और कम पानी पीकर महाविद्यालय आती हैं। वैसे यह प्राकृतिक है शरीर का एक प्राकृतिक क्रिया है की शरीर कुछ न कुछ समय समय पर विसर्जित करता ही है जिससे शरीर भी स्वस्थ रहता है। महाविद्यालय की छात्राएं लघु दीर्घ शंका का समाधान दिनभर न करके किस तरह बीमारियों को आमंत्रित कर रही हैं अपनी तरफ यह भी सोचनीय है। कुल मिलाकर प्रबंधन की लापरवाही साथ ही प्रबंधन की अनदेखी उदासीनता की वजह से छात्राएं बड़ी किसी बीमारी का शिकार न हो जाएं यह संभावना बनी हुई है।
गंदे शौचालय में जाने से संक्रमण का खतरा
पानी के अभाव में शौचालय गंदा है। शौचालय गंदा होने के बावजूद यदि छात्राएं विषम एवम अनिवार्य परिस्थिति में वहां जाती भी हैं तो उन्हें गंभीर बीमारी हो सकती है जिसकी संभावना ज्यादा है। छात्राओं के लिए ही यह समस्या विकराल है और जिसका समाधान होगा लगता नहीं है फिलहाल और प्रबंधन सोया है समस्या को अनदेखा कर रहा है। वैसे प्रबंधन ऐसे गंभीर मामले में क्यों मौन और निश्चिंत है यह सोचने वाली बात है।
जिस रास्ते से छात्राएं पहुंचती हैं कॉलेज उस रास्ते पर बहता है नाली का पानी
महाविद्यालय में जिस रास्ते से छात्राएं आती हैं पढ़ाई करने उस रास्ते पर नाली का पानी भी बहता है। बताया जा रहा है कि वह भी बड़ी समस्या है महाविद्यालय में। महाविद्यालय प्रबंधन व नगर पालिका क्या कर रहा है क्यों वह सभी मामले में अनभिज्ञ बना हुआ है यह सोचने वाली बात है। क्या महाविद्यालय प्रबंधन स्वक्ष भारत अभियान से भी प्रेरित नहीं न ही उससे वह सिख ले रहा है। सूरजपुर बंसल स्वीट से लेकर कॉलेज पहुंच मार्ग के बीच सड़कों पर नाली का गंदा पानी बहता है, उसे पार करके छात्राएं पैदल कॉलेज पहुंचती है इस बीच कई बार वाहन चलाने वाले उन्हें छीटा भी मार देते हैं कई तरह की यह परेशानियां उन्हें होती है इसके बावजूद न तो महाविद्यालय का प्रबंधक इस और ध्यान देता है और ना ही नगर पालिका सूरजपुर।
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