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एमसीबी@चिरमिरी में ‘बोर्ड राजनीति’ का अंतः अब जमीन पर दिख रहा स्वास्थ्य क्रांति का असर

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  • स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल से बदली एमसीबी जिले की तस्वीर का दावा
  • भाजपा इसे वादों से हकीकत तक का सफर बता रही,बाकि सच्चाई 2028 में साबित होगी


-संवाददाता-
एमसीबी,29 मार्च 2026 (घटती-घटना)। चिरमिरी और मनेंद्रगढ़ क्षेत्र की जनता ने पिछले कुछ वर्षों में राजनीति के दो बिल्कुल अलग चेहरे देखे हैं। एक दौर वह था जब योजनाएं सिर्फ कागजों और बोर्ड तक सीमित रहीं,और दूसरा वर्तमान समय है जहाँ उन्हीं योजनाओं को जमीन पर उतारने का दावा किया जा रहा है, अब यह क्षेत्र स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के कारण प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है।
भाजपा का दावाः वादों से हकीकत तक का सफर
चिरमिरी-मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हो रहे विकास कार्यों को भाजपा ‘वादों से हकीकत तक’ की उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है,स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अगुवाई में जिला अस्पताल के संचालन, मेडिकल कॉलेज निर्माण और मेंटल हॉस्पिटल जैसी योजनाओं को सरकार अपनी कार्यशैली का उदाहरण बता रही है,भाजपा का कहना है कि पहले जहां योजनाएं केवल घोषणाओं और ‘बोर्ड’ तक सीमित थीं,वहीं अब वे धरातल पर उतर रही हैं। उनके अनुसार यह बदलाव ‘घोषणा नहीं, क्रियान्वयन’ की राजनीति को दर्शाता है, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य ढांचा मजबूत हो रहा है।
मेडिकल कॉलेजः क्षेत्र के लिए गेम चेंजर परियोजना-
भाजपा मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी के बीच बन रहा मेडिकल कॉलेज इस पूरे विकास क्रम का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मान रही है, इस परियोजना के कई महत्वपूर्ण आयाम हैंः

  1. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार : मेडिकल कॉलेज के साथ सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का रास्ता खुलेगा।
  2. शिक्षा के अवसर : स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
  3. रोजगार सृजन : डॉक्टर,नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी और अन्य कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

क्षेत्रीय पहचान : यह संस्थान एमसीबी जिले को स्वास्थ्य और शिक्षा के मानचित्र पर स्थापित करेगा,स्वास्थ्य मंत्री की लगातार मॉनिटरिंग के चलते निर्माण कार्य में तेजी देखी जा रही है।
मेंटल हॉस्पिटलः स्वास्थ्य सेवाओं का अगला विस्तार-जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बाद अब चिरमिरी में मानसिक चिकित्सालय (मेंटल हॉस्पिटल) की स्थापना की दिशा में पहल शुरू हो चुकी है, यह परियोजना कई मायनों में महत्वपूर्ण है, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी,संभाग स्तर पर मरीजों को सुविधा मिलेगी,गंभीर मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी,यह कदम क्षेत्र को एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक संदेश : घोषणाओं से आगे बढ़कर क्रियान्वयन- इस पूरे घटनाक्रम ने एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी दिया है जनता अब केवल घोषणाओं और बोर्ड से संतुष्ट नहीं होती, बल्कि परिणाम चाहती है, जहाँ एक ओर पूर्व की ‘बोर्ड पॉलिटिक्स’ को लेकर सवाल उठते रहे हैं, वहीं वर्तमान में सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को ‘जमीनी विकास’ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
बदलती सोच,बदलता चिरमिरी- चिरमिरी और मनेंद्रगढ़ क्षेत्र आज एक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है जहाँ अतीत की अधूरी योजनाओं की यादें हैं,वहीं वर्तमान में उन योजनाओं को पूरा करने का दावा भी है,स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की सक्रियता और निगरानी ने यह संकेत दिया है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो वर्षों से अटकी योजनाएं भी धरातल पर उतर सकती हैं, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये परियोजनाएं आने वाले समय में किस स्तर तक क्षेत्र की जनता को स्थायी लाभ पहुंचा पाती हैं।
2028 में तय होगी सच्चाई,विपक्ष ने उठाए सवाल
वहीं विपक्ष,खासकर कांग्रेस,इन दावों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है,पूर्व विधायक डॉ. विनय जायसवाल के कार्यकाल से जुड़े विवादों के बीच अब कांग्रेस यह सवाल उठा रही है कि क्या ये परियोजनाएं पूरी तरह प्रभावी होंगी या नहीं,विपक्ष का तर्क है कि केवल भवन निर्माण ही पर्याप्त नहीं होता,बल्कि डॉक्टर,स्टाफ, उपकरण और सेवाओं की गुणवत्ता ही असली कसौटी होती है,राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,इस पूरे विकास मॉडल का वास्तविक मूल्यांकन 2028 के विधानसभा चुनाव में होगा, तब यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा दावे स्थायी उपलब्धि में बदले या फिर यह भी राजनीतिक नैरेटिव तक ही सीमित रह गया।
‘बोर्ड पॉलिटिक्स’ का वह दौर,जब सपनों से खेला गया…
कांग्रेस शासनकाल के दौरान चिरमिरी में मल्टी स्पेशियल्टी अस्पताल का मुद्दा काफी चर्चित रहा,तत्कालीन विधायक डॉ. विनय जायसवाल द्वारा अचानक अस्पताल का बोर्ड लगाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि क्षेत्र को बड़ी स्वास्थ्य सुविधा मिलने जा रही है,लेकिन वास्तविकता इससे अलग थी,अस्पताल का कोई ठोस ढांचा नहीं था,न संसाधन,न स्टाफ की व्यवस्था और सबसे अहम,योजना क्रियान्वयन के स्तर तक पहुंच ही नहीं पाई,स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम ‘दिखावे की राजनीति’ का उदाहरण बन गया,जब कुछ ही समय में वह बोर्ड भी हटा दिया गया,यह घटना आज भी लोगों के मन में राजनीतिक अविश्वास के रूप में दर्ज है।
सत्ता परिवर्तन के बाद बदली प्राथमिकताएं…
प्रदेश में सरकार बदलने के बाद जब मनेंद्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मिली,तब से एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गतिविधियां तेज हो गईं,स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा अधूरी योजनाओं को पूरा करना,स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाना,ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाना इसका असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
जिला अस्पतालः वर्षों पुराना सपना अब हकीकत
मनेंद्रगढ़ का जिला अस्पताल, जो लंबे समय से केवल घोषणा और फाइलों में सीमित था,अब संचालन की स्थिति में आ चुका है,यह अस्पताल अब नियमित रूप से मरीजों का इलाज कर रहा है,आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है,आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए राहत का केंद्र बन रहा है, स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी बाहर जाना पड़ता था,अब वही सेवाएं जिले में उपलब्ध होने लगी हैं।


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