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सूरजपुर/कोरिया@ संभागीय साहू समाज सम्मेलन : भव्यता के बीच अव्यवस्था खाली कुर्सियां,मंच विवाद और अंदरूनी असंतोष की पूरी तस्वीर

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  • संभागीय साहू सम्मेलन में अव्यवस्था, खाली कुर्सियां,मंच विवाद और नेतृत्व पर सवाल,कुर्सी खाली,मंच भरा—सम्मेलन में किसका चला ‘रिमोट’?
  • सम्मेलन में स्वागत कम, व्यवस्था ज्यादा सवालों में…
  • भव्य आयोजन या अव्यवस्था का मंच? साहू समाज सम्मेलन पर उठे सवाल
  • कुर्सी के लिए जद्दोजहद, नेतृत्व रहा नदारद!

-संवाददाता-
सूरजपुर/कोरिया,31 मार्च 2026 (घटती-घटना)।
सरगुजा संभाग के साहू समाज का सूरजपुर में आयोजित संभागीय सम्मेलन इस बार केवल एक सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा,बल्कि व्यवस्थाओं की कमी, नेतृत्व पर सवाल, मंच विवाद और अंदरूनी असंतोष के कारण व्यापक चर्चा का विषय बन गया,कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति ने इसे राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया,लेकिन आयोजन के दौरान और बाद में सामने आई स्थितियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। संभागीय स्तर के इस सम्मेलन को लेकर समाज के भीतर काफी उत्साह और उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे और यह एकजुटता का संदेश देगा,लेकिन कार्यक्रम स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं पहुंच पाई, पंडाल में कई स्थानों पर कुर्सियां खाली नजर आईं,जो आयोजन की तैयारी और सहभागिता दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं,संभाग के विभिन्न जिलों से व्यापक भागीदारी की उम्मीद थी,लेकिन वास्तविक उपस्थिति उस स्तर की नहीं रही,जिससे आयोजन का प्रभाव सीमित नजर आया।
शासकीय प्रोटोकॉल और सामाजिक नेतृत्व के बीच समन्वय की कमी
मुख्यमंत्री की उपस्थिति के कारण कार्यक्रम पूरी तरह शासकीय प्रोटोकॉल में संचालित होता दिखाई दिया, प्रशासनिक व्यवस्थाएं सक्रिय थीं,लेकिन सामाजिक नेतृत्व के हिस्से की जिम्मेदारियों में समन्वय की कमी साफ नजर आई, यह आयोजन एक ओर सरकारी उपस्थिति से सुसज्जित था,तो दूसरी ओर समाज के नेतृत्व द्वारा संचालित होना था,यही दोहरी व्यवस्था कई जगह पर असंतुलन का कारण बनी,जिससे व्यवस्थाओं में कमी देखने को मिली।
मूलभूत सुविधाओं में कमी : पानी और बैठने की व्यवस्था पर सवाल
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने सबसे पहले पानी और बैठने की व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया। दूर-दराज से आए समाज के लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया और कई लोग बैठने के लिए जगह खोजते रहे, पंडाल के अंदर और बाहर अव्यवस्था का माहौल रहा, जिससे यह संदेश गया कि आयोजन की योजना और क्रियान्वयन में खामियां रह गईं,यह स्थिति विशेष रूप से तब अधिक गंभीर लगती है,जब कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अतिथि और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे।
मंच व्यवस्था बना सबसे बड़ा विवाद
पूरे आयोजन का सबसे चर्चित और संवेदनशील मुद्दा मंच व्यवस्था को लेकर रहा,आरोप है कि मंच पर स्थान वितरण में संतुलन नहीं रखा गया और कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों को जगह नहीं मिल पाई,कोरिया साहू समाज के जिलाध्यक्ष जगदीश साहू के साथ हुई घटना ने इस विवाद को और बढ़ा दिया,बताया गया कि मंच पर सभी कुर्सियों पर नाम लिखे गए थे,लेकिन उनके नाम की कुर्सी नहीं थी,उन्होंने मंच पर जगह पाने के लिए प्रयास किया,लेकिन सफल नहीं हो सके, यहां तक कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा भी कुर्सी लगाने के निर्देश दिए गए,फिर भी व्यवस्था नहीं की गई,अंततः उन्हें मंच छोड़कर नीचे बैठना पड़ा यह घटना न केवल व्यक्तिगत अपमान के रूप में देखी गई, बल्कि इसे पूरे कोरिया जिले के प्रतिनिधित्व से जोड़कर भी देखा गया।
परिवारवाद और पक्षपात के आरोप
मंच व्यवस्था को लेकर यह भी आरोप सामने आए कि पूर्व जिलाध्यक्ष और उनके परिवार को प्रमुख स्थान दिया गया,जबकि कई वरिष्ठ और वर्तमान पदाधिकारियों को नजरअंदाज किया गया, समाज के भीतर यह चर्चा भी रही कि मंच पर वही चेहरे प्रमुख थे,जिनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं,इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या सामाजिक मंच का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है,परिवारवाद शब्द भी इस पूरे आयोजन के संदर्भ में बार-बार सामने आया, जिससे समाज के भीतर असंतोष और बढ़ गया।
सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आया आक्रोश
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद समाज के व्हाट्सएप समूहों में असंतोष खुलकर सामने आया, लोगों ने पोस्ट और संदेशों के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की, कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि मेहनत पूरे समाज ने की,लेकिन फायदा कुछ लोगों को ही मिला,यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि असंतोष केवल आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के भीतर गहराई तक पहुंच गया है।
आर्थिक पहलूः चंदा और घोषणा के बाद की स्थिति
कार्यक्रम को लेकर चंदा संग्रह की चर्चा भी सामने आई, समाज के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि जो राशि एकत्रित की गई,उसका उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या उसका सही हिसाब सामने आएगा,इसी बीच मुख्यमंत्री द्वारा सूरजपुर साहू समाज को 50 लाख रुपये छात्रावास निर्माण और 25 लाख रुपये बाउंड्री वॉल के लिए दिए जाने की घोषणा भी चर्चा का विषय बनी,बताया जा रहा है कि इस घोषणा के बाद कोरिया साहू समाज की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई,न तो सार्वजनिक बधाई संदेश सामने आया और न ही कोई उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया दिखी, जिससे समाज के भीतर अलग तरह की स्थिति उत्पन्न हो गई।
कोरिया जिले की सीमित भागीदारी
कोरिया जिले की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठे हैं,जानकारी के अनुसार कार्यकारिणी के बहुत कम सदस्य कार्यक्रम में पहुंचे, कुल मिलाकर लगभग 20 लोगों की उपस्थिति बताई जा रही है,कार्यक्रम स्थल पर कोरिया जिले के बैनर-पोस्टर भी नजर नहीं आए, इससे यह संदेश गया कि कोरिया जिले की भागीदारी अपेक्षाकृत कमजोर रही,जो संभागीय स्तर के आयोजन के अनुरूप नहीं थी।
नेतृत्व की भूमिका और रिमोट कंट्रोल की चर्चा-
इन सभी घटनाओं के बाद समाज के भीतर यह चर्चा भी सामने आई कि कार्यक्रम का संचालन वास्तविक नेतृत्व के बजाय रिमोट कंट्रोल से किया जा रहा था,कुछ लोगों का कहना है कि वर्तमान जिलाध्यक्ष सक्रिय भूमिका में नजर नहीं आए, निर्णय किसी अन्य के प्रभाव में लिए गए,नेतृत्व की स्पष्टता और जवाबदेही नहीं दिखी यह स्थिति संगठनात्मक कमजोरी की ओर इशारा करती है।
सामाजिक एकता के मंच पर उभरी दरार
सूरजपुर में आयोजित यह संभागीय सम्मेलन एक बड़े सामाजिक आयोजन के रूप में सामने आया,लेकिन व्यवस्थाओं की कमी,मंच विवाद,नेतृत्व पर सवाल और अंदरूनी असंतोष ने इसकी छवि को प्रभावित किया है, यह आयोजन जहां एकता का संदेश देने का अवसर था,वहीं कई मामलों में विभाजन और असंतोष की तस्वीर सामने आई,भविष्य में ऐसे आयोजनों को सफल बनाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था,सभी को समान अवसर,बेहतर समन्वय और स्पष्ट नेतृत्व पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।
डिस्क्लेमर-
यह समाचार स्थानीय स्रोतों, प्रतिभागियों के अनुभवों, सोशल मीडिया पोस्ट और क्षेत्रीय चर्चाओं के आधार पर तैयार किया गया है,इसमें शामिल कुछ आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।


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