20 लीटर पेट्रोल की रसीद सामने आते ही सीएचएमओ कार्यालय पर उठे गंभीर सवाल
एमसीबी,05 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है, इस बार मामला सरकारी मद से निजी वाहन में पेट्रोल भरवाने का सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साधारण सी पेट्रोल पर्ची ने पूरे कार्यालय की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
20 लीटर पेट्रोल की रसीद ने खोली पोल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय पेट्रोल पंप श्री राम फ्यूल्स से जारी रसीद में झारखंड पंजीयन क्रमांक जेएच 05 बीवी 5038 में 20 लीटर पेट्रोल भरवाया गया, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह वाहन विभागीय रिकार्ड में सरकारी नहीं, बल्कि निजी वाहन बताया जा रहा है, इसके बावजूद पेट्रोल का भुगतान सरकारी मद से किए जाने की बात सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
सीएचएमओ की मुहर और हस्ताक्षर से बढ़ा संदेह
रसीद पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की मुहर और हस्ताक्षर दर्ज होने से मामला और गंभीर हो गया है, अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस नियम के तहत सरकारी धन का उपयोग निजी वाहन में ईंधन भरवाने के लिए किया गया, क्या यह किसी अधिकारी की मौन स्वीकृति से हो रहा था या फिर विभाग में लंबे समय से ऐसा खेल जारी है?
वित्तीय अनियमितता या सरकारी संसाधनों की खुली लूट?
यदि प्रथम दृष्टया सामने आए दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो यह मामला वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ सरकारी नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा, सरकारी वाहनों के लिए स्वीकृत ईंधन का उपयोग निजी गाडि़यों में होना न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल है।
क्या लंबे समय से चल रहा है पेट्रोल पर्ची का खेल?
इस एक रसीद के सामने आने के बाद यह आशंका भी गहरा गई है कि कहीं विभाग में इस तरह का खेल लंबे समय से तो नहीं चल रहा, यदि पुराने पेट्रोल बिलों और वाहन लॉगबुक की जांच की जाए, तो और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, सूत्रों का दावा है कि यह सिर्फ एक रसीद नहीं, बल्कि विभाग के भीतर चल रही संभावित अनियमितताओं की एक बड़ी कड़ी हो सकती है।
जांच हुई तो कई जिम्मेदारों के चेहरों से उठ सकता है पर्दा
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं,यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो सिर्फ पेट्रोल पर्ची ही नहीं, बल्कि विभागीय खर्चों के कई और फाइलों से भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं,दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला दबा दिया जाता है, यह आने वाला समय तय करेगा।
जनता का सवाल – सरकारी पैसा आखिर किसके लिए?
इस खुलासे के बाद आम लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है कि जनता के टैक्स से चलने वाले सरकारी धन का उपयोग आखिर किसके हित में हो रहा है,यदि निजी वाहन में सरकारी पेट्रोल भरवाया जा रहा है,तो यह सीधे-सीधे जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।
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