- इको टूरिज्म से सतत विकास का संदेश,छात्रों को मिला नया नजरिया
- प्रेमनगर में गूंजा पर्यावरण संरक्षण का मंत्र,पर्यटन से रोजगार की राह
- संतुलित विकास की सीख,इको टूरिज्म कार्यशाला में छात्रों को नई दिशा
- पर्यटन और पर्यावरण का संगम…प्रेमनगर कॉलेज में जागरूकता का संदेश
-संवाददाता-
सूरजपुर,20 मार्च 2026 (घटती-घटना)। शासकीय नवीन महाविद्यालय, प्रेमनगर में राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित पाँच दिवसीय इको टूरिज्म कार्यशाला के चौथे दिन का सत्र छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास के नए आयाम विषय पर केंद्रित रहा, यह सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और व्यवहारिक दृष्टिकोण प्रदान करने वाला साबित हुआ, जिसमें पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
गरिमामय उपस्थिति में हुआ आयोजन
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एच. एन. दुबे ने की, मुख्य अतिथि के रूप में नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुखमनिया जगते तथा विशिष्ट अतिथि श्री आलोक साहू उपस्थित रहे,विषय विशेषज्ञों के रूप में डॉ. अखिलेश द्विवेदी,डॉ. अखिलेश पाण्डे एवं श्री विनोद साहू ने अपने विचार साझा किए,कार्यक्रम का संचालन सह-संयोजक श्री हीरालाल सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया, कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ी राज्य गीत के सामूहिक गायन ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। अतिथियों का पारंपरिक रूप से तिलक,बैच और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया।
छात्रों की सक्रिय भागीदारी बनी सफलता की कुंजी
कार्यशाला में पंजीकृत लगभग 50 प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे कार्यक्रम और अधिक प्रभावी बन सका, यह सत्र विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक और जागरूक पर्यटक बनने की प्रेरणा भी प्रदान कर गया।
इको टूरिज्म—भविष्य का संतुलित रास्ता
यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण संदेश देकर गई विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं, यदि संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो पर्यटन न केवल आर्थिक विकास का माध्यम बन सकता है, बल्कि प्रकृति के संरक्षण का भी सशक्त साधन साबित हो सकता है।
गरिमामय उपस्थिति में हुआ आयोजन
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एच. एन. दुबे ने की, मुख्य अतिथि के रूप में नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुखमनिया जगते तथा विशिष्ट अतिथि श्री आलोक साहू उपस्थित रहे,विषय विशेषज्ञों के रूप में डॉ. अखिलेश द्विवेदी,डॉ. अखिलेश पाण्डे एवं श्री विनोद साहू ने अपने विचार साझा किए,कार्यक्रम का संचालन सह-संयोजक श्री हीरालाल सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया, कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ी राज्य गीत के सामूहिक गायन ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। अतिथियों का पारंपरिक रूप से तिलक,बैच और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया।
पर्यावरण संरक्षण : हमारी जिम्मेदारी
स्वागत उद्बोधन में सुश्री रेखा जायसवाल ने पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताते हुए कहा की पर्यटन का विकास तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए किया जाए,उन्होंने ग्रीन डेवलपमेंट की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए जिम्मेदार पर्यटन की आवश्यकता पर बल दिया।
पर्यटन में छिपे हैं रोजगार के अवसर
प्राचार्य डॉ. एच. एन. दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि सरगुजा संभाग के चुनिंदा महाविद्यालयों में इस कार्यशाला का आयोजन होना गर्व की बात है, उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा की क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं,युवाओं के लिए यह रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकता है,स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है,उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यटन क्षेत्र में कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
विकास और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
विशिष्ट अतिथि आलोक साहू ने स्थानीय प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा की पर्यटन विकास के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है,इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है,लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी की विकास के नाम पर यदि प्राकृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाया गया, तो यह दीर्घकाल में गंभीर परिणाम देगा।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया इको टूरिज्म
मुख्य वक्ता डॉ. अखिलेश द्विवेदी ने पर्यटन और पर्यावरण के संबंध को वैज्ञानिक एवं संवैधानिक दृष्टिकोण से समझाया, पर्यावरण संरक्षण नागरिकों का मूल कर्तव्य है,पर्यटन स्थलों पर मानव गतिविधियों से संसाधनों पर दबाव बढ़ता है,अनियंत्रित विकास से पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है,उन्होंने सस्टेनेबल टूरिज्म की अवधारणा स्पष्ट करते हुए कहा की हमें ऐसा पर्यटन मॉडल अपनाना चाहिए,जिसमें संसाधनों का संतुलित उपयोग हो और आने वाली पीढि़यों के लिए भी प्रकृति सुरक्षित रहे।
पर्यटनः एक व्यापक उद्योग
विषय विशेषज्ञ विनोद साहू ने पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया पर्यटन केवल घूमना नहीं, बल्कि एक व्यापक उद्योग है,इसमें परिवहन,होटल प्रबंधन,गाइड सेवा,हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद शामिल हैं,छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक और सांस्कृतिक संसाधनों की भरमार है,उन्होंने विद्यार्थियों को स्वरोजगार और कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मानव और प्रकृति का संतुलन
जरूरी संदेश- द्वितीय सत्र में डॉ. अखिलेश पाण्डे ने मानव और प्रकृति के संबंध पर गहन विचार रखे और कहा की अत्यधिक दोहन से जलवायु परिवर्तन और आपदाएं बढ़ रही हैं,जैव विविधता में कमी एक गंभीर खतरा है,उन्होंने कहा हमें प्रकृति से उतना ही लेना चाहिए,जितनी हमारी आवश्यकता हो,न कि लालच के आधार पर, उन्होंने इको टूरिज्म को विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम बताया।
आभार और सम्मान के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में आयोजक सचिव हरिशंकर ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया, अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया,कार्यक्रम के सफल संचालन में रविशंकर उर्रे,मनबोध कुजूर,जयशंकर,अमित कुमार,शेषनन्दन टेकाम,डंकेश्वर वर्मन,सोनाली किंडो,पुनीता राजवाड़े,अन्नू सिंह,डॉ. संजय वर्मा,सुभिया सिंह,किशुन एवं चंद्रशेखर का सराहनीय योगदान रहा।
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