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नई दिल्ली@केंद्रीय गृह मंत्रालय का बड़ा बयान,भ्रष्टाचार-रोधी बिलों का मकसद गैर-बीजेपी सरकारों को कमजोर करना नहीं

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नई दिल्ली,14 जुलाई 2026। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भ्रष्टाचार विरोधी प्रस्तावित बिलों को लेकर विपक्ष की चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने संसदीय समिति को स्पष्ट किया है कि इन कानूनों का उद्देश्य गैर-बीजेपी सरकारों को कमजोर करना या संघवाद को बाधित करना नहीं है। गृह मंत्रालय के अनुसार,यदि कोई प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है,तो उसे अपने कार्यकारी पद से हटना होगा,लेकिन उसकी विधायी सदस्यता बरकरार रहेगी।
मंत्रालय का तर्क है कि इससे सरकार की स्थिरता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि पद से हटाए गए व्यक्ति की जगह उसी पार्टी या गठबंधन का कोई अन्य सदस्य ले सकता है। मंत्रालय ने समिति को बताया कि इस प्रावधान से लोकतांत्रिक जनादेश पूरी तरह ‘अप्रभावित’ रहता है। प्रस्तावित बिल के तहत, लंबे समय तक हिरासत में रहने वाले नेता का पद स्वतः ही रिक्त हो जाएगा, लेकिन संबंधित पार्टी को अपना नया नेता चुनने का पूरा अवसर होगा जिसे सदन में बहुमत का समर्थन प्राप्त हो। सूत्रों के अनुसार, संसद की संयुक्त समिति इस रिपोर्ट को जल्द अपना सकती है और इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया जा सकता है। यह बिल सुनिश्चित करेगा कि यदि कोई नेता आधिकारिक कार्यों के निर्वहन में असमर्थ है, तो शासन व्यवस्था में गतिरोध पैदा न हो। गृह मंत्रालय ने इन बिलों के औचित्य को सही ठहराते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जो राष्ट्रीय और राज्य के मामलों को सीधे प्रभावित करता है। यदि कोई नेता लंबे समय तक हिरासत में रहता है, तो इससे उनकी कार्यकारी भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभाने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है, जिससे शासन ठप हो सकता है। मंत्रालय का मानना है कि यह प्रावधान जन-इच्छा को नकारता नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि शासन प्रभावी और भरोसेमंद बना रहे। संविधान द्वारा प्रदत्त जवाबदेही तंत्र के माध्यम से नए चुनावों के बिना भी नेतृत्व में बदलाव संभव है। बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त समिति के समक्ष विपक्षी दलों ने आशंका जताई थी कि यह बिल चुनावों के जरिए व्यक्त जन-इच्छा को कमजोर करेगा।


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