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अंबिकापुर@ हाइवे पर हाट बाजार का कब्जा…थम गई वाहनों की रफ्तार

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  • हाट बाजार ने रोक देती है हाइवे की रफ्तार,अजिरमा में रविवार जाम का खतरा
  • अजिरमा में सड़क तक सजी दुकानें और बेतरतीब पार्किंग बनी जाम की वजह…राहगीर परेशान-हादसे के खतरे के बीच स्थायी समाधान की मांग…
  • हाइवे पर दुकानें,सड़क पर पार्किंग… अजिरमा में थम गई रफ्तार
  • अजिरमा हाट बाजार बना यातायात का ‘चक्रव्यूह’,हाइवे पर वाहनों की कतार
  • दुकानों ने घेरा हाइवे,पार्किंग ने बढ़ाई मुश्किल-अजिरमा में यातायात बेहाल
  • अजिरमा हाट में बाजार से ज्यादा दिखता है जाम, हाइवे पर हर कदम खतरा
  • हाइवे पर सजता बाजार,फंसता यातायात-अजिरमा में व्यवस्था पर सवाल


-संवाददाता-
अंबिकापुर,07 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
जिला मुख्यालय से महज 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अजिरमा का साप्ताहिक हाट बाजार रविवार के दिन स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है,सप्ताह में एक दिन लगने वाला यह बाजार आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए खरीदारी और छोटे व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र है,लेकिन बाजार के दिन सड़क किनारे बढ़ती भीड़,हाईवे की पटरियों तक फैली दुकानें और बेतरतीब तरीके से खड़े किए जाने वाले वाहनों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बनती है। बाजार के दिन सड़क के दोनों ओर सब्जी,फल,कपड़े,घरेलू सामान,किराना सहित अलग-अलग तरह की दुकानें लगती हैं, कई स्थानों पर दुकानों का फैलाव सड़क के मुहाने तक पहुंच जाता है,दूसरी ओर बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोग अपने दोपहिया और चारपहिया वाहनों को सड़क किनारे या दुकानों के सामने खड़ा कर देते हैं,इससे हाईवे पर वाहनों के लिए उपलब्ध जगह कम हो जाती है,सामान्य दिनों की तुलना में बाजार के दिन यातायात दबाव बढ़ने के कारण कई बार वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ती है और जाम जैसी स्थिति निर्मित होने की शिकायत सामने आती है।
हाईवे की चौड़ाई सिमटने से वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक-अजिरमा का साप्ताहिक हाट स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है,आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां सामान खरीदने और बेचने पहुंचते हैं, छोटे व्यापारी और ग्रामीण अपनी उपज सहित अन्य सामान लेकर बाजार में आते हैं,ऐसे में बाजार क्षेत्र में लोगों और वाहनों की आवाजाही स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है,समस्या तब गंभीर हो जाती है जब सड़क की पटरियों और आसपास उपलब्ध स्थान के बजाय दुकानें हाईवे के नजदीक तक पहुंच जाती हैं,ग्राहकों के वाहन भी सड़क के किनारे खड़े होने लगते हैं, एक ओर दुकानें और दूसरी ओर पार्क किए गए वाहन होने से सड़क का उपयोग करने वाले वाहनों के लिए जगह सीमित हो जाती है, छोटे वाहन किसी तरह निकल जाते हैं,लेकिन बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों के गुजरने के दौरान स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। कई जगह वाहन चालकों को गति कम करनी पड़ती है, सामने से आने वाले वाहनों के साथ जगह बनाने में भी परेशानी होती है, परिणामस्वरूप बाजार क्षेत्र में यातायात की गति प्रभावित होती है।
एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को लेकर चिंता-बाजार क्षेत्र में यातायात प्रभावित होने का सबसे गंभीर पहलू आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा है,यदि बाजार के समय किसी कारण से सड़क पर लंबा जाम लग जाता है तो एम्बुलेंस,दमकल या अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता बनाना मुश्किल हो सकता है,आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीज के लिए समय बेहद महत्वपूर्ण होता है,ऐसे में बाजार क्षेत्र में किसी भी स्थिति में ऐसा स्थान उपलब्ध रहना चाहिए,जहां से आपातकालीन वाहन बिना बाधा गुजर सकें,स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार को हटाना या छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित करना समस्या का एकमात्र समाधान नहीं है,जरूरत ऐसी व्यवस्था बनाने की है,जिसमें व्यापारियों को कारोबार की जगह मिले और हाईवे का आवागमन भी बाधित न हो।
सप्ताह में एक दिन लगता है बाजार, पहले से बनाई जा सकती है व्यवस्था- स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि अजिरमा में हाट बाजार सप्ताह में एक निर्धारित दिन लगता है, ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभाग के पास बाजार वाले दिन के लिए पहले से यातायात प्रबंधन की योजना बनाने का अवसर रहता है,बाजार शुरू होने से पहले दुकानों के स्थान निर्धारित किए जा सकते हैं,सड़क से निश्चित दूरी तक किसी भी दुकान को नहीं लगाने की व्यवस्था की जा सकती है, इसी तरह बाजार में आने वाले वाहनों के लिए अलग पार्किंग स्थल तय किया जा सकता है, यदि बाजार के दिन यातायात पुलिस अथवा संबंधित अमले की आवश्यकतानुसार तैनाती की जाए तो सड़क पर दुकानों के फैलाव और बेतरतीब पार्किंग को नियंत्रित किया जा सकता है, इससे वाहन चालकों को भी परेशानी कम होगी और बाजार आने वाले लोगों को भी सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।
दुकानदारों की भी मजबूरी,कार्रवाई के बजाय विकल्प जरूरी-सड़क किनारे दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारी और ग्रामीण दुकानदार इस बाजार से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, सप्ताह में एक दिन लगने वाला हाट उनके लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है, ऐसे में केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर समस्या का समाधान करना स्थायी रास्ता नहीं माना जा सकता,जरूरत इस बात की है कि प्रशासन बाजार की वास्तविक स्थिति का आकलन करे और दुकानदारों के लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराए,यदि हाईवे से कुछ दूरी पर पर्याप्त जगह चिन्हित कर हाट बाजार विकसित किया जाता है तो दुकानदारों को भी स्थायी सुविधा मिल सकती है,इसके साथ ही बाजार क्षेत्र में पैदल चलने वालों के लिए स्थान, वाहनों के लिए पार्किंग और दुकानों के लिए निर्धारित क्षेत्र तय किया जा सकता है, इससे व्यापार भी जारी रहेगा और हाईवे पर यातायात व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी।
वैकल्पिक हाट बाजार स्थल की उठ रही मांग-स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों की मांग है कि अजिरमा में लगने वाले साप्ताहिक बाजार के लिए सुरक्षित और पर्याप्त स्थान चिन्हित किया जाए। बाजार को हाईवे से पर्याप्त दूरी पर व्यवस्थित किया जाए ताकि मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित न हो, लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन,यातायात पुलिस और स्थानीय निकाय मिलकर बाजार का सर्वे कर लें तो समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है,इसके लिए बाजार क्षेत्र की उपलब्ध जमीन,दुकानदारों की संख्या, ग्राहकों की संख्या और पार्किंग की आवश्यकता का आकलन किया जाना जरूरी है।
नो-पार्किंग और यातायात नियंत्रण से मिल सकती है राहत
बाजार स्थल के आसपास नो-पार्किंग क्षेत्र निर्धारित करना भी तत्काल राहत देने वाला कदम हो सकता है,हाईवे के दोनों ओर निर्धारित दूरी तक वाहनों की पार्किंग रोकने के साथ ग्राहकों के लिए अलग पार्किंग स्थल उपलब्ध कराया जाए तो सड़क पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है,इसी तरह बाजार के दिन दुकानों को सड़क की सीमा से पीछे रखने, पैदल आवागमन के लिए पर्याप्त जगह छोड़ने और भारी वाहनों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती—व्यापार भी चले,यातायात भी-अजिरमा हाट बाजार की समस्या को केवल जाम अथवा अतिक्रमण के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा, एक तरफ छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों की आजीविका जुड़ी है तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले हजारों यात्रियों और वाहन चालकों की सुरक्षा का सवाल है, इसलिए समाधान ऐसा होना चाहिए,जिसमें किसी एक पक्ष को नुकसान न हो, बाजार के लिए अलग और व्यवस्थित स्थल उपलब्ध कराया जाए, दुकानदारों को निश्चित स्थान मिले,ग्राहकों के लिए पार्किंग की सुविधा हो और हाईवे को पूरी तरह यातायात के लिए खुला रखा जाए।
समय रहते नहीं चेते तो बढ़ सकती है परेशानी-अजिरमा हाट बाजार में वर्तमान व्यवस्था यदि इसी तरह चलती रही तो आने वाले समय में यातायात का दबाव और बढ़ सकता है,सड़क किनारे दुकानें,बढ़ती भीड़ और बेतरतीब पार्किंग का संयोजन सड़क सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है, स्थानीय लोगों की मांग है कि किसी दुर्घटना या बड़ी जाम की स्थिति बनने का इंतजार करने के बजाय प्रशासन अभी से ठोस कदम उठाए,बाजार के लिए सुरक्षित स्थान,पार्किंग व्यवस्था,नो-पार्किंग जोन और बाजार वाले दिन यातायात नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं तत्काल प्रभाव से लागू की जा सकती हैं, लोगों का कहना है कि मुद्दा बाजार बंद कराने का नहीं,बल्कि बाजार को व्यवस्थित कराने का है, यदि प्रशासन दुकानदारों और स्थानीय लोगों से चर्चा कर व्यावहारिक समाधान तैयार करता है तो व्यापारियों की आजीविका भी सुरक्षित रह सकती है और हाईवे पर वाहनों की रफ्तार भी बनी रह सकती है।
सड़क पर अचानक पहुंचते हैं ग्राहक,बढ़ता है खतरा
हाईवे पर सबसे बड़ी चिंता सड़क सुरक्षा को लेकर है, बाजार में खरीदारी करने आए लोग दुकान से दूसरी दुकान तक जाने के दौरान कई बार सड़क के काफी करीब पहुंच जाते हैं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी बाजार में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं,दूसरी तरफ हाईवे से लगातार छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती रहती है,ऐसी स्थिति में वाहन चालक को अचानक सामने आए व्यक्ति या वाहन से बचने के लिए ब्रेक लगाना पड़ सकता है, यदि पीछे से कोई दूसरा वाहन तेज गति से आ रहा हो तो स्थिति जोखिमपूर्ण हो सकती है,विशेष रूप से भारी वाहनों की मौजूदगी में सड़क किनारे पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही अतिरिक्त सावधानी की मांग करती है,बाजार क्षेत्र में यातायात को लेकर कोई छोटी सी चूक भी दुर्घटना का कारण बन सकती है,यही वजह है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या को गंभीर रूप लेने से पहले बाजार और यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने की जरूरत है।
बेतरतीब पार्किंग भी बनी बड़ी समस्या
अजिरमा हाट बाजार में केवल दुकानों का सड़क तक फैलना ही परेशानी का कारण नहीं है,बल्कि ग्राहकों और दुकानदारों द्वारा वाहनों को निर्धारित स्थान के अभाव में जहां जगह मिली,वहां खड़ा कर देना भी यातायात व्यवस्था को प्रभावित करता है,चारपहिया वाहन सड़क किनारे खड़े होने के बाद सड़क की चौड़ाई और कम हो जाती है,दोपहिया वाहन भी यदि व्यवस्थित तरीके से खड़े न हों तो पैदल चलने वालों और अन्य वाहनों के लिए परेशानी पैदा करते हैं,बाजार समाप्त होने तक वाहनों की आवाजाही और पैदल लोगों की भीड़ बनी रहती है, यदि बाजार के लिए पहले से पार्किंग क्षेत्र तय कर दिया जाए और वहां वाहनों को खड़ा कराने की व्यवस्था की जाए तो सड़क पर होने वाली भीड़ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें…
हाईवे से पर्याप्त दूरी पर साप्ताहिक हाट बाजार के लिए सुरक्षित स्थान चिन्हित किया जाए।
बाजार में आने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग पार्किंग स्थल बनाया जाए।
बाजार वाले दिन हाईवे के दोनों ओर नो-पार्किंग व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू की जाए।
आवश्यकता के अनुसार यातायात पुलिस या संबंधित अमले की तैनाती की जाए।
दुकानों को हाईवे और सड़क के मुहाने से पर्याप्त दूरी पर व्यवस्थित किया जाए।
छोटे व्यापारियों के लिए वैकल्पिक वेंडिंग जोन अथवा निर्धारित बाजार क्षेत्र विकसित किया जाए।
बाजार क्षेत्र में एम्बुलेंस,दमकल और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता हर समय खुला रखा जाए।
बाजार व्यवस्था को लेकर प्रशासन, दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों के बीच समन्वय से स्थायी समाधान तैयार किया जाए।


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