-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। शहर के एक निजी स्कूल में सरगुजिहा बोली बोलने वाले बच्चे को नर्सरी में प्रवेश देने से इनकार करना स्कूल प्रबंधन को भारी पड़ गया। मामले की जांच के बाद जिला शिक्षा विभाग ने स्कूल पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है और संस्था का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। चोपड़ापारा निवासी राजकुमार यादव ने आरोप लगाया था कि वे अपने साढ़े तीन साल के बेटे का एडमिशन कराने स्वरंग किड्स एकेडमी पहुंचे थे। यहां प्रिंसिपल ने यह कहकर प्रवेश देने से मना कर दिया कि बच्चा केवल सरगुजिहा बोली बोलता है और शिक्षक उसकी भाषा नहीं समझ पाएंगे। अभिभावक का कहना है कि एक सप्ताह तक डेमो क्लास के बाद भी बच्चे को प्रवेश नहीं दिया गया।
‘बड़े घरों के बच्चे हिंदी बोलते हैं’ः अभिभावक के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने यह भी कहा कि यहां पढऩे वाले अन्य बच्चे हिंदी में बात करते हैं, ऐसे में उनका बच्चा उनकी भाषा सीख सकता है। इस आधार पर प्रवेश से इनकार किया गया, जिसे परिजनों ने भेदभावपूर्ण बताया।
जांच में आरोप सही : कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच दल गठित किया। वरिष्ठ प्राचार्य की अध्यक्षता में हुई जांच में शिकायत सही पाई गई। यह भी सामने आया कि स्कूल बिना विभागीय मान्यता के संचालित हो रहा था।
शिक्षा अधिकार कानून का उल्लंघन : डीईओ ने आदेश में कहा कि यह कृत्य नि : शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का उल्लंघन है। साथ ही यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के भी विपरीत है, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में देने पर जोर दिया गया है।
सख्त कार्रवाई : जिला शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। स्कूल का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित किया संदेश स्पष्ट। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग ने साफ संकेत दिया है कि भाषा या किसी भी आधार पर बच्चों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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