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पटना/कोरिया@ सड़क हादसे में घायल युवक के लिए देवदूत बने शिक्षक

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,समय पर उपचार से बची जान
वन विभाग कार्यालय के सामने पिकअप और बाइक की भिड़ंत,शिक्षक की तत्परता और स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता से टला बड़ा हादसा
-संवाददाता-
पटना/कोरिया,09 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
नगर पंचायत पटना में सोमवार सुबह हुए सड़क हादसे में एक शिक्षक की संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय ने एक घायल युवक की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वन विभाग कार्यालय के सामने हुई इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सका।
जानकारी के अनुसार,सुबह लगभग 9 बजे वन विभाग कार्यालय के सामने एक पिकअप वाहन के बैक करने के दौरान बाइक से जोरदार टक्कर हो गई, दुर्घटना इतनी भीषण थी कि बाइक सवार युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गंभीर चोट आई और शरीर के कई हिस्सों से लगातार खून बहने लगा, इसी दौरान अपनी ड्यूटी पर जा रहे छिंदिया निवासी शिक्षक आशीष जायसवाल की नजर घायल युवक पर पड़ी,उन्होंने बिना समय गंवाए अपना वाहन रोका और आसपास मौजूद लोगों की मदद से घायल युवक को तत्काल अपने वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पटना पहुंचाया, अस्पताल में समय रहते इलाज शुरू होने से चिकित्सकों ने रक्तस्राव को नियंत्रित किया, जिससे युवक की जान बचाई जा सकी, सूत्रों के अनुसार घायल युवक की उम्र 20 से 22 वर्ष के बीच है और वह ग्राम पंचायत बरदिया का निवासी बताया जा रहा है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने भी निभाई अहम भूमिका- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घायल युवक को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने में स्वास्थ्यकर्मी इबू खान एवं आशीष साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों ने प्राथमिक उपचार में तेजी दिखाते हुए घायल की स्थिति को संभाला।
पहले भी कर चुके हैं कई लोगों की मदद- स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहला अवसर नहीं है जब शिक्षक आशीष जायसवाल ने किसी दुर्घटना पीडि़त की मदद की हो, इससे पहले भी वे कई सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दे चुके हैं, आशीष जायसवाल का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार मिल जाए तो 50 से 60 प्रतिशत तक लोगों की जान बचाई जा सकती है, उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि दुर्घटना देखने पर केवल तमाशबीन न बनें, बल्कि मानवता का परिचय देते हुए घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करें, इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि समय पर मिली मदद और संवेदनशील नागरिकों की तत्परता किसी की जिंदगी बचा सकती है।


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