


- वासेपुर कनेक्शन की परतें खोलने की मांग…साबिर,जावेद के बाद अब साकिब अफजल उर्फ ‘नेता’ का नाम भी चर्चा में…
- क्या छत्तीसगढ़ बन रहा है अंतरराज्यीय अपराधियों की शरणस्थली? अंबिकापुर की घटनाओं ने खड़े किए बड़े सवाल…
- कारोबारी गठजोड़ और संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की उठी मांग…
- अंबिकापुर कनेक्शन की पड़ताल…
- दूसरे राज्यों के वांछित आरोपियों की मौजूदगी के दावों पर उठी निष्पक्ष जांच की मांग…
- अंबिकापुर में अपराध नेटवर्क की आशंका या अफवाह? अब निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा सच..
- अंतरराज्यीय अपराध और अंबिकापुरः क्या कानून से बचने वालों का नया ठिकाना बन रहा है शहर?
- क्या अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन रहा है अंबिकापुर? जांच की मांग के बीच उठे कई अहम सवाल
- रोजगार की तलाश में आने वाले मेहनतकश प्रवासियों और कानून से बचने के लिए छिपने वाले आरोपितों के बीच फर्क करना प्रशासन की जिम्मेदारी
-संवाददाता-
अंबिकापुर,14 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। झारखंड के बहुचर्चित वासेपुर से जुड़े फरार आरोपियों के कथित तौर पर अंबिकापुर में शरण लेने और स्थानीय कारोबार से जुड़े होने के दावों के बीच अब एक और नाम चर्चा में है, शिकायतकर्ताओं और कुछ स्थानीय सूत्रों का दावा है कि साबिर आलम और जावेद आलम के अलावा साकिब अफजल उर्फ ‘नेता’ भी वर्षों से अंबिकापुर में रहकर एक स्थानीय कारोबारी के साथ विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन कर रहा है,हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही पुलिस अथवा किसी जांच एजेंसी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है,सूत्रों के अनुसार,साकिब अफजल उर्फ नेता झारखंड के कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित रहा है और झारखंड में उसके विरुद्ध कार्रवाई होने के बाद वह वर्षों पहले अंबिकापुर आ गया,आरोप है कि उसने अपनी पहचान बदलकर स्थानीय स्तर पर कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे परिवहन तथा अन्य व्यवसायों में सक्रिय हो गया।
समीम ट्रांसपोर्ट से लेकर न्यू समीम ट्रांसपोर्ट तक की कहानी…
समीम ट्रांसपोर्ट का मालिक अंगूठा छाप बैतूल पहले कुछ गाडि़यां चलाकर किसी तरह अपना जीवन यापन करता था,इसी बीच वासेपुर का साबिर और जावेद आलम के अलावा एक और चर्चित गैंगस्टर नेता जिस पर सात आठ मर्डर का आरोपी है,झारखंड पुलिस का लगातार उसे पर दबाव बढ़ता देख वह भी करीब 15 वर्ष पूर्व बैतूल के शरण में आ गया,और आज भी बैतूल के साथ सभी गाडि़यों में पार्टनरशिप में यात्री बस संचालन का काम करता रहा,बताया जाता है कि जिस दिन से गैंगस्टरो ने बैतूल का हाथ थामा तब से बैतूल के नाम पर एसईसीएल में एम्बुलेंस,इनोवाकार व बस अटैच कर करोड़ों रुपए फर्जी ढंग से कमाई की, सूत्र ये भी बताते है की बंदूक और कट्टा के दम पर जो बसे एसईसीएल में लगी रहती थी,उन्हें यह लोग सवारी ढोने में भी चलाते थे जिसकी जांच की जाए तो बड़ा खुलासा होगा, खबर यह भी है कि जब कोई जांच आती थी तो रूट की गाडि़यां कंपनी में चली जाती थी इस तरह से कंपनी के अधिकारीयों और नेता, उसके पार्टनर बैतूल मिलकर कोयला कंपनी में करोड़ों रुपए का डाका डाला है, जिसकी पूरी खबर अगले अंक में विस्तार से प्रकाशित की जाएगी…।
सीसीटीवी फुटेज मिटाने के आरोप, साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका…
घटनाक्रम से जुड़े कुछ सूत्रों और शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिस मोहल्ले में कथित रूप से झारखंड पुलिस की कार्रवाई के दौरान साबिर आलम को छुड़ाए जाने की घटना हुई थी जो सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी पर पुलिस उस तक पहुचती उसे पहले ही डिलीट करा दिया गया,18 सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्ड डिलीट होने का दावा,घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस मोहल्ले में यह घटना हुई,वहां लगे करीब 18 सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्ड बाद में कथित रूप से डिलीट दिया गया,मुख्य आरोपी की भूमिका और धमकाने के आरोप,सूत्रों के अनुसार,इस पूरे मामले को दबाने या पटाक्षेप करने में‘बैतूल का भांजा’इरशाद नामक व्यक्ति ने मुख्य भूमिका निभाई,आरोप है कि उसने लोगों को प्रेम से समझाया और कुछ लोगों को अपने गैंगस्टर परिवार का हवाला देकर धमकाया,जिसके दबाव में अपराधियों के सजायाफ्ता करीबियों ने कैमरों का रिकॉर्ड मिटा दिया,कानून के मुताबिक,किसी अपराधी को बचाना या अपराध के साक्ष्य मिटाना भी एक गंभीर अपराध है,यदि यह दावा सच साबित होता है,तो साबिर आलम को छुड़ाने वाले अपराधियों के साथ-साथ फुटेज डिलीट करने और करवाने वाले दोनों ही पक्ष कानूनन अपराधी माने जाएंगे,शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह केवल साक्ष्य से छेड़छाड़ का मामला नहीं है,बल्कि पुलिस जांच को भटकाने और प्रभावित करने की एक गंभीर व संगठित कोशिश है,आरोप है कि घटना के शुरुआती दिनों में पुलिस की कार्रवाई में तेजी नहीं थी, जिसकी वजह से संबंधित लोगों को साक्ष्यों को नष्ट करने और उनसे छेड़छाड़ करने का पर्याप्त अवसर मिल गया,फिलहाल सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए जाने के इन दावों की पुलिस या किसी जांच एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही फुटेज बरामद हुए हैं। अब पूरी निगाहें सरगुजा पुलिस की जांच पर टिकी हैं कि क्या वे इस साक्ष्य छेड़छाड़ की सत्यता का पता लगाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कड़ी कार्रवाई कर पाती है या नहीं।
15 साल से झारखंड से भागा साकिब अफजल की भूमिका को लेकर भी उठे सवाल-बैतूल और उसके सहयोगियों के फरार होने के बाद पूरे धंधे की कमान साकिब अफजल उर्फ नेता ही संभाल रहा है,झारखंड में इसके घर पर कुर्की होने के बाद यह अपना नाम बदलकर यहां बैतूल के साथ कंधे में कंधा मिलाकर पूरी दमदारी से पैसा कमा रहा है…वह भी पिछले 15 साल से झारखंड से भागा है अंबिकापुर शहर में दो से तीन होटल संचालित करता है अपनी सुरक्षा के मद्देनजर रखते हुए, लाल माटी के में जंगल किनारे आलीशान घर बनाकर निवास करता है,अभी भी इसकी खोज में झारखंड पुलिस दस्तक देती रहती है,जब पुलिस आती है तो भाग जाता है, इसका भी बैतूल के नाम पर कोयला कंपनी में गाडि़यों का कारोबार संचालित है शुरुआती दिनों में बैतूल से अपना बॉडीगार्ड बन कर रखा था,फिर धीरे-धीरे इस धंधे में उतार लिया बताया जाता है कि लंबे समय तक इसके पास झारखंड से वसूली का पैसा आता रहा है।
टेंडर हथियाने के लिए भय का माहौल बनाना,आदर्श कंपनी को निशाना बनानाः सूत्रों का दावा है कि परिवहन और एंबुलेंस संचालन से जुड़े टेंडरों के दौरान स्थानीय कारोबारियों और प्रतिस्पर्धी कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया से दूर रखने के लिए जानबूझकर डर का माहौल बनाया गया,क्षेत्र की एक सम्मानित व्यावसायिक संस्था ‘आदर्श कंपनी’,जो एसईसीएल में लंबे समय से इनोवा, बस और एंबुलेंस जैसी गाडि़यों का टेंडर लेती आ रही थी,उसके काम को हथियाने की साजिश रची गई,आरोप है कि बैतूल की शह पर उसके साथियों (साबिर और नेता) ने इस काम को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया,आरोप है कि आरोपियों ने झारखंड के आपराधिक तौर-तरीकों का इस्तेमाल करते हुए बंदूक के दम पर कोयला प्रबंधन के अधिकारियों को अपने नियंत्रण में ले लिया,इसके बाद टेंडर बॉक्स से आदर्श कंपनी के सभी टेंडर लिफाफों को जबरन निकाल कर फाड़ दिया गया, दावा है कि आदर्श कंपनी के मैनेजर के सामने हवाई फायरिंग की गई और टेंडर के दस्तावेजों को वहीं जला दिया गया, आरोपी ‘नेता’ ने मैनेजर को सीधे तौर पर धमकी दी कि अगली बार गोली उसके सीने में लग सकती है, और उसे दोबारा इस क्षेत्र में टेंडर न डालने की सख्त चेतावनी दी गई, विश्रामपुर और बैकुंठपुर में एंबुलेंस संचालन से आदर्श कंपनी को जबरन बाहर करने के लिए आरोपियों ने बार-बार ‘वासेपुर’ के आपराधिक घटनाक्रमों का जिक्र किया,उन्होंने अपनी दहशत कायम करने के लिए मैनेजर से कहा कि अगर उनके बारे में ज्यादा जानना है,तो धनबाद जाकर उनके नाम का पता कर लें,सूत्रों के अनुसार, ये सभी आरोपी झारखंड में एक साथ अपराध करते थे, अतीत में जब बैतूल और उसके भाई ने स्थानीय मालिकों पर बम से हमला (बम कांड) किया था,तब नेता, साबिर और जावेद उसके शूटर के रूप में आए थे। आरोपी नेता पर आए दिन अवैध बंदूक दिखाकर लोगों को डराने-धमकाने का भी आरोप है, वर्तमान में आरोपियों के सोना और बड़ी मात्रा में नकदी लेकर फरार होने की खबर है,सूत्रों का यह भी दावा है कि यदि पुलिस आरोपियों के ठिकानों और घरों की बारीकी से तलाशी ले, तो वहां झारखंड से लाए गए भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद हो सकते हैं।
व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और विवादों के बाद सामने आने लगी सूचनाएं-स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ जानकारियां वर्षों तक सार्वजनिक चर्चा में नहीं थीं और हाल के व्यापारिक विवादों तथा अन्य घटनाओं के बाद सामने आने लगी हैं। यदि ऐसा है, तो यह भी जांच का विषय है कि क्या संबंधित सूचनाएं पहले कभी प्रशासन या पुलिस तक पहुंची थीं और उन पर क्या कार्रवाई हुई।
अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की जरूरत-कानून-व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि आज के समय में राज्यों के बीच अपराधियों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है, यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध दूसरे राज्य में गंभीर मामला लंबित है,तो समय पर जानकारी का आदान-प्रदान और सत्यापन कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए आवश्यक है।
सार्वजनिक चर्चा में आए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक…
हाल के दिनों में कुछ शिकायतकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि यदि किसी व्यक्ति के बारे में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, तो पुलिस और अन्य सक्षम एजेंसियां उन सभी दावों की निष्पक्ष जांच करें,यदि आरोप निराधार हों, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए,और यदि किसी स्तर पर कानून का उल्लंघन हुआ हो,तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए।
संरक्षण के आरोप,निष्पक्ष जांच की उठी मांग…
सरगुजा पुलिस को इसमामले में बड़ी ईमानदारी से काम करना चाहिए,ताकि सरगुजा का सौम्या और शांत वातावरण बर्बाद ना हो सके,बैतूल अपने अलावा लगभग दो दर्जन लोगों को यहां शरण दे रखा है,जो कहीं ना कहीं दूसरे प्रदेश के कई मामलों में अपराधी हैं समय-समय पर वह यहां से पेशी के लिए जाते रहते हैं, जैसा बैतूल वैसे और भी अपराधी यहां बसने के फिराक में है क्यों ने झारखंड और बिहार का काला धन लाकर क्षेत्र में कई स्थानों पर जमीन भी खरीद लिया है और धीरे-धीरे निर्माण कार्य शुरू कर दिए हैं सूत्रों के अनुसार स्थानीय पार्षद की स्थिति संदिग्ध है पार्षद सजातीय होने के कारण इन बाहरी सामाजिक तत्वों को शरण देने का काम कर रहा है,कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने प्रभाव और परिचय का हवाला देकर लोगों पर दबाव बनाया, हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है,स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि यदि किसी ने किसी आरोपी को कानून से बचाने,साक्ष्य नष्ट करने या जांच में बाधा डालने का प्रयास किया है, तो उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए। कानून के जानकारों का कहना है कि यदि जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं,तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध साक्ष्य से छेड़छाड़ या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है,समाचार लिखे जाने तक जिन व्यक्तियों के संबंध में आरोप लगाए गए हैं,उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है, पुलिस या संबंधित व्यक्तियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
फरार आरोपियों को संरक्षण मिलने के आरोप…
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने झारखंड से आए फरार आरोपियों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण दिया,उनका कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
पुलिस जांच से उठेंगी कई परतें…
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी फरार आरोपी को जानबूझकर शरण दी गई हो,साक्ष्य नष्ट करने में सहायता की गई हो या अपराधियों को संरक्षण दिया गया हो,तो ऐसे मामलों में संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है,लेकिन यह सब केवल सक्षम जांच एजेंसी की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
सभी पक्षों का पक्ष आना जरूरी…
समाचार में जिन व्यक्तियों और कारोबारों का उल्लेख आरोपों के संदर्भ में किया गया है,उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है, उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
उठ रहे अहम सवाल…
क्या झारखंड से जुड़े वांछित आरोपी लंबे समय तक अंबिकापुर में सक्रिय रहे?
क्या किसी स्थानीय नेटवर्क ने उन्हें संरक्षण प्रदान किया?
एसईसीएल से जुड़े परिवहन कार्यों और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों में कितनी सच्चाई है?
क्या कथित सीसीटीवी रिकॉर्ड हटाने के दावों की जांच होगी?
क्या पुलिस या अन्य सक्षम एजेंसी इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी?
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