
सोनहत-देवगढ़ में अग्नि तांडव, वन्यजीव बेहाल
-राजन पाण्डेय-
कोरिया/सोनहत, 23 मार्च 2026(घटती-घटना)। कोरिया और सूरजपुर की सीमाओं से शुरू हुई भीषण वनाग्नि अब विकराल रूप ले चुकी है, देवगढ़, सोनहत और गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व के जंगलों में आग बेकाबू होकर नए क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले रही है, ताजा हालात में ग्राम छिंगरा,भगवतपुर और जोगिया के जंगल धधक रहे हैं, जिससे न केवल वन संपदा बल्कि वन्यजीवों का अस्तित्व भी संकट में आ गया है। जंगलों में लगी आग ने महुआ सीजन के बीच ग्रामीणों की आजीविका पर भी गहरा असर डाला है, कई जगह छोटे पौधे और वनस्पतियां जलकर राख हो चुकी हैं, जबकि जोगिया क्षेत्र में धुएं का घनत्व इतना बढ़ गया है कि दिन में भी दृश्यता कम हो गई है, ग्रामीणों के अनुसार पिछले 48 घंटों में आग ने तेजी से फैलकर व्यापक नुकसान पहुंचाया है।
ग्रामीणों की चेतावनी और बढ़ता खतरा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि छिंगरा,भगवतपुर और आसपास के क्षेत्रों में लगी आग पर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह आग रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकती है, ग्रामीणों के अनुसार जानवर पहले ही डरकर गांव की ओर आ रहे हैं। अगर आग नहीं रुकी, तो खतरा और बढ़ जाएगा।
इंद्रदेव के भरोसे सिस्टम?
हालात को देखकर यह भी कहा जा रहा है कि विभाग अब भी बारिश या प्राकृतिक राहत के भरोसे बैठा है,पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सक्रिय रोकथाम की बजाय इंतजार की नीति अपनाई जा रही है,जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
टाइगर रिजर्व में ‘रेड अलर्ट’ जैसे हालात
गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व के सोनहत परिक्षेत्र में स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है,यहां बाघों और अन्य वन्यजीवों के कॉरिडोर में आग पहुंचने से जानवरों का पलायन शुरू हो गया है,जंगलों में जल स्रोत सूखने और आग के फैलने से वन्यजीव सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं,जिससे उनके बीच संघर्ष और गांवों की ओर बढ़ने की घटनाएं बढ़ने की आशंका है।
‘मार्च क्लोजिंग’ बनाम जलते जंगल
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां एक ओर जंगल जल रहे हैं,वहीं दूसरी ओर विभागीय स्तर पर मार्च क्लोजिंग और बिलिंग की प्रक्रिया में व्यस्तता दिखाई दे रही है,सूत्रों का दावा है कि मैदानी अमला पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं है और अधिकारी कार्यालयों तक सीमित हैं,फायर वाचरों की कमी या उनकी अनुपस्थिति के कारण आग एक बीट से दूसरी बीट तक तेजी से फैल रही है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या आग बुझाने की प्राथमिकता पीछे छूट गई है और कागजी काम आगे बढ़ गया है?
सूखे स्टॉप डैम और बढ़ती त्रासदी
स्थिति को और गंभीर बना रहा है जल संकट। टाइगर रिजर्व के भीतर बने अधिकांश स्टॉप डैम सूख चुके हैं या उनमें पानी का स्तर बेहद कम है, ऐसे में वन्यजीव पानी की तलाश में जंगल छोड़कर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं,आग और पानी की कमी का यह दोहरा संकट वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, उनके प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और भोजन की भी कमी उत्पन्न हो गई है।
संकट गहरा, जवाबदेही जरूरी
सोनहत और आसपास के जंगलों में लगी आग ने एक बार फिर वन प्रबंधन की तैयारियों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जंगल जल रहे हैं, वन्यजीव पलायन कर रहे हैं, ग्रामीण चिंतित हैं अब देखना यह होगा कि प्रशासन और वन विभाग कब सक्रिय होकर इस आपदा पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाते हैं, क्योंकि यह सिर्फ जंगल की आग नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतु और मानव जीवन—तीनों के लिए एक बड़ा खतरा है।
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