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मनेन्द्रगढ़@ मनेन्द्रगढ़ सामूहिक विवाह घोटाला: जांच में आरोप सही, फिर भी कार्रवाई ठप, दोषियों पर संरक्षण के आरोप

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  • 21 लाख की अनियमितता की पुष्टि के बाद भी अधिकारी पदस्थ,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने उठाए सवाल,मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के आश्वासन पर भी संदेह
  • जांच में आरोप सही,फिर भी कार्रवाई ठप्प,दोषियों पर संरक्षण के आरोप

मनेन्द्रगढ़,08 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसे संवेदनशील और सामाजिक महत्व के कार्यक्रम में वित्तीय अनियमितता सामने आना न केवल प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है, बल्कि यह शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है, भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो द्वारा उठाए गए इस मामले में अब जांच रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है, जिसमें लगभग 21 लाख रुपये के खर्च में अनियमितता की पुष्टि की गई है, कलेक्टर कार्यालय द्वारा गठित जांच समिति ने साफ तौर पर माना है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ, इसके बावजूद अब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना रहा है।
जांच में अनियमितता की पुष्टि
कार्यालय कलेक्टर (महिला एवं बाल विकास शाखा), जिला एमसीबी द्वारा गठित जांच समिति ने विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया है,रिपोर्ट के अनुसार सामग्री की खरीदी निर्धारित नियमों के विपरीत की गई, वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा,व्यय में अनियमितता स्पष्ट रूप से सामने आई, जांच समिति ने इन सभी बिंदुओं को दर्ज करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी,जिससे यह स्पष्ट हो गया कि शिकायत केवल आरोप नहीं, बल्कि तथ्यात्मक आधार पर सही थी।
जिले में चर्चा और बढ़ता असंतोष
इस मामले के सामने आने के बाद जिले में चर्चा का माहौल है, लोग यह जानना चाहते हैं कि दोषियों पर कार्रवाई कब होगी, क्या शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह लंबित रह जाएगा।
शिकायत और मीडिया की भूमिका
इस पूरे मामले को सामने लाने में पूर्व विधायक गुलाब कमरो की भूमिका महत्वपूर्ण रही,उन्होंने इस मामले को गंभीरता से उठाया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई,इसके साथ ही स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से सामने लाया, जिसके बाद प्रशासन को जांच के लिए बाध्य होना पड़ा,यह मामला यह भी दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों और मीडिया की सक्रियता से ही कई बार ऐसे मामलों का खुलासा संभव हो पाता है।
दोषी अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
जांच रिपोर्ट में तत्कालीन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शुभम बंसल के खिलाफ शिकायत सही पाई गई है,इसके बावजूद स्थिति यह है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, वे वर्तमान में सूरजपुर जिले में प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं,यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि जब आरोप सिद्ध हो चुके हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।
पूर्व विधायक के तीखे सवाल
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने कहा कि कलेक्टर द्वारा जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और कई महीने बीत चुके हैं,लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या दोषी अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है और क्या प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही समाप्त हो गई है।
मंत्री के आश्वासन पर उठे सवाल
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने मनेंद्रगढ़ प्रवास के दौरान इस मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था,लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है,पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि यदि आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं होती,तो यह जनता के विश्वास को प्रभावित करता है।
प्रशासनिक प्रक्रिया बनाम परिणाम
एमसीबी कलेक्टर द्वारा जांच प्रतिवेदन संचालनालय और सचिवालय महिला एवं बाल विकास विभाग,नवा रायपुर को भेजा जा चुका है,इसके बावजूद कार्रवाई लंबित रहना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रक्रिया और वास्तविक परिणाम के बीच एक बड़ा अंतर है,यह स्थिति यह भी संकेत देती है कि निर्णय लेने में देरी या अनिच्छा दोनों ही संभावनाएं मौजूद हैं।


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