केल्हारी में उजड़ गए गरीबों के आशियाने
कार्यवाही पर पूर्व विधायक ने उठाये सवाल बताया मानवीय संवेदनाओं का कत्ल
एमसीबी,25 मार्च 2026(घटती-घटना)। एक ओर जहाँ पूरा क्षेत्र शक्ति की भक्ति में डूबा है और ‘शुभ-लाभ’ की कामना कर रहा है,वहीं छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के केल्हारी क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। ग्राम मनवारी में प्रशासन के बुलडोजर ने नवरात्रि के पावन पर्व पर कई निर्धन परिवारों के सिर से छत छीन ली। कल तक जिन घरों में दीपक जल रहे थे,आज वहाँ सिर्फ मलबे का ढेर और बेबस आंखों के आंसू शेष हैं।
बिना चेतावनी, सपनों पर चला पीला पंजा
पीडि़त ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की टीम ने किसी ‘तानाशाही’ फरमान की तरह अचानक दस्तक दी,ग्रामीणों ने सिसकते हुए बताया कि उन्हें संभलने तक का मौका नहीं दिया गया।
न नोटिस,न मोहलत
ग्रामीणों का दावा है कि प्रशासन ने नियमानुसार न तो कोई पूर्व सूचना दी और न ही बेदखली का नोटिस थमाया।
बरसों की मेहनत मिट्टी में…
पुश्तैनी रूप से रह रहे इन परिवारों ने तिनका-तिनका जोड़कर जो आशियाना बनाया था, वह चंद मिनटों में मलबे में तब्दील हो गया, हम देवी माँ की पूजा की तैयारी कर रहे थे, और प्रशासन ने हमारे घर की दीवारें ही ढहा दीं। अब हम इस खुले आसमान के नीचे अपने बच्चों को लेकर कहाँ जाएँ?
यह मानवीय संवेदनाओं का कत्ल है : गुलाब कमरो
इस घटना ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस कार्रवाई को ‘क्रूरता की पराकाष्ठा’ करार दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा की एक तरफ प्रदेश में नारी शक्ति और आस्था का पर्व मनाया जा रहा है, दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन गरीबों के घर उजाड़ने में व्यस्त है। यह केवल मकान नहीं टूटे हैं,बल्कि गरीबों के भरोसे और उनकी मेहनत का विनाश हुआ है। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या सूचना के ऐसी कार्रवाई पूरी तरह से तानाशाही पूर्ण है।
प्रशासनिक चुप्पी और गहराता संकट
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है,अधिकारियों की चुप्पी प्रभावित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है।
सड़क पर पीडि़त परिवार
फिलहाल पीडि़त परिवार अपने गृहस्थी के सामान के साथ खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर हैं, क्षेत्र में तनाव का माहौल है और ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या विकास या अतिक्रमण हटाने के नाम पर मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखना उचित है? नवरात्रि का पर्व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है, लेकिन मनवारी के इन गरीबों के लिए यह समय न्याय की गुहार लगाने का बन गया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इन बेघर हुए परिवारों को कोई राहत पहुँचाती है,या फिर ‘बुलडोजर राज’ की गूँज में इन गरीबों की चीखें दबकर रह जाएंगी।
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