ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लेकर आ रही ईडी,940 करोड़ की प्रॉपर्टी की थी जब्त
रायपुर,14 जुलाई 2026। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े मनी लॉन्डि्रंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। सिंडिकेट से जुड़े कारोबारी विकास गर्ग को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने विकास गर्ग को 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर ईडी को सौंप दिया है। एडिशनल सेशंस जज विजय शंकर ने गर्ग को रायपुर लाकर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में पेश करने की अनुमति दी है। ईडी की टीम विकास गर्ग को रायपुर लेकर आ रही है। बुधवार को उसे रायपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में पेश किया जाएगा। कस्टोडियल रिमांड की मांग की जाएगी। ईडी अब विकास गर्ग से महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े कथित मनी लॉन्डि्रंग नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों के संबंध में पूछताछ करेगी। बता दें कि पिछले दिनों ईडी ने विकास गर्ग की 940 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त की थी।
हर महीने 450 करोड़ से ज्यादा का अवैध कारोबार : ईडी ने इस मामले की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस के दुर्ग जिले में दर्ज एफआईआर, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में दर्ज मामलों के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट विदेश से संचालित फ्रेंचाइजी आधारित ‘पैनल नेटवर्क’ के जरिए काम कर रहा था। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क से हर महीने 450 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई हो रही थी।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई : ईडी ने बताया कि इस मामले में इससे पहले 7 बार संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। वहीं, एजेंसी रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में कई अभियोजन शिकायतें भी दाखिल कर चुकी है। अदालत धन शोधन (मनी लॉन्डि्रंग) के मामले में संज्ञान भी ले चुकी है।
अब तक 3800 करोड़ की संपत्ति अटैच : इस कार्रवाई से पहले ईडी इस मामले में करीब 2,825 करोड़ रुपए की चल-अचल और विदेशी संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज कर चुकी थी। महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज बेटिंग मामले में कुर्क, जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर लगभग 3,800 करोड़ रुपए पहुंच गया है। ईडी का कहना है कि मामले में मनी लॉन्डि्रंग के पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी भी जारी है।
शेल कंपनियों के जरिए किया गया मनी लॉन्डि्रंग
जांच में ईडी को पता चला कि अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए पैसे को कैश के बदले फर्जी कंपनियों और कई स्तर के वित्तीय लेन-देन के जरिए वैध दिखाया गया। एजेंसी के मुताबिक, अपराध से कमाए गए करीब 940.77 करोड़ रुपए विकास गर्ग के नियंत्रण वाली कंपनियों में पहुंचाए गए। बाद में इस रकम से शेयर, निवेश और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं।
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