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बिलासपुर@आईपीएस डांगी यौन शोषण केस में आईपीएस पारुल रखेंगी पक्ष

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पीडि़ता की आपत्ति पर बदले गए अफसर,रतन लाल के खिलाफ आरोप पत्र जारी

बिलासपुर,15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के सस्पेंडेड आईपीएस रतन लाल डांगी के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट केस में आरोप पत्र जारी किया गया है। प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद डीजीपी ने हाईकोर्ट में यह जानकारी दी है। इस मामले में पीडि़त महिला की आपत्ति के बाद आईपीएस प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला आईपीएस पारुल माथुर को पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, एडीजी दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया है। दरअसल, इस मामले में पीडि़ता एसआई की पत्नी ने प्राथमिक जांच में पक्षपात का आरोप लगाते हुए रतन लाल डांगी को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया था। पीडि़ता ने किसी महिला आईपीएस अधिकारी से जांच कराने की मांग की थी। पीडि़ता की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और डीजीपी से जवाब मांगा था।
एसआई की पत्नी ने लगाया सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप : दरअसल, पुलिस विभाग में पदस्थ एसआई की पत्नी ने आईपीएस डांगी पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया था। पीडि़ता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि पिछले 7 साल से आईपीएस डांगी उसका शारीरिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं। यौन-उत्पीड़न के आरोपों के बीच आईपीएस डांगी को पद से हटा दिया गया था। गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने इसका आदेश जारी किया था। बाद में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों को रतनलाल डांगी ने झूठा बताया था।
यौन-शोषण का आरोप प्रमाणित, आरोप-पत्र जारी : पीडि़ता के वकील अभिषेक पांडेय ने बताया कि, 14 अक्टूबर को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान डीजीपी ने जवाब में बताया कि, प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद सस्पेंडेड आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया है।
आईपीएस दीपांशु काबरा करेंगे जांच
डीजीपी ने कोर्ट को यह भी बताया कि, एडीजी दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। पूर्व में आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाने की जानकारी दी गई थी,जिस पर पीडि़ता की तरफ से आपत्ति की गई। उनका कहना था कि महिला अपराध से संबंधित इस सेंसिटिव केस की जांच में महिला अफसर की नियुक्ति की जानी चाहिए। उनकी आपत्ति के बाद गृह सचिव ने प्रस्तुतकर्ता अधिकारी आईपीएस प्रशांत अग्रवाल को बदलकर उनकी जगह पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया है। इसके साथ ही गृह सचिव और डीजीपी के जवाब से संतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने केस को निराकृत कर दिया है।


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