
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,15 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम बेनीपुर, रनपुर खुर्द स्थित नाथल दाई धाम के समीप स्थापित पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। इस बार यहां सामाजिक सद्भाव और विभिन्न धार्मिक आस्थाओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए बिना लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम के माता की आराधना की जा रही है। नाथल दाई समिति की इस पहल को लेकर धार्मिक आयोजन के साथ आपसी भाईचारे और सामंजस्य का संदेश भी सामने आया है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं और प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। नाथल दाई समिति,बेनीपुर के पदाधिकारी अनुज दुबे ने बताया कि नवरात्रि के अवसर पर माता नाथल दाई धाम के समीप पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां नौ दिनों तक श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। सामाजिक सौहार्द बनाए रखने तथा सभी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के उद्देश्य से लाउडस्पीकर और साउंड बॉक्स के माध्यम से भजन-कीर्तन, आरती अथवा संगीत कार्यक्रम नहीं करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर को तकिया मजार की अंजुमन कमेटी द्वारा आयोजित बैठक में नवरात्रि के नौ दिनों तक बिना साउंड सिस्टम के पूजा-पाठ करने का प्रस्ताव रखा गया था। बैठक में मौजूद माता नाथल दाई समिति के सदस्यों और अन्य लोगों ने आपसी सद्भाव बनाए रखने की भावना से इस प्रस्ताव पर सहमति जताई। इसी सहमति के अनुरूप वर्तमान में पूजा-अर्चना की जा रही है। हालांकि,साउंड सिस्टम के इस्तेमाल और आरती या संगीत कार्यक्रम नहीं करने के प्रस्ताव को लेकर कुछ लोगों में नाराजगी भी बताई जा रही है।
अनुज दुबे ने कहा कि माता नाथल दाई धाम के समीप ही तकिया मजार स्थित है, जहां प्रतिवर्ष धार्मिक आयोजन होते हैं। इन आयोजनों में बड़े साउंड सिस्टम के साथ गीत-संगीत और कव्वाली के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में सहभागिता करते हुए आपसी सद्भाव और भाईचारे की परंपरा को आगे बढ़ाते आए हैं। ऐसे में इस बार नवरात्रि के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय भी आपसी सहमति और सामाजिक सामंजस्य की भावना से जुड़ा है।
पांच सौ वर्ष से अधिक पुरानी मानी जाती है माता नाथल दाई की लोकपरंपरा : रनपुर खुर्द निवासी अर्जुन राम पटेल ने बताया कि पंडाल में स्थापित मां दुर्गा के स्वरूप में माता नाथल दाई की आराधना की जा रही है। इस स्थल पर प्राचीन समय से बैगा,देवार,गुनिया और ग्रामवासियों द्वारा पूजा-पाठ किए जाने की परंपरा रही है। ग्रामीणों की गहरी आस्था है कि माता इस स्थल पर विराजमान हैं। श्रद्धालु नियमित रूप से यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। श्रद्धालु जनमेजय मिश्रा ने बताया कि ग्राम बेनीपुर में माता नाथल देवी के प्राचीन मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद हैं और स्थल पर बाउंड्रीवाल का निर्माण भी कराया गया है। लोकपरंपरा के अनुसार,यहां बैगा,गुनिया,देवार और ग्रामीण लंबे समय से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। पारंपरिक पूजा-पाठ में माता कामाख्या के लघु स्वरूप के रूप में पूजित माता नाथल देवी की भी आराधना की जाती है। उन्होंने कहा कि सरगुजा की लोकसंस्कृति में देवी-देवताओं से जुड़े अनेक ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनका इतिहास केवल पत्थरों और शिलालेखों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकगीतों, बुजुर्गों की स्मृतियों, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपराओं और जनआस्था में भी सुरक्षित है। माता नाथल दाई धाम ऐसा ही एक महत्वपूर्ण लोकआस्था का केंद्र है। ग्रामीणों और बुजुर्गों की मान्यता के अनुसार, यह स्थल पांच सौ वर्ष से अधिक पुराना है। माता नाथल दाई को चंद्रहासिनी देवी की बहन और मां कामाख्या की छोटी बहन के रूप में भी पूजित माना जाता है।
सरगुजा सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में बैगा,गुनिया और देवार समुदाय के लोग पारंपरिक पूजा-पाठ एवं झाड़-फूंक के दौरान मां महामाया और चंद्रहासिनी देवी के साथ माता नाथल दाई का भी आह्वान करते हैं। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर नाथल दाई धाम में हो रही पूजा-अर्चना धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और भाईचारे के महत्व को भी रेखांकित कर रही है। आयोजन में ग्रामवासी, नाथल दाई समिति के सदस्य एवं पदाधिकारी तथा पत्रकारगण उपस्थित रहे।
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