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मनेंद्रगढ़@ ग्राम घुटरा के ‘राष्ट्रपति’ नाम वाले व्यक्ति का मामला पहुँचा राष्ट्रपति भवन तक,सौरव मिश्रा की याचिका पर गृह मंत्रालय एवं विधि एवं न्याय विभाग को पत्र

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संवैधानिक पदों एवं राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े नामों के उपयोग को विनियमित करने कानून बनाने की मांग
राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 सितंबर को संबंधित विभागों को भेजा पत्र, प्रधानमंत्री कार्यालय में भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी

-संवाददाता-
मनेंद्रगढ़,15 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम घुटरा में एक व्यक्ति का नाम ‘राष्ट्रपति’ होने से जुड़े प्रकरण को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने देश के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े नामों के उपयोग को विनियमित करने के लिए कानून बनाने की मांग की है, इस संबंध में सौरव मिश्रा द्वारा भेजी गई याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय से कार्रवाई संबंधी पत्र जारी हुआ है,याचिका को भारत सरकार के गृह मंत्रालय एवं विधि एवं न्याय विभाग के ध्यानार्थ भेजा गया है,सौरव मिश्रा के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय में भी इस विषय पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
क्या है पूरा प्रकरण?
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम घुटरा के एक व्यक्ति का उल्लेख किया है, जिसका नाम ‘राष्ट्रपति’ है, याचिका में बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति को अपने नाम के कारण बैंकिंग कार्यों,सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भ्रम एवं कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है,इस प्रकरण को आधार बनाते हुए सौरव मिश्रा ने केंद्र सरकार के समक्ष एक व्यापक नीतिगत विषय उठाया है,उनका कहना है कि संवैधानिक पदों एवं राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े शब्दों का व्यक्तिगत नाम के रूप में उपयोग कुछ परिस्थितियों में व्यावहारिक एवं प्रशासनिक समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है,इसलिए इस विषय पर स्पष्ट नीति और कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए,ताकि भविष्य में नागरिकों को ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को भेजा गया था पत्र
सौरव मिश्रा ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए भारत के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को अलग-अलग पत्र भेजकर केंद्र सरकार से आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया था,अपनी याचिका में उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श करे तथा आवश्यकता के अनुसार ऐसा विधेयक अथवा कानूनी प्रावधान लाए,जिसमें संवैधानिक पदों एवं राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े नामों के उपयोग के संबंध में स्पष्ट नीति निर्धारित की जा सके, याचिका में ‘राष्ट्रपति’, ‘प्रधानमंत्री’, ‘मुख्यमंत्री’, ‘राज्यपाल’ तथा ‘भारत’ जैसे नामों का उल्लेख करते हुए इनके उपयोग से संबंधित नियमों को स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है।
राष्ट्रपति सचिवालय से आया महत्वपूर्ण पत्र
इस मामले में राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार,याचिका क्रमांक पी1/बी/202609162221 के तहत दिनांक 17 सितंबर 2026 को संबंधित विषय भारत सरकार के गृह मंत्रालय के गृह सचिव तथा विधि एवं न्याय विभाग के संयुक्त सचिव के ध्यानार्थ भेजा गया है,पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि राष्ट्रपति को संबोधित दिनांक 8 अगस्त 2026 की याचिका उचित ध्यान देने के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजी जा रही है,साथ ही, याचिका पर की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को दिए जाने का उल्लेख भी किया गया है, राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त इस पत्र के माध्यम से याचिका संबंधित केंद्रीय विभागों तक पहुँची है,अब इस विषय पर संबंधित विभागों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई एवं उनके निर्णय की प्रतीक्षा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में भी कार्रवाईकी प्रक्रिया जारी
सौरव मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस विषय को प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष भी रखा है, उनके अनुसार, वहाँ भी इस मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है, उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि ग्राम घुटरा के इस प्रकरण के माध्यम से सामने आई प्रशासनिक कठिनाइयों की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करना और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग करना है।
केंद्र सरकार से स्पष्ट कानून एवं नीति बनाने की मांग…
सौरव मिश्रा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि संवैधानिक पदों एवं राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े नामों के उपयोग के संबंध में मौजूदा कानूनी व्यवस्था की समीक्षा की जाए,आवश्यकता होने पर संबंधित विषय पर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर स्पष्ट कानूनी प्रावधान तैयार किए जाएँ,उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के साथ-साथ सरकारी दस्तावेजों,बैंकिंग प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक भ्रम की स्थिति से बचना भी महत्वपूर्ण है,यदि किसी नाम के कारण किसी नागरिक को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,तो ऐसी परिस्थितियों के समाधान के लिए उपयुक्त प्रशासनिक व्यवस्था एवं कानूनी स्पष्टता पर विचार किया जाना चाहिए,उन्होंने यह भी आग्रह किया कि प्रस्तावित नियम बनाते समय नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों,नाम रखने की स्वतंत्रता तथा संवैधानिक पदों की गरिमा के बीच उचित संतुलन सुनिश्चित किया जाए।
सौरव मिश्रा बोले-जनहित में स्पष्ट व्यवस्था बनाना आवश्यक
सौरव मिश्रा ने कहा कि ग्राम घुटरा का यह मामला एक महत्वपूर्ण नीतिगत प्रश्न को सामने लाता है, इस विषय पर केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए,ताकि भविष्य में किसी नागरिक को अपने नाम के कारण बैंकिंग,सरकारी अभिलेखों या प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े,उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय एवं विधि एवं न्याय विभाग द्वारा इस विषय पर उचित विचार-विमर्श किया जाएगा और जनहित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे।


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