नेता-रसूखदारों के साथ रिश्तेदारों का कराया सिलेक्शन,गड़बड़ी के आरोप में जेल में बंद हैं आरोपी अफसर
बिलासपुर,15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग) के भर्ती घोटाले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला बाद में सुनाने का निर्णय लिया। यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया गया, रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाया गया और रिश्वतखोरी हुई। सीबीआई की जांच के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर प्रभाव का इस्तेमाल कर कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर अपने रिश्तेदारों और एक कारोबारी के परिजनों के चयन में मदद की। इस मामले में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और इसके बदले पैसे लेने के आरोप भी लगे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
पद के दुरुपयोग और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप
दरअसल,सीजी-पीएससी की 2020-2021 की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई थी। भाजपा के सीनियर लीडर ननकीराम कंवर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी लगाई थी। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों की सूची भी हाईकोर्ट को दी थी। जिसमें नेता, अधिकारी और रसूखदार कारोबारियों के रिश्तेदारों का सिलेक्शन किया गया।
45 लाख रुपए की रिश्वत का आरोप
सीबीआई ने 18 नवंबर 2024 को पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। इसी मामले में बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई का आरोप है कि श्रवण कुमार गोयल ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को डिप्टी कलेक्टर बनवाने के लिए 45 लाख रुपए दिए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रकम ग्रामीण विकास समिति के जरिए दो किस्तों में दी गई थी। सीबीआई का कहना है कि सोनवानी के परिजन इस समिति से जुड़े हुए थे।
रिश्तेदारों के चयन को लेकर उठा था विवाद
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2021 की परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद कई चयनित अभ्यर्थियों के आयोग के अधिकारियों, नेताओं और प्रभावशाली लोगों से रिश्ते होने को लेकर सवाल उठे थे। आरोप लगे कि योग्य अभ्यर्थियों के बजाय कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाया गया। विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो ने की। बाद में राज्य शासन के संदर्भ पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली। सीबीआई ने जुलाई 2024 में मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी भी ली गई। जांच का दायरा डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य वरिष्ठ सरकारी पदों पर चयन में कथित अनियमितताओं तक फैला है।
प्रश्नपत्र लीक करने का भी आरोप
सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग-2021 की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले पहुंचाए गए थे। जांच एजेंसी ने सोनवानी के भतीजों और कारोबारी के परिजनों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने की साजिश का आरोप लगाया है। मामले में आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक से जुड़े अधिकारी समेत अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के नियमों में परिवार और रिश्तेदारों से संबंधित प्रावधानों में बदलाव कर कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। ये सभी आरोप सीबीआई की जांच और चार्जशीट पर आधारित हैं; इनकी पुष्टि अदालत में होना बाकी है।
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