
मापदंडों की अनदेखी,घटिया सामग्री और निगरानी पर उठे सवाल,जांच और कार्रवाई की मांग तेज
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,13 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के सिंघत जलाशय से निकलने वाली नहर लाइनिंग निर्माण कार्य इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है, करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे इस प्रोजेक्ट में गुणवत्ता से समझौते के आरोप सामने आ रहे हैं, स्थानीय ग्रामीणों और मौके पर सामने आए तथ्यों के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्य विभागीय मापदंडों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है,यदि आरोप सही साबित होते हैं,तो इसका सीधा असर क्षेत्र के किसानों पर पड़ेगा,जिन्हें इस परियोजना से सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सिंघत जलाशय की नहर लाइनिंग परियोजना अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है, एक ओर करोड़ों रुपये की लागत और किसानों की उम्मीदें हैं, वहीं दूसरी ओर गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं,यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और आवश्यक कार्रवाई की जाती है,तो परियोजना को सही दिशा मिल सकती है,लेकिन यदि अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया,तो यह परियोजना एक और अधूरी और विवादित योजना बनकर रह जाएगी,अब देखना यह है कि प्रशासन और विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और क्या वास्तव में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
किसानों के सपनों पर संकट के बादल
सिंघत जलाशय का निर्माण लगभग 15 वर्ष पहले किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य था कि क्षेत्र के किसान एक फसल के बजाय दो फसल ले सकें और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो,लेकिन वर्तमान में चल रहे नहर लाइनिंग निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवाल इन उम्मीदों पर पानी फेर सकते हैं, ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता विहीन हुआ,तो पूरी परियोजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
छोटी मिक्सर मशीनों से हो रहा काम
करोड़ों रुपये की परियोजना में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक और उपकरणों का उपयोग अपेक्षित होता है, लेकिन यहां छोटी मिक्सर मशीनों से कंक्रीट तैयार किया जा रहा है, जबकि इस तरह के बड़े कार्यों के लिए RMC प्लांट का उपयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है, यह भी निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है।
मापदंडों की अनदेखी के आरोप
निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का पालन सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इस परियोजना में इन्हीं मानकों की अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं,जानकारी के अनुसार, नहर लाइनिंग के लिए बेसमेंट की ढलाई लगभग 15 सेंटीमीटर (6 इंच) और साइड वॉल की ढलाई लगभग 7.5 सेंटीमीटर (3.5 इंच) होनी चाहिए,लेकिन मौके पर देखा गया कि बेसमेंट की ढलाई कम मोटाई में की जा रही है और साइड वॉल भी निर्धारित मानकों से कम बनाई जा रही है, इससे निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल उठ रहे हैं।
बाईब्रेटर का उपयोग नहीं,गुणवत्ता पर असर
कंक्रीट निर्माण कार्य में बाईब्रेटर का उपयोग अनिवार्य माना जाता है, जिससे कंक्रीट में मजबूती आती है और उसमें कोई खाली जगह नहीं रहती,स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान बाईब्रेटर का उपयोग नहीं किया जा रहा,जब इस संबंध में साइट पर मौजूद लोगों से पूछा गया,तो बताया गया कि मशीन खराब है,हालांकि,ग्रामीणों का कहना है कि यह जवाब अक्सर दिया जाता है और यह गुणवत्ता में कमी को छिपाने का एक तरीका बन गया है।
घटिया सामग्री और गलत अनुपात का उपयोग
निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, निर्धारित मानकों के विपरीत बड़े आकार की गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है, प्लास्टिक शीट की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं बताई जा रही, ब्रांडेड सामग्री के बजाय निम्न स्तर की सामग्री उपयोग में लाई जा रही है, इन सभी कारणों से निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
सरिया बंधाई में भी अनियमितता
नहर लाइनिंग की मजबूती के लिए सरिया का सही उपयोग आवश्यक होता है, लेकिन आरोप है कि सरिया बंधाई भी मानकों के अनुरूप नहीं की जा रही, सीमित और कम गुणवत्ता वाली सरिया का उपयोग कर निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है, जिससे भविष्य में नहर के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ सकता है।
सूचना पटल का अभाव, पारदर्शिता पर सवाल
निर्माण स्थल पर किसी भी प्रकार का सूचना पटल नहीं लगाया गया है, जिससे परियोजना की लागत, अवधि और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी आम लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है, यह स्थिति पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है और लोगों के बीच संदेह को बढ़ाती है।
मिलीभगत की आशंका, अधिकारी भी घेरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में हो रही अनियमितताओं के बावजूद विभागीय अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं,यदि यह सही है, तो यह केवल ठेकेदार की लापरवाही नहीं,बल्कि विभागीय निगरानी तंत्र की कमजोरी या संभावित मिलीभगत की ओर संकेत करता है।
इंजीनियर का बयान
इस मामले पर जल संसाधन विभाग के इंजीनियर अजय कुमार साहू ने कहा कि उन्होंने निर्माण कार्य गुणवत्ता और मापदंडों के अनुसार करने के निर्देश दिए हैं,उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्माण कार्य में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे तोड़कर पुनः कराया जाएगा।
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