नक्सल क्षेत्र भेजे गए सोनहत के थाना प्रभारी,नौगई हत्याकांड के बाद तबादला बना चर्चा का विषय
सरकार बोली नक्सलवाद अंतिम दौर में…सोनहत के निरीक्षक पहुंचे नारायणपुर,तबादले पर उठी नई चर्चा
क्या अब निष्पक्ष होगी नौगई हत्याकांड की विवेचना? सोनहत थाना प्रभारी के तबादले से बढ़ीं उम्मीदें
रवि सिंह
कोरिया,09 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निरीक्षकों की तबादला सूची में राज्यभर के 64 निरीक्षकों के स्थानांतरण किए गए हैं,इस सूची में कोरिया जिले के सोनहत थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद पासवान का स्थानांतरण नक्सल प्रभावित जिले नारायणपुर किया गया है। राज्यभर में जारी इस स्थानांतरण आदेश को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया माना जा रहा है,लेकिन कोरिया जिले में सोनहत थाना प्रभारी के तबादले ने अलग ही चर्चा छेड़ दी है,इसकी वजह हाल के महीनों में पूरे प्रदेश में सुर्खियों में रहा नौगई तिहरा हत्याकांड है, इस मामले के बाद पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई,घटनास्थल के प्रबंधन और विवेचना को लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे, ऐसे में तबादले को कई लोग केवल एक नियमित प्रशासनिक आदेश नहीं,बल्कि एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
समतल जिलों से नक्सल क्षेत्रों की ओर भेजे गए निरीक्षक
तबादला सूची पर नजर डालें तो बड़ी संख्या में निरीक्षकों को बस्तर,दंतेवाड़ा,सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर जैसे जिलों में भेजा गया है, ये जिले वर्षों तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाते रहे हैं,हालांकि राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सल गतिविधियां काफी कमजोर हुई हैं, यदि सरकार के इस दावे को आधार माना जाए,तो इन जिलों में स्थानांतरित किए गए अधिकारियों के लिए यह नई चुनौती अवश्य होगी, लेकिन भय का विषय नहीं होना चाहिए,पुलिस सेवा का मूल उद्देश्य ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
पीडि़त परिवार को नई उम्मीद
सोनहत थाना प्रभारी के स्थानांतरण के बाद पीडि़त परिवार और उनके समर्थकों के बीच यह उम्मीद जगी है कि अब विवेचना आगे अधिक पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ सकेगी,कई लोगों का मानना है कि किसी संवेदनशील मामले में जांच की निष्पक्षता उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी अपराधियों की गिरफ्तारी, ऐसे मामलों में यदि जांच एजेंसी या जांच अधिकारी बदलता है तो कई बार पीडि़त पक्ष का भरोसा भी मजबूत होता है,हालांकि यह भी स्पष्ट है कि केवल किसी अधिकारी के स्थानांतरण से जांच की दिशा स्वतः नहीं बदल जाती,जांच कानून, साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही आगे बढ़ती है।
तबादला दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं
कानूनी दृष्टि से किसी अधिकारी का स्थानांतरण किसी भी प्रकार से उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं माना जा सकता,प्रशासनिक तबादले शासन की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और कई बार कार्यकाल पूर्ण होने अथवा प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर भी किए जाते हैं, इसलिए सोनहत थाना प्रभारी के स्थानांतरण को किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सोनहत का तबादला सबसे अधिक चर्चा में…
पूरी सूची में सबसे अधिक जिस नाम की चर्चा कोरिया जिले में हो रही है, वह है सोनहत थाना प्रभारी विनोद पासवान का, उनका स्थानांतरण नारायणपुर किया गया है, सोनहत वही थाना क्षेत्र है जहां नौगई तिहरे हत्याकांड जैसी चर्चित घटना हुई थी, घटना के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए थे, आरोप लगाए गए कि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस अपेक्षित तत्परता नहीं दिखा सकी और विवेचना की दिशा को लेकर भी लगातार बहस होती रही, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किसी सक्षम न्यायिक या विभागीय जांच द्वारा नहीं हुई है, लेकिन जनचर्चा और विरोध प्रदर्शनों में यह मुद्दा लगातार उठता रहा।
अब विवेचना पर रहेगी नजर
नौगई हत्याकांड पहले ही प्रदेश की सबसे चर्चित आपराधिक घटनाओं में शामिल हो चुका है, इस मामले में आगे की विवेचना, आरोप-पत्र,न्यायालयीन प्रक्रिया और अभियोजन की मजबूती पर लोगों की नजर बनी रहेगी,पीडि़त परिवार की अपेक्षा है कि अब जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़े और किसी भी स्तर पर निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न न लगे।
सरकार के दावे की भी होगी परीक्षा
एक ओर सरकार लगातार नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का दावा कर रही है,वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में निरीक्षकों को बस्तर संभाग और अन्य नक्सल प्रभावित जिलों में भेजा गया है,ऐसे में यह तबादला सूची सरकार के दावों की भी एक तरह से परीक्षा मानी जा सकती है,यदि वास्तव में नक्सल गतिविधियां नियंत्रित हैं तो इन जिलों में कार्यभार संभालने वाले अधिकारियों के लिए बेहतर पुलिसिंग और विकासोन्मुख कानून-व्यवस्था स्थापित करने का अवसर होगा।
जनता की अपेक्षा—निष्पक्ष पुलिसिंग
कोरिया जिले के लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि नौगई हत्याकांड जैसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया बिना किसी दबाव के आगे बढ़े,पुलिस अधिकारियों का आना-जाना प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है,लेकिन जनता का विश्वास तभी मजबूत होगा जब विवेचना निष्पक्ष,पारदर्शी और समयबद्ध होगी, सोनहत थाना प्रभारी का स्थानांतरण फिलहाल एक प्रशासनिक आदेश है,लेकिन इसने जिले में यह चर्चा अवश्य तेज कर दी है कि क्या अब बहुचर्चित नौगई हत्याकांड की जांच नए सिरे से अधिक भरोसेमंद तरीके से आगे बढ़ पाएगी,इसका उत्तर आने वाले समय में विवेचना की दिशा और न्यायिक प्रक्रिया ही देगी।
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