

- जनवरी से लंबित मजदूरी भुगतान ने तोड़ी मजदूरों की कमर
- वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक संकट,होली के बाद नवरात्रि भी रही फीकी मजदूरी भुगतान के अभाव में फीके हुए त्योहार
- कोरिया जिले में मज़दूरों का धैर्य दे रहा जवाब,पेंशन और मजदूरी न मिलने से बढ़ा जन-आक्रोश
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,01 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में विकास की इबारत लिखने वाले मनरेगा मजदूरों के घरों में इस बार नवरात्रि की रौनक गायब दिखी जिले के बैकुण्ठपुर और सोनहत ब्लॉक के हजारों मजदूरों के लिए त्योहार अब खुशियों के बजाय आर्थिक तंगी का सबब बन गए हैं। जनवरी माह से मजदूरी का भुगतान न होने के कारण स्थिति अब हाथ से निकलती नजर आ रही है।
होली बीती मायूसी में,अब नवरात्रि पर भी ताला
बीते दिनों होली का त्योहार इन मजदूरों ने उधारी के भरोसे जैसे-तैसे काटा,लेकिन अब चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर भी इनके घरों में सन्नाटा पसरा है। सोनहत जैसे वनांचल क्षेत्रों में जहाँ आजीविका का मुख्य साधन मनरेगा ही है, वहाँ तीन महीने से पैसा न मिलना किसी त्रासदी से कम नहीं है,मजदूरों का कहना है कि प्रशासन केवल काम लेना जानता है,लेकिन पेट की आग बुझाने के लिए उनके हक का पैसा देने में नाकाम रहा है।
बैकुण्ठपुर से सोनहत तक आर्थिक तंगी का साया
बैकुण्ठपुर ब्लॉक के कई गांवों में स्थिति इतनी गंभीर है कि मजदूर परिवारों को दैनिक राशन के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। स्थानीय दुकानदारों ने भी अब उधारी देना बंद कर दिया है।
पूरे छत्तीसगढ़ में एक जैसी स्थिति
रायपुर से आई इस खबर के अनुसार,केंद्र सरकार ने जी राम जी योजना (परिवर्तित मनरेगा) की करीब ?600 करोड़ की मजदूरी और पिछले तीन महीनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि रोक दी है। इस देरी के कारण लगभग 7 लाख मजदूरों का भुगतान जनवरी माह से लंबित है, जिससे प्रदेश में आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है। राज्य सरकार ने इस बकाया राशि को जल्द जारी कराने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है और विभागीय मंत्री विजय शर्मा इस विषय पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा भी करने वाले हैं। यह मामला विधानसभा के बजट सत्र में भी गूंजा है और विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताया है।
जिले के मजदूरों में बेहद नाराजगी
कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर और सोनहत ब्लॉक में विकास की नींव रखने वाले हाथ आज खाली हैं। एक तरफ जहाँ मनरेगा मजदूरों को जनवरी माह से भुगतान नहीं मिला है,वहीं दूसरी ओर समाज के सबसे असहाय वर्ग को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी लंबे समय से अटकी हुई है। इस दोहरी मार ने जिले के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर चोट-
बच्चों की स्कूल फीस और बुजुर्गों की दवाइयों का खर्च रोकना पड़ा,प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ सुलगता गुस्सा कोरिया जिले के इन दोनों ब्लॉकों में अब मजदूरों का धैर्य जवाब दे रहा है,मजदूरों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद तकनीकी खामियों या बजट का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है।
सहारा ही जब बेसहारा हो जाए…
पेंशन के भरोसे कट रही थी जिंदगी, अब अंधेरा बरकरार जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा और विकलांग पेंशन) की राशि समय पर न मिलने से हजारों हितग्राहियों की स्थिति बदतर हो गई है, कई ऐसे वृद्धजन हैं जिनका कोई सहारा नहीं है और वे इसी 500-600 रुपये की मासिक राशि पर अपनी दवाइयों और दो वक्त की रोटी के लिए निर्भर थे।
दवाइयों का संकट-
पेंशन न मिलने से बीमार बुजुर्ग अपनी नियमित दवाइयां नहीं खरीद पा रहे हैं।
दिव्यांगों की बेबसी
चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांगों के लिए यह राशि उनकी आत्मनिर्भरता का एकमात्र जरिया थी, जो अब छिन चुका है।
चिंताजनक स्थितिः सोनहत और बैकुण्ठपुर के कई घरों में स्थिति इतनी गंभीर है कि त्यौहारों के समय भी इन बुजुर्गों की आँखों में सिर्फ बेबसी के आँसू हैं।
गंभीर स्थितिः
3 माह (जनवरी, फरवरी और मार्च) से मजदूरी लंबित।
बढ़ता कर्ज
ऊँची ब्याज दरों पर साहूकारों से कर्ज लेने को मजबूर ग्रामीण।
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