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बैकुंठपुर @ बाजार में भीड़ तो थी,लेकिन हर ग्राहक की जेब में खरीदारी की ताकत नहीं थी

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  • धनतेरस पर सजे बाजार,उमड़ी खरीदारों की भीड़,मजदूरी और धान खरीदी की सुस्ती से ग्रामीण कारोबार फीका
  • बैकुंठपुर से पटना तक धनतेरस की धूम,कहीं वाहनों की बुकिंग तो कहीं बर्तनों की खरीदारी
  • शुभ मुहूर्त में बाजारों में उमड़ी भीड़,व्यापारियों को करोड़ों के कारोबार की उम्मीद
  • त्योहार की चमक बाजारों में दिखी, लेकिन किसानों-मजदूरों की खाली जेब ने फीकी की खरीदारी
  • धनतेरस पर बाजार गुलजार,मगर ग्रामीण जेबों में नकदी की कमी से कारोबार को अपेक्षित रफ्तार नहीं
  • बैकुंठपुर,पटना और सोनहत में दिखी त्योहारी रौनक,कहीं वाहन-आभूषण की खरीदारी तो कहीं जरूरतों तक सिमटा बाजार
  • मजदूरी भुगतान अटकने और धान खरीदी शुरू नहीं होने का दिखा असर


-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,06 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)।
धनतेरस का दिन व्यापारियों के लिए केवल एक त्योहार नहीं,बल्कि पूरे साल की कारोबारी उम्मीदों से जुड़ा विशेष अवसर होता है, दीपावली से पहले आने वाला यह पर्व आस्था, परंपरा और बाजार की आर्थिक गतिविधियों का ऐसा संगम है, जिसका इंतजार छोटे दुकानदार से लेकर बड़े प्रतिष्ठान और वाहन शोरूम तक करते हैं,मान्यता के अनुसार धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में सोना-चांदी,बर्तन,वाहन,इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है,यही वजह है कि आर्थिक स्थिति चाहे जैसी हो,हर परिवार अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस दिन कुछ न कुछ खरीदने की कोशिश करता है, किसी के लिए सोने-चांदी के आभूषण खरीदना समृद्धि का प्रतीक है, तो किसी के लिए घर की जरूरत का एक बर्तन, कपड़ा या छोटा घरेलू सामान खरीदना ही धनतेरस की खुशियों को पूरा कर देता है। कोरिया जिले में भी धनतेरस के अवसर पर बैकुंठपुर,पटना और सोनहत सहित प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में बाजारों की रौनक देखने को मिली। सुबह से ही दुकानों के सामने ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी,बाजारों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था,ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानदारों ने विशेष तैयारियां कीं और कई प्रतिष्ठानों में छूट तथा उपहार योजनाएं भी रखी गईं,इलेक्ट्रॉनिक्स,कपड़ा,बर्तन,फर्नीचर,सोने-चांदी के आभूषण और दोपहिया वाहनों की दुकानों में खरीदारी का माहौल रहा,हालांकि बाजार में दिखाई देने वाली भीड़ के बीच कारोबार की वास्तविक तस्वीर कुछ अलग भी रही, जिला मुख्यालय में जहां खरीदारी का उत्साह अपेक्षाकृत बेहतर नजर आया,वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर क्षेत्रों में मजदूरी भुगतान लंबित रहने और धान खरीदी शुरू नहीं होने के कारण लोगों की क्रयशक्ति प्रभावित हुई। इसका असर बाजार की खरीदारी पर भी दिखाई दिया।
बैकुंठपुर में सजा मुख्य बाजार,वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में भी रौनक- जिला मुख्यालय बैकुंठपुर का मुख्य बाजार धनतेरस पर आकर्षक ढंग से सजा नजर आया। दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों को रोशनी और सजावट से तैयार किया था, सुबह से ही परिवार के साथ लोग बाजार पहुंचने लगे,कपड़े,बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स,फर्नीचर,घरेलू उपयोग की वस्तुओं और आभूषणों की दुकानों में ग्राहकों की आवाजाही बनी रही,ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई दुकानदारों ने विशेष छूट और उपहार योजनाएं रखीं,त्योहारी खरीदारी को ध्यान में रखते हुए प्रतिष्ठानों में सामान का अतिरिक्त स्टॉक भी उपलब्ध कराया गया था,दोपहिया वाहन शोरूम में भी ग्राहकों की अच्छी आवाजाही देखने को मिली,जिले के प्रमुख हीरो,बजाज,होंडा और टीवीएस शोरूम में धनतेरस को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं, शुभ मुहूर्त में वाहन की डिलीवरी लेने के लिए ग्राहक शोरूम पहुंचे,वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है,इसलिए धनतेरस पर शोरूम संचालकों को अच्छे कारोबार की उम्मीद रहती है, बैकुंठपुर का व्यापार केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं है,आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग खरीदारी के लिए यहां पहुंचते हैं,ऐसे में धनतेरस का कारोबार स्थानीय बाजार के साथ आसपास के ग्रामीण उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा रहता है।
पटना का बाजार भी बना ग्रामीण व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र-पटना क्षेत्र जिले के प्रमुख कारोबारी क्षेत्रों में गिना जाता है, आसपास के गांवों और ग्रामीण अंचलों के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर त्योहार की खरीदारी तक के लिए यहां के बाजार पर निर्भर रहते हैं,धनतेरस पर पटना के व्यापारियों को भी ग्राहकों की आवाजाही और अच्छी बिक्री की उम्मीद रहती है,क्षेत्र में कृषि आधारित गतिविधियों और आसपास की आर्थिक गतिविधियों का असर बाजार पर दिखाई देता है, पटना जैसे बाजारों की विशेषता यह है कि यहां बड़े प्रतिष्ठानों के साथ छोटे दुकानदारों का कारोबार भी ग्रामीण ग्राहकों पर निर्भर रहता है, कपड़ा,किराना,बर्तन,इलेक्ट्रॉनिक्स,कृषि उपयोग की वस्तुएं और घरेलू सामान बेचने वाले व्यापारियों के लिए त्योहार का समय महत्वपूर्ण होता है,लेकिन जब ग्रामीण परिवारों के पास मजदूरी या कृषि उपज की बिक्री से मिलने वाली राशि समय पर नहीं पहुंचती,तो खरीदारी का बजट भी प्रभावित होता है, इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षित नकदी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति ने बाजार की रफ्तार को कुछ हद तक प्रभावित किया।
मजदूरी भुगतान लंबित,तो त्योहार की खरीदारी पर कैसे आएगी तेजी?- ग्रामीण बाजार की वास्तविक ताकत मजदूर,किसान और छोटे आय वर्ग के उपभोक्ता होते हैं, यही वर्ग कपड़े,बर्तन,किराना,घरेलू उपयोग की वस्तुओं और अन्य जरूरी सामान की नियमित खरीदारी करता है,त्योहार के समय जब इन परिवारों के हाथ में अतिरिक्त पैसा आता है,तो बाजार में मांग बढ़ती है,लेकिन यदि मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं हो,तो त्योहार की तैयारी भी प्रभावित होती है,जिले के कई क्षेत्रों में मजदूरी भुगतान लंबित रहने की बात सामने आई है। विशेषकर वनांचल क्षेत्रों में मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए समय पर भुगतान नहीं मिलना आर्थिक परेशानी बढ़ाता है,देवगढ़ रेंज क्षेत्र में भी मजदूरी भुगतान रुकने का असर स्थानीय परिवारों की आर्थिक स्थिति पर बताया जा रहा है, ऐसे परिवारों के लिए त्योहार पर नए कपड़े,घरेलू सामान या अन्य जरूरी वस्तुएं खरीदना कठिन हो जाता है,यह स्थिति केवल संबंधित परिवारों तक सीमित नहीं रहती,बल्कि इसका असर स्थानीय दुकानदारों के कारोबार पर भी पड़ता है,मजदूर के हाथ में पैसा पहुंचेगा तभी वह बाजार में खर्च कर पाएगा,जब भुगतान अटकता है, तो बाजार में खरीदारी की मांग भी कमजोर पड़ती है,इस लिहाज से मजदूरी भुगतान का मुद्दा केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं,बल्कि ग्रामीण बाजार और स्थानीय व्यापार की गति से भी जुड़ा हुआ है।
धान खरीदी शुरू नहीं होने से किसानों ने भी रोका खर्च- धनतेरस पर ग्रामीण बाजारों में खरीदारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने का एक प्रमुख कारण धान खरीदी शुरू नहीं होना भी माना जा रहा है, खेती-किसानी पर निर्भर परिवारों के लिए धान बिक्री से मिलने वाली राशि त्योहार और घरेलू जरूरतों के खर्च का महत्वपूर्ण आधार होती है,किसान अपनी उपज बेचकर मिलने वाली रकम से घर की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ कपड़े, बर्तन,इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान खरीदने की योजना बनाते हैं, लेकिन जब धान खरीदी शुरू नहीं होती,तब किसानों के हाथों में अपेक्षित नकदी नहीं पहुंच पाती,ऐसे में वे बड़ी खरीदारी करने से बचते हैं और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार ही खर्च करते हैं,इसका असर ग्रामीण बाजारों के कारोबार पर पड़ना स्वाभाविक है,बाजार में खरीदारी की इच्छा होने के बावजूद जेब में पैसा नहीं होना सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।
बाजार में भीड़ और बिक्री के बीच अंतर समझना जरूरी-धनतेरस पर बाजारों में भीड़ दिखाई देना स्वाभाविक है,लेकिन भीड़ को ही कारोबार की सफलता का पूरा पैमाना नहीं माना जा सकता। किसी बाजार में ग्राहकों की आवाजाही अधिक हो सकती है,लेकिन वास्तविक बिक्री का स्तर उनकी क्रयशक्ति पर निर्भर करता है, बड़े प्रतिष्ठानों में महंगे सामान की खरीदारी और छोटे दुकानदारों के यहां सीमित बजट की खरीदारी—दोनों बाजार की अलग-अलग तस्वीर पेश करते हैं,इस बार भी जिले के प्रमुख बाजारों में रौनक रही, लेकिन ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति ने खरीदारी के स्वरूप को प्रभावित किया,जहां कुछ लोगों ने वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और आभूषणों की खरीदारी की,वहीं बड़ी संख्या में परिवारों ने अपनी जरूरत और बजट के अनुसार ही खर्च किया,इसलिए व्यापारियों के लिए त्योहार की भीड़ के साथ वास्तविक बिक्री और पिछले वर्षों की तुलना भी महत्वपूर्ण होगी।
त्योहारी भीड़ के बीच यातायात व्यवस्था बनी चुनौती-बैकुंठपुर के मुख्य बाजार में धनतेरस की खरीदारी के दौरान लोगों और वाहनों की आवाजाही बढ़ने से यातायात व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण रही,मुख्य मार्गों पर वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग और फुटपाथों पर अस्थायी दुकानें लगने से कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनी,बाजार पहुंचने वाले ग्राहकों,वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा, त्योहारी सीजन में बाजार क्षेत्र में यातायात नियंत्रण, व्यवस्थित पार्किंग और पैदल चलने वालों के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करना जरूरी है, खरीदारी के उत्साह के बीच यदि लोगों को जाम और अव्यवस्था से जूझना पड़े, तो बाजार की रौनक के साथ असुविधा भी बढ़ जाती है।
व्यापारियों को दीपावली के शेष दिनों से उम्मीद-कुल मिलाकर धनतेरस पर बैकुंठपुर, पटना और सोनहत सहित जिले के प्रमुख बाजारों में त्योहारी माहौल रहा,व्यापारियों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष तैयारियां कीं और बाजारों में खरीदारी की आवाजाही बनी रही, जिला मुख्यालय में कारोबार की स्थिति बेहतर रही,जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर क्षेत्रों में मजदूरी भुगतान और धान खरीदी से जुड़ी परिस्थितियों का असर दिखाई दिया, अब व्यापारियों की उम्मीद दीपावली के शेष दिनों की खरीदारी पर टिकी है, लेकिन इस धनतेरस ने एक बार फिर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार के बीच गहरे संबंध को उजागर किया है,बाजार की चमक केवल दुकानों की सजावट,रोशनी और ग्राहकों की भीड़ से नहीं आती,बल्कि लोगों की जेब में उपलब्ध क्रयशक्ति से आती है,मजदूर को उसकी मजदूरी समय पर मिले,किसान को अपनी उपज बेचने का अवसर मिले और ग्रामीण परिवारों के हाथ में पैसा पहुंचे,तभी त्योहार की रौनक का लाभ छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारी तक सभी को मिल सकेगा।
सालभर के इंतजार का दिन… हर व्यापारी की निगाह धनतेरस पर…
व्यापारिक दृष्टि से धनतेरस का महत्व इसलिए भी खास है,क्योंकि इस दिन बाजार में लगभग हर वर्ग के ग्राहक पहुंचते हैं, बड़े कारोबारी महंगे सामान की बिक्री की उम्मीद करते हैं तो छोटे दुकानदार भी अपनी दुकान पर ग्राहकों की अच्छी संख्या आने की प्रतीक्षा करते हैं, दीपावली के लिए कपड़े, बर्तन,सजावटी सामान, मिठाई,इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी इसी दिन से तेज होती है,धनतेरस पर खरीदारी का स्वरूप हर परिवार की आर्थिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग होता है, आर्थिक रूप से सक्षम परिवार सोने-चांदी, वाहन और महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी करते हैं,जबकि सीमित आय वाले परिवार अपनी जरूरत और बजट के अनुसार बर्तन,कपड़े या घरेलू उपयोग की छोटी वस्तुएं खरीदते हैं,बाजार की पूरी अर्थव्यवस्था इसी अलग-अलग क्रयशक्ति वाले ग्राहक वर्ग पर निर्भर रहती है,यही कारण है कि धनतेरस के दिन केवल बड़े प्रतिष्ठानों की बिक्री ही नहीं,बल्कि छोटे दुकानदारों की कमाई भी महत्वपूर्ण होती है।
सोनहत में कृषि और एसईसीएल से जुड़ी गतिविधियों का बाजार पर असर
सोनहत क्षेत्र में भी धनतेरस पर बाजार में सामान्य त्योहारी रौनक रही, यहां की आर्थिक गतिविधियों में कृषि और एसईसीएल से जुड़ी गतिविधियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, ग्रामीण परिवारों की खरीदारी काफी हद तक खेती-किसानी,मजदूरी और उपलब्ध नकदी पर निर्भर करती है,इस बार धान खरीदी शुरू नहीं होने और मजदूरी भुगतान में देरी के कारण कई परिवारों ने अपनी खरीदारी जरूरत तक सीमित रखी, स्थानीय दुकानदारों को त्योहार के अवसर पर बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती है, लेकिन जब ग्रामीण ग्राहकों के पास पर्याप्त पैसा उपलब्ध नहीं होता,तो बाजार में भीड़ होने के बावजूद बिक्री अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाती,सोनहत में भी कारोबार अपेक्षाकृत औसत रहने की बात सामने आई,लोगों ने अपनी आस्था और आर्थिक क्षमता के अनुसार खरीदारी की,लेकिन बड़ी खरीदारी करने से कई परिवारों ने परहेज किया।


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