- नई समिति बनी,प्रबंधक नहीं मिला! कंप्यूटर ऑपरेटर के भरोसे बड़गांव की कमान
- समिति का पुनर्गठन,कर्मचारियों की पदस्थापना पर सवाल.जामपारा के बजाय छिंदडांड के ऑपरेटर पर भरोसा क्यों?
- सहकारी समितियों में प्रभार और पदस्थापना पर उठे सवाल, कथित वसूली के आरोपों की जांच की मांग…
- 13 अक्टूबर के आदेश ने खोले सवालः बड़गांव समिति में छिंदडांड के कंप्यूटर ऑपरेटर को मिली प्रबंधकीय जिम्मेदारी
- जामपारा के कर्मचारियों को दरकिनार क्यों? बड़गांव समिति में बाहरी कर्मचारी को प्रबंधकीय जिम्मेदारी
- 13 अक्टूबर के आदेश से कंप्यूटर ऑपरेटर प्रदीप कुमार को अस्थायी प्रबंधकीय जिम्मेदारी
- पुराने कर्मचारियों की स्थिति,चयन के आधार और कथित वसूली के आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया,15 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। सहकारी समितियों के पुनर्गठन और नई समितियों के गठन का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाना तथा किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है, लेकिन जब किसी पुरानी समिति से नई समिति का गठन होता है और वहां प्रबंधकीय कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी उसी प्रभावित समिति के कर्मचारियों के बजाय किसी दूसरी समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर को सौंप दी जाती है, तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े होते हैं, कोरिया जिले में जामपारा समिति के पुनर्गठन के बाद गठित बड़गांव समिति को लेकर ऐसा ही मामला सामने आया है,सहायक आयुक्त सहकारिता कार्यालय, बैकुंठपुर से 13 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश ने इस सवाल को जन्म दिया है कि क्या जामपारा समिति में पहले से कार्यरत सहायक, लिपिक, कंप्यूटर ऑपरेटर या अन्य कर्मचारियों में नई समिति का प्रबंधकीय कार्य संभालने की क्षमता नहीं थी,अथवा विभाग ने किसी दूसरी समिति के कर्मचारी को अस्थायी रूप से जिम्मेदारी सौंपना अधिक उचित समझा?
पुरानी समिति के कर्मचारियों का क्या होगा?-किसी समिति के पुनर्गठन अथवा विभाजन के बाद कर्मचारियों की पदस्थापना और कार्य-विभाजन महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषय होते हैं, यदि जामपारा समिति से बड़गांव समिति का गठन हुआ है, तो यह जानना जरूरी है कि पुरानी समिति में पदस्थ कर्मचारियों की संख्या कितनी थी, उनके पद कौन-कौन से थे, उनकी सेवा स्थिति क्या है और नई समिति में उनकी आवश्यकता का आकलन किस आधार पर किया गया, यदि पुरानी समिति में सहायक, लिपिक,कंप्यूटर ऑपरेटर अथवा प्रबंधकीय कार्यों का अनुभव रखने वाले कर्मचारी उपलब्ध थे,तो क्या उन्हें नई समिति में कार्य करने का अवसर देने पर विचार किया गया? यदि किया गया,तो उसका अभिलेख कहां है? और यदि किसी कर्मचारी को इस जिम्मेदारी के योग्य नहीं पाया गया,तो क्या इसका कोई लिखित मूल्यांकन या आदेश जारी किया गया? इन प्रश्नों का उत्तर संबंधित सेवा अभिलेखों, स्वीकृत पदों,विभागीय निर्देशों और पदस्थापना संबंधी आदेशों से ही मिल सकता है,केवल इस आधार पर कि किसी अन्य समिति के कर्मचारी को जिम्मेदारी दी गई है,यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पुरानी समिति के कर्मचारी अयोग्य हैं,लेकिन विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चयन की प्रशासनिक आवश्यकता और प्रक्रिया क्या थी।
कंप्यूटर ऑपरेटर को प्रबंधकीय जिम्मेदारी देने का आधार क्या?-प्रदीप कुमार को आदेश में कंप्यूटर ऑपरेटर बताया गया है और उन्हें बड़गांव समिति में प्रबंधकीय कार्यों के संपादन के लिए अस्थायी रूप से अधिकृत किया गया है,ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यहां ‘प्रबंधकीय कार्य’ से विभाग का आशय क्या है? क्या उन्हें केवल समिति के प्रारंभिक संचालन,रिकॉर्ड तैयार करने और कार्यालयीन व्यवस्थाओं तक सीमित जिम्मेदारी दी गई है,या समिति प्रबंधक के नियमित दायित्वों का निर्वहन भी उनसे कराया जाना है? क्या उनके पास इन कार्यों के लिए निर्धारित योग्यता,अनुभव और आवश्यक प्रशासनिक अधिकार हैं? क्या आदेश के साथ जिम्मेदारियों की सीमा तय की गई है? कंप्यूटर ऑपरेटर का पद और समिति प्रबंधक का पद अपने आप में एक समान नहीं माने जा सकते, हालांकि किसी कर्मचारी को अतिरिक्त कार्य सौंपना अपने आप में गलत नहीं है, इसकी वैधता संबंधित नियमों,विभागीय आदेशों, कर्मचारी की योग्यता और सौंपे गए अधिकारों पर निर्भर करेगी,इसलिए इस मामले में यह देखना आवश्यक है कि प्रदीप कुमार को किस नियम या प्रशासनिक प्रावधान के तहत अधिकृत किया गया और उनके अधिकारों की सीमा क्या निर्धारित की गई,यदि यह केवल नई समिति की शुरुआती व्यवस्थाओं को संचालित करने के लिए अस्थायी व्यवस्था है,तो विभाग को इसकी अवधि, दायित्व और आगे की नियुक्ति अथवा पदस्थापना की प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए, यदि नियमित समिति प्रबंधक की अनुपस्थिति में यह व्यवस्था की गई है,तो यह भी बताया जाना चाहिए कि नियमित पद की पूर्ति कब और किस प्रक्रिया से होगी।
क्या प्रभावित समिति के प्रबंधक को ही मिलनी चाहिए थी जिम्मेदारी?-इस मामले में एक प्रशासनिक विकल्प पर भी चर्चा जरूरी है, नई समिति यदि किसी पुरानी समिति के पुनर्गठन या विभाजन से अस्तित्व में आई है, तो क्या पुराने अथवा प्रभावित समिति के प्रबंधक को ही नई समिति में अस्थायी रूप से प्रभार दिया जा सकता था? क्या संबंधित कर्मचारी की उपलब्धता,अनुभव और सेवा नियमों की समीक्षा की गई? यह प्रश्न किसी एक कर्मचारी के पक्ष या विपक्ष में नहीं,बल्कि विभागीय व्यवस्था की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है,यदि समान योग्यता और अनुभव वाले कर्मचारी पहले से उपलब्ध थे, तो दूसरे संस्थान से कर्मचारी लाने की आवश्यकता का कारण दर्ज होना चाहिए, वहीं यदि पुरानी समिति के कर्मचारियों को नई समिति में समायोजित करना संभव नहीं था,तो उसका नियमसम्मत आधार भी सामने आना चाहिए,प्रशासनिक निर्णयों में केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं होता। निर्णय के पीछे की आवश्यकता, प्रक्रिया और नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
लाखों रुपये की कथित वसूली के आरोप, प्रमाणों की जांच जरूरी- सहकारिता विभाग में नई समितियों के गठन के बाद कर्मचारियों की पदस्थापना और प्रबंधकीय जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं,आरोप है कि संभाग की विभिन्न समितियों में कर्मचारियों के स्थानांतरण,पदस्थापना और प्रभारी समिति प्रबंधक बनाए जाने के नाम पर कथित तौर पर लाखों रुपये की वसूली की जाती है। आरोपों में संयुक्त आयुक्त सहकारिता,सरगुजा संभाग और जिला स्तर के उप पंजीयक कार्यालय के अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी शामिल है, हालांकि,13 अक्टूबर 2026 का बड़गांव समिति संबंधी आदेश अपने आप में किसी आर्थिक लेन-देन या रिश्वतखोरी को प्रमाणित नहीं करता, ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित कर्मचारियों के बयान,भुगतान के प्रमाण,बैंक लेन-देन,संदेश,नियुक्ति या पदस्थापना से जुड़े अभिलेख और स्वतंत्र जांच आवश्यक होगी, यदि किसी व्यक्ति या अधिकारी के विरुद्ध ठोस साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो उनकी जांच सक्षम एजेंसी से कराई जानी चाहिए। विभाग को भी स्पष्ट करना चाहिए कि पदस्थापना और अतिरिक्त प्रभार देने के लिए क्या कोई निर्धारित प्रक्रिया है तथा उसका पालन किस प्रकार किया गया।
विभाग से उठते हैं ये सीधे सवाल- बड़गांव समिति में प्रदीप कुमार को अस्थायी रूप से प्रबंधकीय कार्य सौंपने का प्रस्ताव किस स्तर से आया और चयन का आधार क्या था? जामपारा समिति में पहले से कार्यरत कर्मचारियों की सूची, पद और सेवा स्थिति की समीक्षा की गई या नहीं? यदि समीक्षा की गई, तो उसका प्रतिवेदन कहां है? कंप्यूटर ऑपरेटर को सौंपे गए प्रबंधकीय कार्यों की सीमा क्या है और क्या उन्हें वित्तीय या अन्य प्रशासनिक अधिकार भी दिए गए हैं? यह व्यवस्था कितने समय तक प्रभावी रहेगी? नई समिति में नियमित प्रबंधकीय व्यवस्था बनाने के लिए विभाग की आगे की योजना क्या है? इसके अतिरिक्त,संभाग में हाल के वर्षों में गठित अन्य समितियों में भी क्या इसी प्रकार दूसरी समितियों के कर्मचारियों को अस्थायी प्रभार दिया गया है? यदि हां,तो क्या सभी मामलों में समान नियम और मानक अपनाए गए? कथित वसूली के आरोपों के संबंध में विभाग के पास कोई शिकायत पहुंची है या नहीं,और यदि पहुंची है तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों का उत्तर आदेश जारी करने वाले कार्यालय और संबंधित उच्च अधिकारियों से अपेक्षित है।
आदेश में क्या लिखा है?
सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, बैकुंठपुर, जिला कोरिया के कार्यालय से जारी आदेश क्रमांक /सारख/2026/511, दिनांक 13 अक्टूबर 2026 के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन सहकारिता विभाग की अधिसूचना क्रमांक एक/एफ-15-11/15-02/2025/30/1068, दिनांक 2 अप्रैल 2025 के तहत प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित जामपारा के पुनर्गठन के पश्चात आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित बड़गांव, पंजीयन क्रमांक 343 का गठन किया गया है, आदेश में कहा गया है कि शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप तथा समिति स्तर पर आवश्यक तैयारियां पूरी करने के उद्देश्य से आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित छिंदडांड के कंप्यूटर ऑपरेटर प्रदीप कुमार को उनके वर्तमान कार्य के अतिरिक्त नवगठित समिति बड़गांव में प्रबंधकीय कार्यों के संपादन के लिए अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक कार्य करने हेतु अधिकृत किया जाता है। आदेश को तत्काल प्रभावशील बताया गया है, यानी दस्तावेज यह स्पष्ट करता है कि बड़गांव समिति में प्रबंधकीय कार्य संचालन के लिए छिंदडांड समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जामपारा समिति के पुराने कर्मचारियों की स्थिति क्या है, उन्हें नई समिति में समायोजित करने पर विचार हुआ या नहीं, अथवा प्रदीप कुमार को इस जिम्मेदारी के लिए चुनने का आधार क्या रहा, यही वे बिंदु हैं जिन पर विभाग से तथ्यात्मक स्पष्टीकरण अपेक्षित है।
व्यवस्था पारदर्शी होगी, तभी भरोसा मजबूत होगा
सहकारी समितियां किसानों की आर्थिक गतिविधियों से सीधे जुड़ी संस्थाएं हैं,उनके गठन, कर्मचारियों की पदस्थापना और प्रबंधकीय कामकाज में स्पष्टता न केवल प्रशासनिक जरूरत है,बल्कि किसानों और समिति सदस्यों के विश्वास के लिए भी आवश्यक है,बड़गांव समिति का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जारी आदेश एक दूसरी समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर को नई समिति में अस्थायी प्रबंधकीय कार्य सौंपने की पुष्टि करता है,जबकि पुरानी समिति के कर्मचारियों की स्थिति और चयन के आधार पर आदेश में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है,यह अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं,लेकिन विभागीय पारदर्शिता की जांच के लिए पर्याप्त प्रश्न जरूर खड़े करता है, अब देखना यह है कि सहकारिता विभाग इस अस्थायी व्यवस्था के पीछे की प्रशासनिक जरूरत,कर्मचारियों के समायोजन की स्थिति और कथित वसूली के आरोपों पर स्पष्ट जानकारी सामने लाता है या नहीं, किसानों से जुड़ी संस्थाओं में व्यवस्था का आधार नियम और पारदर्शिता होना चाहिए—ऐसी प्रक्रिया नहीं, जिस पर हर नए आदेश के साथ नए सवाल खड़े हों।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur