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खड़गवां@सिंघत जलाशय नहर लाइनिंग में बड़ा खेलः 8 इंच की जगह 4 इंच ढलाई का आरोप

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-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,22 मार्च 2026 (घटती-घटना)। खड़गवां जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत सिंघत जलाशय से जुड़ी नहर लाइनिंग निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं,ग्रामीणों ने ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत कर घटिया निर्माण करने का आरोप लगाया है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
मापदंडों की खुली अनदेखी
जानकारी के अनुसार,नहर लाइनिंग के लिए निर्धारित 8 इंच मोटाई के स्थान पर मात्र 4 इंच ढलाई की जा रही है, इसके अलावा जहां लोहे की छड़ों (रॉड) की दूरी 1 फीट होनी चाहिए, वहां लगभग 2 फीट (60 सेंटीमीटर) की दूरी पर ही रॉड लगाकर काम किया जा रहा है, यह स्पष्ट रूप से तय मानकों का उल्लंघन है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए,दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा नहर का निर्माण मानकों के अनुसार दोबारा कराया जाए।
बड़े सवाल कायम
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा, ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच करेगा।
तकनीकी प्रक्रिया की अनदेखी
निर्माण कार्य में कंक्रीट की मजबूती के लिए आवश्यक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग भी नहीं किया जा रहा है,बिना वाइब्रेशन के ढलाई करने से कंक्रीट में खाली जगह रह जाती है,जिससे भविष्य में दरार,रिसाव और टूट-फूट की आशंका बढ़ जाती है।
मोबाइल से हो रहा निरीक्षण?
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहते और केवल मोबाइल के माध्यम से कार्य की निगरानी कर रहे हैं,जब संबंधित इंजीनियर से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वे दूसरे साइट पर हैं और देखकर ही कुछ बता पाएंगे। इससे निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
मिलीभगत की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी लापरवाही बिना अधिकारियों की संलिप्तता के संभव नहीं है,आरोप है कि ठेकेदार मनमाने तरीके से काम कर रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं,जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और मजबूत हो जाती है।
ग्रामीणों में आक्रोश
घटिया निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि इस तरह के कार्य से सरकारी धन की बर्बादी हो रही है और किसानों को मिलने वाले पानी पर भी खतरा मंडरा रहा है,यदि नहर कमजोर बनी,तो पूरी योजना प्रभावित हो सकती है।


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