- उच्च वर्ग शिक्षक से हटाकर व्याख्याता को सौंपी गई जिम्मेदारी,प्राचार्य-व्याख्याताओं के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में…
- सुशासन बनाम मनमानी पर लगा विराम : खबर के बाद बदला शिक्षा विभाग का फैसला
- विरोध के बाद झुका प्रशासन,उच्च वर्ग शिक्षक से हटाकर व्याख्याता को मिला प्रभार
- खबर छपी,आदेश बदलाः कलेक्टर ने तुरंत किया शिक्षा विभाग में सुधार
- एमसीबी में व्यवस्था पर सवाल के बाद एक्शन : शिक्षा विभाग में प्रभार संशोधित
- गलत नियुक्ति पर बैकफुट पर प्रशासन : खबर के बाद बदला गया आदेश
-संवाददाता-
एमसीबी,08 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले में शिक्षा विभाग में प्रभार को लेकर उठे विवाद पर प्रकाशित समाचार का असर अब साफ दिखाई देने लगा है, दैनिक घटती-घटना में खबर प्रकाशित होने के बाद कलेक्टर एमसीबी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया और सहायक जिला परियोजना अधिकारी (शिक्षा) के पद पर किए गए प्रभार में बदलाव कर दिया, यह निर्णय लंबे समय से चल रहे विरोध और असंतोष के बाद लिया गया है, एमसीबी जिले में शिक्षा विभाग का यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक उदाहरण के रूप में सामने आया है, जहां मीडिया की खबर के बाद त्वरित कार्रवाई हुई, यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि यदि मुद्दे को प्रभावी तरीके से उठाया जाए तो प्रशासनिक सुधार संभव है, अब जिले के शिक्षकों और आम लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि यह बदलाव केवल एक निर्णय तक सीमित रहता है या व्यापक सुधार की दिशा में आगे बढ़ता है।
क्या था पूरा मामला
एमसीबी जिले के शिक्षा विभाग में सहायक जिला परियोजना अधिकारी (शिक्षा) के पद पर हाल ही में एक उच्च वर्ग शिक्षक को प्रभार दिया गया था, इस नियुक्ति के बाद जिले के प्राचार्यों और व्याख्याताओं में असंतोष फैल गया। उनका कहना था कि यह पद वरिष्ठ श्रेणी का है और इस पर प्राचार्य या व्याख्याता स्तर के अधिकारी को ही जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, विरोध करने वाले शिक्षकों का तर्क था कि उच्च वर्ग शिक्षक का पद व्याख्याता और प्राचार्य से कनिष्ठ होता है, ऐसे में कनिष्ठ अधिकारी को वरिष्ठों पर प्रशासनिक जिम्मेदारी देना नियमों और कार्यप्रणाली दोनों के खिलाफ है।
शिक्षकों में दिखा संतोष, पर पूरी तरह नहीं थमा मुद्दा-प्रभार परिवर्तन के बाद प्राचार्यों और व्याख्याताओं में आंशिक संतोष देखने को मिला है। उनका कहना है कि यह निर्णय पद की गरिमा और प्रशासनिक संतुलन के अनुरूप है, हालांकि, शिक्षकों का यह भी कहना है कि यह सिर्फ एक मामले का समाधान है,जबकि जिले में ऐसे कई और उदाहरण हैं जहां पदानुसार प्रभार नहीं दिए गए हैं।
अन्य पदों पर भी उठी समीक्षा की मांग
इस घटनाक्रम के बाद अब जिले के शिक्षकों ने अन्य पदों को लेकर भी आवाज उठानी शुरू कर दी है, विशेष रूप से सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी जैसे पदों पर भी पदानुसार नियुक्ति की मांग तेज हो गई है, शिक्षकों का कहना है कि पूर्व में किए गए प्रभार आदेशों की समीक्षा हो,वरिष्ठता और पद के अनुरूप जिम्मेदारी तय की जाए, प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए।
खबर प्रकाशित होने के बाद बढ़ा दबाव
दैनिक घटती-घटना में इस पूरे मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, जिसमें ‘सुशासन या मनमानी’ जैसे सवाल उठाए गए थे,खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई और मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा,सूत्रों के अनुसार, खबर के बाद लगातार अधिकारियों के बीच चर्चा हुई और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने हस्तक्षेप किया।
कलेक्टर ने किया प्रभार में बदलाव
मामले पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर एमसीबी ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर प्रभार में बदलाव कर दिया, उच्च वर्ग शिक्षक से प्रभार वापस लिया गया, सहायक जिला परियोजना अधिकारी (शिक्षा) का प्रभार अब व्याख्याता टी. विजय गोपाल राव को सौंपा गया,टी.विजय गोपाल राव वर्तमान में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मनेंद्रगढ़ में व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं।
सुशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सुशासन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, शिक्षकों का मानना है कि यदि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करते समय नियमों और पद की श्रेणी का ध्यान नहीं रखा जाएगा, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के निर्णयों से कार्यप्रणाली में असंतुलन पैदा होता है और अधीनस्थ एवं वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय प्रभावित होता है।
प्रशासन की भूमिका और आगे की उम्मीदें
कलेक्टर द्वारा त्वरित कार्रवाई को प्रशासन की सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है,इससे यह संकेत मिला है कि जनहित से जुड़े मामलों और मीडिया में उठाए गए मुद्दों पर प्रशासन संवेदनशील है,अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य विवादित प्रभारों में भी इसी तरह सुधार किया जाएगा? क्या शिक्षा विभाग में पूरी तरह पदानुसार व्यवस्था लागू होगी?
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