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खड़गवां@ खड़गवां में पीडीएस पर सवालों की बरसात न तय समय,न निगरानी—स्व-सहायता समूह के नाम पर संचालन में गड़बड़ी के आरोप

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खड़गवां,13 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। खड़गवां क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है, राशन दुकानों के संचालन में अनियमितता, निगरानी की कमी और स्व-सहायता समूहों के नाम पर कथित फर्जी संचालन जैसे आरोपों ने पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तय समय का अभाव, हितग्राही परेशान– क्षेत्र की पीडीएस दुकानों में न तो खुलने और बंद होने का कोई निर्धारित समय है और न ही वितरण की नियमितता सुनिश्चित हो पा रही है,ग्रामीणों के अनुसार लोग सुबह से राशन लेने पहुंचते हैं, घंटों इंतजार के बाद भी दुकान खुलने की कोई गारंटी नहीं होती, कई बार बिना राशन लिए ही वापस लौटना पड़ता है, इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा असर गरीब और जरूरतमंद वर्ग पर पड़ रहा है।
निरीक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल– पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खाद्य विभाग और विशेष रूप से फूड इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर उठ रहा है, स्थानीय लोगों का कहना है की नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा, स्टॉक जांच की कोई ठोस प्रक्रिया नजर नहीं आती, अवैध बिक्री की शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं हो रही, यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि अधिकारी फील्ड में रहते हैं, तो फिर अनियमितताएं लगातार कैसे जारी हैं?
स्व-सहायता समूह के नाम पर संचालन पर सवाल- एक गंभीर आरोप यह भी सामने आया है कि जिन स्व-सहायता समूहों के नाम पर राशन दुकानें आवंटित हैं, वे केवल कागजों तक सीमित हैं,ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार समूह की महिलाएं दुकान संचालन में सक्रिय नहीं हैं, दुकान का संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है, कई मामलों में संबंधित महिलाओं को प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं है, यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की अवधारणा पर भी सवाल खड़े करती है।
पुराने मामलों की जांच अब भी अधूरी- सूत्रों के मुताबिक, पहले भी इसी तरह के मामलों में सैकड़ों क्विंटल चावल के गबन के आरोप लगे, जांच शुरू हुई, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई, इससे यह आशंका बढ़ रही है कि कहीं यह पूरा मामला ‘जांच के नाम पर लंबित’ रखने की रणनीति तो नहीं बन गया है।
जवाबदेही पर बड़ा सवाल- मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा प्रश्न यह है क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है? क्या अधिकारियों ने कभी यह जांचा कि दुकान वास्तव में कौन संचालित कर रहा है? शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल अस्पष्ट हैं, लेकिन जन असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश- लगातार अनियमितताओं और शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में आक्रोश है, हितग्राहियों का कहना है कि राशन वितरण में पारदर्शिता खत्म हो चुकी है व्यवस्था पूरी तरह मनमानी पर आधारित हो गई है।
सिस्टम या सिंडिकेट?- यह मामला केवल एक दुकान या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि यह संकेत देता है कि निगरानी तंत्र कमजोर पड़ चुका है, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया सुस्त है, और कहीं न कहीं सिस्टम के भीतर मिलीभगत की आशंका भी नजर आती है।
कार्रवाई या फिर फाइलों में दफन?- खड़गवां की पीडीएस व्यवस्था अब एक बड़े सवाल के रूप में सामने है क्या खाद्य विभाग इस मामले में ठोस कार्रवाई करेगा या यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल इतना तय है कि यह मामला अब सिर्फ राशन वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक ईमानदारी की परीक्षा बन चुका है।
अवैध बिक्री और स्टॉक गड़बड़ी के आरोप
सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार पीडीएस दुकानों से चावल और चना की अवैध बिक्री की जा रही है, जांच होने पर बड़े पैमाने पर स्टॉक में कमी सामने आ सकती है, विरोध करने वाले हितग्राहियों को समझाकर या लाभ देकर शांत कर दिया जाता है, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने संदेह को गहरा कर दिया है।


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