


मूल भूत सुविधाओ के तरसते ग्रामीण,सड़क बिजली साफ पानी और बेहतर स्वस्थ्य सुविधाओं का अभाव
राजन पाण्डेय
कोरिया/एमसीबी,31 मार्च 2026 (घटती-घटना)। विकास के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों के बजट के बीच वनांचल क्षेत्र का ग्राम ढाबतुमाड़ी आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर इस गांव में न तो चलने को सुरक्षित सड़कें हैं और न ही पीने को स्वच्छ पानी। आलम यह है कि ग्रामीण आज भी आदिम युग की तरह झरिया और ढोढ़ी के भरोसे अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
जल जीवन मिशनः पाइप खड़े हैं,पर प्यासी है जनता
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना ढाबतुमाड़ी में पूरी तरह फेल नजर आ रही है, गांव के स्कूल के पास एक विशाल पानी टंकी खड़ी तो कर दी गई है,लेकिन विडंबना देखिए कि उसी स्कूल के बच्चों को पानी नसीब नहीं हो रहा है, गांव की गलियों में नल के ठीहे तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन उनमें पानी की एक बूंद तक नहीं टपकती,स्थिति यह है कि ग्रामीण आज भी दूर-दराज के झरिया और ढोढ़ी से गंदा पानी लाने को विवश हैं,जिससे बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
तस्वीरों में विकास, धरातल पर सन्नाटाः जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता- ग्राम ढाबतुमाड़ी की इस बदहाली के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की गहरी उदासीनता है, चुनाव के समय वोट मांगने और बड़े बड़े वादे करने के बाद नेता आज ग्रामीणों का हाल जानने तक नहीं पहुँचते, आलम यह है कि गाँव की जर्जर सड़कों और सूखे नलों की शिकायतें फाइलों में दबी दम तोड़ रही हैं,लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक धरातल पर उतरकर वस्तुस्थिति का जायजा लेने की जहमत नहीं उठाई,जनप्रतिनिधियों के ‘विकास’ के दावे यहाँ के पत्थरों और गड्ढों में गुम हो चुके हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि न तो शासन की योजनाओं का लाभ उन तक पहुँच रहा है और न ही कोई सुध लेने वाला है,यह उदासीनता स्पष्ट करती है कि ढाबतुमाड़ी जैसे सुदूर अंचल आज भी सिस्टम की प्राथमिकता सूची से कोसों दूर हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि कई बार प्रशासन को अवगत कराया,लेकिन केवल आश्वासन मिला। अगर जल्द ही सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई,तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
जर्जर सड़कें दे रही हैं हादसों को न्योता
गांव तक पहुँचने वाली मुख्य सड़क का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है, पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है, जिससे आवागमन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है,जर्जर सड़क के कारण आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं,ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय या आपात स्थिति में किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो,तो यह सड़क यमराज के मार्ग जैसी प्रतीत होती है।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था भी वेंटिलेटर पर…
गांव के भविष्य यानी स्कूली बच्चों के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है, स्कूल का भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है, जहाँ बैठना किसी खतरे से खाली नहीं है, वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो यहाँ की स्थिति भी ‘बेहाल’ है, ग्रामीणों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी शहर की दौड़ लगानी पड़ती है।
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