-संवाददाता-
अम्बिकापुर,08 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। शहर के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को महंगी किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म तय दुकानों से खरीदने के लिए मजबूर करने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को आयोजित बैठक में कई स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, जिसके बाद स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। जांच के दौरान सामने आया कि कई बड़े निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों की सूची तय दुकानदारों को उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद अभिभावकों पर वहीं से सामग्री खरीदने का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जाता है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। प्रारंभ में स्कूल प्रबंधन ने आरोपों से इंकार किया, लेकिन विस्तृत चर्चा में कई मामलों में मिलीभगत की स्थिति सामने आई। कुछ स्कूलों ने यह भी स्वीकार किया कि वे निश्चित दुकानों को किताबों की सूची देते हैं। बैठक में होली क्रॉस कान्वेंट स्कूल प्रबंधन ने कहा कि संस्था किसी एक दुकान से खरीद के लिए बाध्य नहीं करती। हालांकि, डीईओ द्वारा वन-टू-वन चर्चा में यह स्पष्ट हुआ कि शहर के अधिकांश निजी स्कूल तय दुकानदारों से समन्वय कर अभिभावकों को पहले से तैयार महंगे बंडल खरीदने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मुंबई से तय किताबें,डीईओ ने जताई आपत्ति : बिरला ओपन माइंड स्कूल ने बताया कि उनकी किताबें मुख्यालय मुंबई से निर्धारित होती हैं और स्थानीय स्तर पर एक ही दुकान से उपलब्ध हैं। इस पर डीईओ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह व्यवस्था अभिभावकों को एक ही दुकान से खरीदने के लिए बाध्य करती है। साथ ही 12 माह की फीस वसूली पर भी आपत्ति दर्ज की गई, जबकि स्कूलों ने 10 माह की फीस लेने की बात कही।
5 वीं तक निजी प्रकाशकों की किताबें, नियमों का उल्लंघन : कार्मेल स्कूल द्वारा कक्षा 5वीं तक केवल निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाने की जानकारी दी गई। इस पर डीईओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीएसई एफिलिएशन बाई-लॉ 2018 का हवाला दिया, जिसमें एनसीईआरटी/ सीबीएसई पाठ्यक्रम को अनिवार्य बताया गया है।
इन दुकानों के नाम आए सामने : मॉन्टफोर्ट स्कूल प्रबंधन ने स्वीकार किया कि आशा बुक डिपो, राणा ब्रदर्स और अजीत बुक डिपो को पुस्तकों की सूची दी गई है। इस पर डीईओ ने कहा कि यह सीधे तौर पर मिलीभगत को दर्शाता है और यह कार्रवाई योग्य है।
किताबों का खर्च 8 हजार तक,डीईओ नाराज
जांच में पाया गया कि कक्षा 1 से 8 तक किताबों और कॉपियों का खर्च 3500 से 8000 रुपए तक लिया जा रहा है, जो एनसीईआरटी किताबों की तुलना में कई गुना अधिक है। इस पर डीईओ ने नाराजगी जताई। डीईओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो संबंधित स्कूलों पर वसूली गई राशि का 10 गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
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