

- भरतपुर-सोनहत की सियासी फिजाओं में ‘तस्करी’ की दुर्गंध: पशु तस्करी के केश में भाजपा नेता पीपी सिंह फरार,
- विधायक रेणुका सिंह के साथ तस्वीरों ने बढ़ाया सियासी पारा
-रवि सिंह-
कोरिया,10 अप्रैल 2026(घटती-घटना)। भरतपुर-सोनहत की शांत वादियों में इस वक्त सियासी तूफान उठा हुआ है, मुद्दा है बेजुबानों की तस्करी और सत्ता का रसूख, सोनहत पुलिस की हालिया कार्रवाई ने केवल 17 भैंसों को बरामद नहीं किया है,बल्कि उस तथाकथित पॉलिटिकल सिंडिकेट की जड़ें हिला दी हैं, जिसके तार सीधे सत्ताधारी दल के गलियारों से जुड़े नजर आ रहे हैं। तस्वीरों का ट्रेलर और तस्करी की फिल्म-सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने भाजपा के स्थानीय संगठन में खलबली मचा दी है, आरोपी भाजपा नेता पी.पी. सिंह (निवासी ग्राम उज्ञाव) की तस्वीरें क्षेत्रीय विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह के साथ वायरल हो रही हैं, इन तस्वीरों ने विपक्ष को हमला करने का सीधा मौका दे दिया है कि क्या अपराधियों को सत्ता का अभयदान प्राप्त है?
क्या है पूरा मामला?
सोनहत थाना पुलिस ने अवैध पशु तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक खेप पकड़ी, जो कथित तौर पर अन्य राज्य में सप्लाई की जा रही थी, इस मामले में झारखंड के एक मकसूद खान के साथ भाजपा नेता पी.पी. सिंह का नाम एफ आई आर में आया है, आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे है, वही पुलिस अभी आरोपियों के खोज बीन में डटी है।
पूर्व विधायक का तीखा प्रहार,संस्कार की ओट में रसूख का खेल
पूर्व विधायक ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे पर सीधा हमला बोलते हुए भाजपा की घेराबंदी तेज कर दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो लोग दिन-रात हिंदुत्व,धर्म और ऊंचे संस्कारों की बड़ी-बड़ी बातें करते नहीं थकते,आज वे खुद पशु तस्करी जैसे गंभीर और अनैतिक आरोपों के घेरे में हैं, ग्राम उज्ञाव निवासी भाजपा नेता पी.पी. सिंह पर एफ आई आर दर्ज होने के बाद पूर्व विधायक ने सवाल उठाया कि क्या बेजुबानों की तस्करी ही भाजपा का असली चरित्र है? उन्होंने आरोपी की विधायक के साथ वायरल तस्वीरों पर तंज कसते हुए पूछा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के साथ फोटो खिंचवाकर क्या जनता को गुमराह करने या अपनी आपराधिक छवि को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है? फरार आरोपी को अब तक पुलिस द्वारा न पकड़ पाना प्रशासन की मंशा और रसूख के दबाव पर भी कई गहरे सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस की दोतरफा चाल,कहीं आक्रामकता,तो कहीं रहस्यमयी चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम में जहाँ पूर्व विधायक गुलाब कमरो और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनेंद्रगढ़ ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोलकर भाजपा को कटघरे में खड़ा किया है,वहीं दूसरी ओर कोरिया जिला कांग्रेस कमेटी और स्थानीय दिग्गज नेताओं के मौन ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। यह खामोशी अब सवालों के घेरे में है, क्या जिला और ब्लॉक स्तर की कांग्रेस कमेटियां अब केवल प्रदेश नेतृत्व से मिले रस्म-अदायगी वाले कार्यक्रमों तक सीमित रह गई हैं? स्थानीय स्तर पर इतने बड़े मुद्दे के बावजूद मुख्यधारा के कांग्रेसी संगठन की निष्कि्रयता यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वे सत्ता पक्ष के सीधे विरोध से कतरा रहे हैं या फिर संगठन के भीतर समन्वय की भारी कमी है,विपक्ष की यह सुस्ती कहीं न कहीं भाजपा को वॉकओवर देने जैसी नजर आ रही है, जिससे कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो के तीखे सवाल
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस मुद्दे को लेकर सीधे घेराबंदी शुरू कर दी है, उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा की नैतिकता और दोहरे चरित्र पर सवाल दागे हैं।
दाव पर लगी साख
क्षेत्र की जनता के बीच अब यह चर्चा आम है कि धर्म और संस्कार की दुहाई देने वाले नेताओं की असलियत क्या है? सवाल केवल एक एफआईआर का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है जो जनता ने राम राज्य की उम्मीद में दिया था। क्या रसूखदार नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर अपराधी अपनी ढाल बना रहे हैं?
नैतिकता का पैमाना
क्या विधायक रेणुका सिंह इस दागी नेता को तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर करेंगी?
संरक्षण का आरोप
पुलिस की पहुंच से अब तक आरोपी दूर क्यों है? क्या उसे ऊपर से इशारा मिला हुआ है?
कथनी और करनी का अंतर
एक तरफ भाजपा गौ-वंश और हिंदुत्व की रक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के ही सिपहसालार भैंसा तस्करी के सिंडिकेट चला रहे हैं।
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