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सोनहत/कोरिया@तन्जरा जलाशय बदहाल, जर्जर नहरों और रिसते गेटों ने खोली विभाग की पोल

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  • सिंचाई व्यवस्था हुई फेल! तन्जरा जलाशय में बह रहा पानी,किसान परेशान
  • मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों खर्च,फिर भी तन्जरा जलाशय खस्ताहाल…
  • जल संसाधन विभाग की लापरवाही,नहरें टूटीं,खेत डूबे,गेटों से बह रहा पानी…
  • तन्जरा जलाशय बना भ्रष्टाचार की मिसाल?किसानों ने उठाए बड़े सवाल…
  • जर्जर नहरें,रिसते गेट और गायब मेंटेनेंस बजट से किसानों में भारी नाराजगी


-राजन पाण्डेय-
सोनहत/कोरिया,10 मई 2026 (घटती-घटना)। सोनहत क्षेत्र का तन्जरा जलाशय इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है,कभी किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख सहारा माने जाने वाला यह जलाशय अब जल संसाधन विभाग की लापरवाही और कथित अनदेखी का प्रतीक बन चुका है, जिले के विभिन्न जलाशयों और नहरों की खराब स्थिति लगातार सामने आने के बाद अब तन्जरा जलाशय की तस्वीर ने विभागीय दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है, करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सिंचाई व्यवस्था आज किसानों के लिए राहत नहीं बल्कि नई परेशानी का कारण बनती जा रही है।
नहरें जर्जर,खेतों में तबाही
तन्जरा जलाशय से निकली नहरों की हालत बेहद खराब बताई जा रही है,कई स्थानों पर नहरों की दीवारें टूट चुकी हैं,तो कहीं बड़े-बड़े दरारों से लगातार पानी रिस रहा है,परिणामस्वरूप पानी खेतों तक नियंत्रित रूप से पहुंचने के बजाय रास्ते में ही बहकर बर्बाद हो रहा है,कई किसानों के खेतों में जरूरत से अधिक पानी भरने से फसलें खराब होने लगी हैं,ग्रामीणों का कहना है कि जिन नहरों का उद्देश्य खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना था,वही अब किसानों के लिए नुकसान का कारण बन गई हैं,खेतों में अनियंत्रित पानी घुसने से मिट्टी कटाव, फसल सड़ने और उत्पादन घटने जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं,किसानों का आरोप है कि वर्षों से नहरों की सही मरम्मत नहीं कराई गई, जबकि कागजों में लगातार मेंटेनेंस दिखाया जाता रहा।
गेटों से लगातार बह रहा पानी
जलाशय के गेटों से लगातार हो रहा जल रिसाव विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, बांध के गेट किसी भी जलाशय की सुरक्षा और जल नियंत्रण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं,लेकिन तन्जरा जलाशय में यही व्यवस्था पूरी तरह कमजोर दिखाई दे रही है,स्थानीय लोगों के अनुसार कई महीनों से गेटों से पानी रिस रहा है,लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया,विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते गेटों की तकनीकी मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में यह बड़ी दुर्घटना का कारण भी बन सकता है, लगातार जल रिसाव से न केवल पानी की भारी बर्बादी हो रही है,बल्कि सिंचाई के लिए सुरक्षित जल भंडारण भी प्रभावित हो रहा है।
आखिर कहाँ जा रहा मरम्मत का बजट?
सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है कि जलाशयों और नहरों की मरम्मत के लिए हर साल जारी होने वाला लाखों-करोड़ों रुपये का बजट आखिर खर्च कहाँ हो रहा है,ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि कागजों में मरम्मत और सुधार कार्य दिखाकर बजट खर्च कर दिया जाता है,लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहते हैं,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में समय-समय पर मरम्मत कार्य कराए गए होते तो आज नहरें टूटती नहीं और गेटों से पानी नहीं बहता। किसानों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और तकनीकी ऑडिट कराने की मांग उठाई है।
एसी कमरों से नहीं दिखती किसानों की परेशानी
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने विभागीय अधिकारियों पर मैदानी निरीक्षण नहीं करने का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि अधिकारी कार्यालयों में बैठकर विकास के दावे करते हैं,लेकिन जमीनी हकीकत देखने कभी गांवों तक नहीं पहुंचते,इसी लापरवाही का परिणाम है कि सोनहत क्षेत्र के अधिकांश जलाशय और नहरें बदहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं।
पंच संघ ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग
प्रेम सागर तिवारी ने कहा कि तन्जरा जलाशय की स्थिति केवल एक बांध की समस्या नहीं, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोलने वाला मामला है, उन्होंने मांग की कि जिले के सभी बांधों और नहरों के मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि मरम्मत के नाम पर खर्च किया गया बजट आखिर कहां गया।
कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
अनित दुबे ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी एसी कमरों में बैठकर विकास का खाका तैयार कर रहे हैं,जबकि किसान अपनी फसलें बर्बाद होते देख रहा है,उन्होंने मांग की कि पिछले तीन वर्षों में जलाशयों के मरम्मत और मेंटेनेंस कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा खर्च की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ तो कांग्रेस किसानों के साथ आंदोलन करेगी।
जन सहयोग समिति ने मांगी फिजिकल ऑडिट
पुष्पेंद्र राजवाड़े ने कहा कि सोनहत क्षेत्र के सभी जलाशयों से बहता पानी विभाग की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का प्रमाण है,उन्होंने मांग की कि केवल कागजी जांच नहीं बल्कि तकनीकी टीम गठित कर सभी बांधों और नहरों की फिजिकल ऑडिट कराई जाए,साथ ही चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ विभागीय कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
किसानों की उम्मीदें अब प्रशासन पर टिकीं
तन्जरा जलाशय की स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण सिंचाई व्यवस्था क्यों बदहाल है,अब किसानों और ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और जल संसाधन विभाग पर टिकी हैं, देखना यह होगा कि विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारता है या फिर तन्जरा जलाशय और यहां के किसान यूं ही अपनी बदहाली पर आंसू बहाते रहेंगे।


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